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संगरूर में सब्सिडी पर दी जाने वाली 2 हजार मशीनों की कमी, 37 करोड़ खर्च

पराली को आग लगाने से पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में प्रदूषण को देखते हुए केंद्र सरकार ने बजट में राज्य सरकारों की मदद...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 02:10 AM IST
पराली को आग लगाने से पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में प्रदूषण को देखते हुए केंद्र सरकार ने बजट में राज्य सरकारों की मदद करने का प्रावधान रखा है। जिसके तहत केंद्र सरकार राज्यों को पराली संभालने के लिए सब्सिडी पर मशीनें उपलब्ध करवाएगी।

जिससे जिले के किसानों को भी लाभ पहुंचने की उम्मीद है क्योंकि इस बार पराली जलाने में संगरूर जिला पंजाब भर में सबसे पहले नंबर पर रहा था। पूरे जिले की बात की जाए तो यहां 2 लाख 77 हजार हेक्टेयर रकबे में धान की बिजाई की गई थी। जिसमें 2 लाख हेक्टेयर से भी अधिक रकबे की पराली को आग लगाई गई।

जिला खेतीबाड़ी अधिकारी डाॅ. करनैल सिंह संद्धू का कहना है कि किसानों को सब्सिडी पर खेती साधन मुहैया करवाने के लिए विभाग को करीब 37 करोड़ रुपए की जरूरत है। डिमांड सरकार को भेजी गई है। उन्होंने कहा कि किसान पराली को न जलाएं इसके लिए विभाग के पास 426 हैप्पी सीडर हैं जोकि किसानों को उपलब्ध करवाए गए हैं जबकि जरूरत 2275 से अधिक की है।

हर किसान तक पहुंचाने होंगे पराली संभालने के साधन

सरकार के बजट में इस प्रावधान से क्षेत्र के किसानों को भी राहत मिली है। भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान अमरीक सिंह का कहना है कि सरकार को पराली संभालने के लिए अधिक से अधिक किसानों की मदद करनी चाहिए। किसान मजबूरी में पराली को आग लगाता है क्योंकि किसानों के पास पराली संभालने के लिए कोई साधन नहीं है। बजट में की गई घोषणा के अनुसार हर किसान तक पराली को संभालने के लिए साधन पहुंचने चाहिए।

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बरनाला में 723 मरीजों को लग सकेगी टीबी पेंशन

भास्कर संवाददाता| बरनाला

टीबी प्रोग्राम अफसर डॉ नवजोत सिंह भुल्लर के अनुसार जिले में कुल 723 टीवी के मरीज हैं।

वित्त मंत्री ने टीबी की बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए 500 रुपए प्रतिमाह पेंशन देने की घोषणा की है। इससे मरीजों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि जिले में कुल 25 हजार बीपीएल कार्ड होल्डर हैं। जो सरकार केंद्र सरकार की 5 लाख प्रति परिवार मेडिकल बीमा स्कीम का लाभ ले सकेंगे।

आलू उगाने वाले किसानों को नहीं किया प्रोत्साहित

जिले में करीब 50 हजार एकड़ पर इस साल आलू की खेती हुई है। वित्त मंत्री ने आलू, टमाटर व प्याज पर 500 करोड़ रुपए का फंड रखा लेकिन किसानों को गेहूं व धान की तरह एमएसपी (न्यूनतम बेच मूल्य) के ऐलान की उम्मीद थी। आलू की खेती करने वाले कुलबिंदर सिंह ने कहा कि ना तो बजट में एमएसपी की बात हुई ना ही स्वामीनाथम रिपोर्ट पर कुछ वित्त मंत्री बोले। जिले के किसानों के लिए बजट में कुछ भी नहीं है। जिससे किसान खुश हो सके।

बजट किसान‌ों, व्यापारियों, आम के लिए खास नहीं|बजट पेश करने के बाद किसान‌ों, व्यापारियों, आम लोगों और कर्मचारियों में मायूसी देखने को मिल रही है। व्यापारी को जीएसटी में बड़े बदलाव, कर्मचारी को टैक्स स्लैब के बदले जाने, युवाओं को सरकारी नौकरी के ऐलान की उम्मीद थी।

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