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ड्रेन सफाई के लिए मई में मांगे थे Rs.24.62 करोड़ अब मिले 63 लाख, बरसात में फिर बाढ़ का खतरा

आने वाले बरसात के दिनों में जिले के लोगों को एक बार फिर बाढ़ का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि ड्रेनेज विभाग की ओर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 12, 2018, 02:00 AM IST

ड्रेन सफाई के लिए मई में मांगे थे Rs.24.62 करोड़ अब मिले 63 लाख, बरसात में फिर बाढ़ का खतरा
आने वाले बरसात के दिनों में जिले के लोगों को एक बार फिर बाढ़ का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि ड्रेनेज विभाग की ओर से सरकार को भेजे गए करोड़ों रुपए के एस्टीमेट में से मात्र 63 लाख रुपए ही सरकार ने भेजे हैं। ऐसे में हम अंदाजा लगा सकते हैं कि सरकार लोगों की सुरक्षा की कितनी परवाह है। रोपड़ जिले में हर साल बाढ़ का खतरा रहता है। लगभग दो साल पहले अगस्त 2012 में तो खुद पंजाब के उस समय के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था और अब पंजाब में कांग्रेस की सरकार को भी डेढ़ साल गुजर गया है। फिर भी परेशानी का कोई हल नहीं हुआ। अगर हम मौसम विभाग की मानें तो पंजाब में इस बार जुलाई के पहले हफ्ते तक मानसून आने की संभावना है।

सूत्रों के अनुसार ड्रेनेज विभाग ने सरकार को मई के आखरी हफ्ते में 24.62 करोड़ रुपए का एस्टीमेट भेजा था। इसमें से 22.98 करोड़ रुपए बड़े कामों के लिए और 1.63 करोड़ रुपए जिले की तमाम ड्रेनों की सफाई के लिए मांगे थे। इसमें आनंदपुर साहिब से गढ़शंकर को जोड़ने वाले पुल के पिल्लरों के चारों तरफ बेडवार (पत्थर) लगाने के लिए 4.30 करोड़ और सालापुर, रसीदपुर, अटारी, अटारीबेला, बलोवाल, वजीदपुर, गजपुर बेला, लोधीपुर आदि ड्रेनों की सफाई के लिए 7.45 करोड़ रुपए और एलग्रा के लिए 1 करोड़ समेत कई छोटो कामों के लिए प्रपोजल बनाकर भेजा था। अब यहां पर बड़ा सवाल है कि सरकार से जारी सिर्फ 63 लाख की ग्रांट से ड्रेनेज विभाग क्या काम करेगा। जिन कामों के लिए ये पैसे भेजे हैं, वे भी पूरे होंगे या मात्र खानापूर्ति ही होगी। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक ड्रेनेज विभाग ने सरकार को कुल 24 करोड़ 62 लाख रुपए का कुल एस्टीमेट बनाकर भेजा था। इसी तरह सवां नदी को चैनेलाइज करने के लिए 210 करोड़ रुपए का एस्टीमेट बनाकर भेजा है और वह भी अधर में लटका है। वहीं ड्रेनेज विभाग सरकार से मिली सिर्फ 63 लाख रुपए की ग्रांट से अब जरूरी काम करवाएगा। इसमें चरणगंगा और बेला के पास मिआणी खड्‌ड की सफाई मुख्य होगी क्योंकि बरसात के दिनों में पानी एसडीएम ऑफिस आनंदपुर साहिब में पहुंचता है।

पिल्लरों के चारों तरफ बेडवार बनाने को मांगे थे 4.30 करोड़

यहां सबसे अहम बात यह है कि जिस पुल के पिल्लरों के नीचे पत्थर लगाने के लिए ड्रेनेज विभाग ने 4.30 करोड़ रुपए मांगे थे। इससे पिल्लरों के आसपास बेडवार लगाने का प्लान था ताकि पिल्लर बैठने से कोई अनहोनी घटना न हो सके। अब इतनी कम ग्रांट से इनकी मरम्मत कैसे होगी। यह वहीं ठाणा पुल है जिसके नीचे माइनिंग माफिया द्वारा माइनिंग करने से पिल्लर नंगे हो गए और उनका बेस भी हिल गया है। इस मामले को सबसे पहले भास्कर ने उठाया था जिसके बाद वहां से माइनिंग बंद हुई थी।

हर बार लोधीपुर बांध के टूटने से होता है लाखों का नुकसान

पिछले दो साल से लोधीपुर बांध टूट रहा है। इसके टूटने से हर बार लाखों रुपए की फसल और जमीन मिट्टी पानी में बहने से नुकसान हो रहा है लेकिन इस बार भी सरकार ने इसकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। यही नहीं पंजाब के तत्कालीन उपमुखमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने अगस्त 2012 मेें खुद बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर आश्वासन दिया था कि जल्द ही लोधीपुर बांध और स्वां नदी का काम करवाया जाएगा पर अब तक ऐसा कुछ नहीं हुआ।

