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पढ़ाना छोड़ मनरेगा का डाटा इकट्ठा करने को लगाए अध्यापक

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:10 AM IST

प्रदेश के शिक्षा विभाग के सचिव को सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई की चिंता है, लेकिन जिला शिक्षा...
प्रदेश के शिक्षा विभाग के सचिव को सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई की चिंता है, लेकिन जिला शिक्षा अफसर इस बात की प्रवाह नहीं करते। इसलिए प्रदेश शिक्षा सचिव के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए जिला शिक्षा अफसर ने जिले के विभिन्न स्कूलों में काम करने वाले 20 शिक्षकों को तुरंत मनरेगा के काम में जुट जाने के निर्देश दिए हैं। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के एग्जाम में कुछ दिन बचे हैं। अध्यापकों के पढ़ाई छोड़ कर दूसरे काम में जाने से विद्यार्थियों के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है। जिले के शिक्षक इस बात का विरोध कर रहे हैं। वहीं जिला शिक्षा अफसर ने कहा कि कुछ दिनों की बात है।

9 दिन पहले जारी शिक्षा सचिव के आदेश के उल्ट डीईओ ने जारी किया फरमान

प्रदेश के शिक्षा सचिव ने 9 दिन पहले 22 जनवरी को आदेश जारी किया था कि पढ़ाई के दिनों में सरकारी स्कूल में पढ़ा रहे किसी भी शिक्षक को सरकार के किसी भी गैर शिक्षा के काम में नहीं भेजा जाए। साथ ही उन्होंने लिखा है ये आदेश वोट बनाने वाले बीएलओ का पक्के तौर पर काम कर रहे टीचर्स पर लागू नहीं होता। लेकिन इसके उल्ट जिला शिक्षा अफसर ने 1 फरवरी को आदेश जारी करते हुए जिले के विभिन्न स्कूलों में कंप्यूटर टीचर्स के तौर पर काम करने वाले 20 अध्यापकों को स्कूल छोड़ कर मनरेगा का काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

फाइनल एग्जाम सिर पर होने के कारण अध्यापकों और अभिभावकों में रोष

पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की दसवीं की परीक्षा 28 फरवरी से व 12वीं की परीक्षा 10 मार्च से शुरू हो रही है। इसके साथ ही बाकी क्लास के एग्जाम भी कुछ दिनों में शुरू हो जाएंगे। स्कूलों में पहले से अध्यापकों की संख्या कम होने व टीचर्स द्वारा अन्य कामों में ड्यूटी दिए जाने के कारण बच्चों का बहुत सा सिलेबस बाकी पड़ा है। फिर से 20 अध्यापकों के ड्यूटी पर जाने के कारण बच्चों की पढ़ाई पर सवालिया निशान लग गया है। जिसके चलते अध्यापको व बच्चों के अभिभावकों में रोष है। दसवीं क्लास में सरकारी स्कूल बरनाला में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक एमरजीत सिंह, सोमनाथ सिंह, जसमेल कौर, हरवीर सिंह ने कहा कि इस तरह के काम के लिए सरकार को किसी और विभाग से कर्मचारी लेने चाहिए। सरकार को बच्चों की पढ़ाई का ध्यान भी रखना चाहिए।

सेवा केंद्रों के कर्मियों की नहीं ली जा रही हैं सेवाएं

वीरवार सुबह सरकारी स्कूलों में पहुंचे फरमान में साफ लिखा गया है कि अध्यापकों से मनरेगा के डॉटा एंट्री का काम करवाना है। इसलिए सरकारी स्कूलो के कंप्यूटर टीचर्स की जरूरत है। सभी टीचर्स आज ही अपना काम छोड़ कर चले आएं। इस काम के लिए जिले के सेवा केंद्रों में 80 ऑपरेटर हैं। उनसे काम नहीं लिया जा रहा।

सीधी बात

राजवंत कौर,

जिला शिक्षा अफसर

ड्यूटियां लगाने को लेकर शिक्षा अफसर से बातचीत

एग्जाम के दिनों में टीचर्स को दूसरा काम क्यों दिया गया?

-मनरेगा का जरूरी काम बाकी था। इसलिए टीचर्स की जरूरत है।

बच्चों की पढ़ाई खराब न हो कोई विकल्प है?

-5-7 दिन की बात है। ज्यादा चिंता की बात नहीं है।

शिक्षा सचिव के आदेश के उल्ट फरमान क्यों सुनाया गया?

-उनसे परमिशन मांगी गई है। परमिशन मिल ही जाएगी।

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Web Title: पढ़ाना छोड़ मनरेगा का डाटा इकट्ठा करने को लगाए अध्यापक
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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