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मारे गए बच्चों के घर वाले बोले-सिद्धू ने उनका हाल नहीं जाना

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 03:10 AM IST

Atari News - मोहावा डिफेंस ड्रेन में स्कूली बस के गिरने से जिन बच्चों की मौत हुई थी, उनके घर वालों ने खुद की उपेक्षा से नाराजगी...

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मोहावा डिफेंस ड्रेन में स्कूली बस के गिरने से जिन बच्चों की मौत हुई थी, उनके घर वालों ने खुद की उपेक्षा से नाराजगी जताई है। इन लोगों का आरोप है कि स्थानीय निकाय मंत्री हादसे में बच्चों को बचाने वाले करणबीर के घर आए और पुल का भी मुआयना करके रकम देने की घोषणा की लेकिन उनकी सुध तक नहीं ली।

बताते चलें कि सिद्धू के आने की खबर से मृतक बच्चों के घर के कुछ मेंबर करणबीर के घर गए हुए थे। यह लोग हादसे के दौरान तत्कालीन सरकार और कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा की गई घोषणा सिद्धू को बताना चाहते थे। पहले तो सुरक्षा कर्मी उनको नहीं मिलने दे रहे थे और बड़ी मुश्किल से जब मिले तो सिद्धू ने इस मामले को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर डाल दिया।

हादसे में मारे गए बच्चों सहजप्रीत सिंह और अंशप्रीत कौर के दादा बलविंदर सिंह तथा रोबन प्रीत के दादा गुरनाम सिंह का कहना है कि उस दौरान वादा किया गया था कि हरेक बच्चे के घर वालों को 20-20 लाख रुपए और परिवार में एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी। इन लोगों ने बताया कि सरकार ने सिर्फ 5-5 लाख रुपए देकर पल्ला झाड़ लिया। इन लोगों का कहना है कि मदद करना अलग बात है, कम से कम सिद्धू हमें दिलासा ही दे देते तो भी महसूस होता कि हमारे जख्मों पर मरहम लगाया गया है।

तीन नरेगा मजदूरों ने किया बच्चों को बचाने का दावा

हादसे के दौरान बच्चों को बचाने का दावा गांव के तीन मजदूरों ने किया है। इनका दावा है कि जिस करणबीर ने 15 बच्चों को बस से जिंदा बचाया था उसे उन लोगों ने बाहर निकाला था। यह लोग बुधवार को स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू से मिलने उनके मोहावा दौरे के दौरान वहां पहुंचे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी।

गांव के ही दिहाड़ीदार मजदूर परमजीत सिंह, प्रीतम सिंह और दयाल सिंह ने बताया कि जब बस ड्रेन में गिरी तो वे लोग पास में ही पौधों को पानी दे रहे थे। परमजीत ने पानी में छलांग लगा दी और शीशा तोड़ने को चिल्लाया। इसके बाद बाहर खड़े दयाल सिंह ने पास पड़ी ईंट उसे पकड़ाई। परमजीत ने ईंट से शीशा तोड़ कर सबसे पहले करणबीर को बाहर निकाला। इसी दौरान प्रीतम सिंह शोर मचाता हुआ गांव की तरफ भागा और गांव के लोग इकट्ठा हो गए। गांव के सरपंच ने और अन्य लोगों ने भी माना कि इन तीन लोगों ने सबसे पहले पहुंच कर मदद की। यह लोग सिद्धू से आर्थिक मदद की गुहार लगाने पहुंचे थे।

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