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हमें अपने स्वभाव में विनम्रता और प्यार अपनाने की जरूरत है : स्वाति

संत निरंकारी सत्संग भवन बरनाला में जिला स्तर पर महिला समागम का आयोजन किया गया। यह समागम फरीदकोट से आई हुईं बहन...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:05 AM IST

हमें अपने स्वभाव में विनम्रता और प्यार अपनाने की जरूरत है : स्वाति
संत निरंकारी सत्संग भवन बरनाला में जिला स्तर पर महिला समागम का आयोजन किया गया। यह समागम फरीदकोट से आई हुईं बहन स्वाति भाटिया के नेतृत्व में हुआ। समागम में बरनाला और तपा ब्रांच की लगभग 300 बहनें शामिल हुईं। बहनों ने अवतार बानी के शबद से इस समागम की शुरूआत की। बहनों को सद्गुरु माता सविंद्र हरदेव महाराज का संदेश देते हुए बहन स्वाति भाटिया ने कहा कि हम सबको अपने आप में सुधार करना होगा। भक्ति पहले घर से शुरू होती है। हमें अपने स्वभाव में प्यार और विनम्रता को अपनाने की जरूरत है। आज जो संसार के हालत हम देख रहे हैं, उसी के तहत अपनी सोच में तबदीली लाने की जरूरत है। अपने सास-ससुर, पति और बच्चों के प्रति जो हमारे फर्ज हैं, उन्हें पूरा करना है। बरनाला ब्रांच के संयोजक जीवन गोयल ने बताया कि पुरातन महापुरुषों के जीवन और उनकी तरफ से मानवता के प्रति दी गई शिक्षाओं पर रोशनी डाली। आखिर में बहन सिमरनजीत कौर ने बहन स्वाति भाटिया और आ‌ई हुई साध संगत का धन्यवाद किया। मंच संचालन बहन सुनीता गोयल ने किया। (कपिल गर्ग)

शबद का उच्चारण करती हुई बहनें। -भास्कर

खनाल कलां गांव में स्वामी विश्वात्मा ने प्रवचनों से श्रद्धालुओं को निहाल किया

दिड़बा|खनाल कलां गांव में स्वामी विश्वात्मा नंद सस्वती पुजारी पधारे हुए हैं। शनिवार को उन्होंने प्रवचनों से श्रद्धालुओं को निहाल किया। इस दौरान आसपास के श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने ने कहा कि भारत देश पीरों-फकीरों और साधू-संतों की धरती है। साधू-संतों के द्वारा की गई तपस्या और हवन यज्ञ के कारण ही देश में शांति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि वह किस गुरु या धर्म के साथ जुड़े बुराई से हमेशा दूर रहना चाहिए। लोभ त्याग कर देश की सेवा में अपना जीवन लगाएं। इस मौके पर नरेश कुमार, भोला राम, हिम्मत राय, प्रगट सिंह आदि उपस्थित थे।

हृदय साफ रहेगा, तभी धर्म ठहरेगा : सुनिधि

संगरूर|धर्म सभा को संबोधित करते हुए साध्वी सुनिधि महाराज ने कहा कि अगर हमारा हृदय साफ रहेगा, तभी धर्म इसके अंदर ठहरेगा। एक बार जिज्ञासु ने महात्मा बुद्ध को कहा कि मेरे हृदय में धर्म नहीं ठहरता, तब महात्मा बुद्ध ने कहा कि मैं कल तुम्हारे घर आऊंगा तथा इसका उत्तर आपको वहां मिल जाएगा। महात्मा बुद्ध अगले दिन उस जिज्ञासु के घर पहुंचे। आहार लेने के लिए जैसे ही उन्होंने अपना पात्र वहां रखा, तब जिज्ञासु ने पात्र में गंदगी देखकर पात्र में आहार नहीं डाला व गंदगी संबंधी महात्मा को बताया। तब महात्मा ने कहा कि यही आपके प्रश्न का उत्तर है। अगर आपका हृदय गंदगी से भरा पड़ा है तो इसमें धर्म नहीं ठहरेगा। पहले अपने हृदय की गंदगी को साफ करे।

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