माइनिंग के कारण पिल्लरों के नीचे मिट्टी नाममात्र रह गई है।

अब सिर्फ जरूरी काम ही करवाएगा ड्रेनेज विभाग

हमने सरकार को अपनी तरफ से एस्टीमेट भेज दिया है। अब सरकार की मर्जी है कि वह कितने पैसे देती है। जितने पैसे मिले हैं, उससे डीसी गुरनीत तेज से मीटिंग करके अति जरूरी कामों को करवाया जाएगा। माइनिंग के कारण ठौणा पुल के नीचे के पिल्लर बिल्कुल नंगे हो गए थे इसलिए 4.30 करोड़ रुपए मांगे थे लेकिन कोई पैसा नहीं आया। सुखविंदर सिंह कलसी, एक्सईएन ड्रेनेज विभाग रोपड़

संदीप वशिष्ट | रोपड़

आने वाले बरसात के दिनों में जिले के लोगों को एक बार फिर बाढ़ का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि ड्रेनेज विभाग की ओर से सरकार को भेजे गए करोड़ों रुपए के एस्टीमेट में से मात्र 63 लाख रुपए ही सरकार ने भेजे हैं। ऐसे में हम अंदाजा लगा सकते हैं कि सरकार लोगों की सुरक्षा की कितनी परवाह है। रोपड़ जिले में हर साल बाढ़ का खतरा रहता है। लगभग दो साल पहले अगस्त 2012 में तो खुद पंजाब के उस समय के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था और अब पंजाब में कांग्रेस की सरकार को भी डेढ़ साल गुजर गया है। फिर भी परेशानी का कोई हल नहीं हुआ। अगर हम मौसम विभाग की मानें तो पंजाब में इस बार जुलाई के पहले हफ्ते तक मानसून आने की संभावना है।

सूत्रों के अनुसार ड्रेनेज विभाग ने सरकार को मई के आखरी हफ्ते में 24.62 करोड़ रुपए का एस्टीमेट भेजा था। इसमें से 22.98 करोड़ रुपए बड़े कामों के लिए और 1.63 करोड़ रुपए जिले की तमाम ड्रेनों की सफाई के लिए मांगे थे। इसमें आनंदपुर साहिब से गढ़शंकर को जोड़ने वाले पुल के पिल्लरों के चारों तरफ बेडवार (पत्थर) लगाने के लिए 4.30 करोड़ और सालापुर, रसीदपुर, अटारी, अटारीबेला, बलोवाल, वजीदपुर, गजपुर बेला, लोधीपुर आदि ड्रेनों की सफाई के लिए 7.45 करोड़ रुपए और एलग्रा के लिए 1 करोड़ समेत कई छोटो कामों के लिए प्रपोजल बनाकर भेजा था। अब यहां पर बड़ा सवाल है कि सरकार से जारी सिर्फ 63 लाख की ग्रांट से ड्रेनेज विभाग क्या काम करेगा। जिन कामों के लिए ये पैसे भेजे हैं, वे भी पूरे होंगे या मात्र खानापूर्ति ही होगी। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक ड्रेनेज विभाग ने सरकार को कुल 24 करोड़ 62 लाख रुपए का कुल एस्टीमेट बनाकर भेजा था। इसी तरह सवां नदी को चैनेलाइज करने के लिए 210 करोड़ रुपए का एस्टीमेट बनाकर भेजा है और वह भी अधर में लटका है। वहीं ड्रेनेज विभाग सरकार से मिली सिर्फ 63 लाख रुपए की ग्रांट से अब जरूरी काम करवाएगा। इसमें चरणगंगा और बेला के पास मिआणी खड्‌ड की सफाई मुख्य होगी क्योंकि बरसात के दिनों में पानी एसडीएम ऑफिस आनंदपुर साहिब में पहुंचता है।

फ्लड कंट्रोल को डीसी ने भी मांगे थे 3.43 करोड़

बता दें कि 8 मई को चंडीगढ़ में पंजाब फ्लड कंट्रोल की मीटिंग हुई थी। इसमें पंजाब के सभी डीसी आए थे। मीटिंग में रोपड़ की डीसी गुरनीत तेज ने रोपड़ जिले के लिए 3 करोड़ 43 लाख रुपए अति जरूरी कामों के लिए मांगे थे पर फिर भी पंजाब सरकार ने मात्र 63 लाख रुपए ही मंजूर किए।

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Web Title: ड्रेन सफाई के लिए मई में मांगे थे Rs.24.62 करोड़ अब मिले 63 लाख, बरसात में फिर बाढ़ का खतरा
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