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छाए बादलों ने 35 साल बाद चंद्रग्रहण और ब्लू मून का संगम देखने को उत्साहित लोगों की उम्मीदों पर पानी फेरा

भास्कर संवाददाता | गुरदासपुर/बटाला साल 2018 के पहले पूर्ण चंद्र ग्रहण के मद्देनजर बुधवार को तड़के 4 बजे से ही मंदिरों...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:00 AM IST

भास्कर संवाददाता | गुरदासपुर/बटाला

साल 2018 के पहले पूर्ण चंद्र ग्रहण के मद्देनजर बुधवार को तड़के 4 बजे से ही मंदिरों में पूजा-अर्चना शुरू हो गई। सवा आठ बजे सूतक काल शुरू होते ही सभी मंदिरों के पट बंद कर दिए गए। भारत में साल 1982 के बाद (35 साल बाद) पूर्ण चंद्र ग्रहण और ब्लू मून का संगम दिखना था। इसे देखने के लिए लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला और लोग इस नजारे को देखने के लिए लोग शाम से ही ताक लगाए बैठे हुए थे, लेकिन बादल छाए रहने के कारण चंद्र ग्रहण और ब्लू मून देखने की चाहत मन में ही रह गई।

सूतक काल शुरू होते ही बंद हुए मंदिरों के पट, लोगों ने गायों को खिलाया चारा

चंद्रग्रहण के चलते गायों को चारा खिलाते लोग। -भास्कर

कड़ाके की ठंड में सुबह 4 बजे ही मंदिर पहुंचे लोग

कड़ाके की ठंड के बावजूद इस साल के पहले पूर्ण चंद्र ग्रहण के चलते लोग तड़के 4 बजे से ही मंदिरों में पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचने लगे। पूजा का दौर करीब आठ बजे तक चला और इसके बाद करीब सवा आठ बजे सूतक काल शुरू होते ही सभी मंदिरों के पट बंद कर दिए गए। चौधरी मया दास मिस्त्री शिवाला मंदिर के पुजारी पंडित भरत त्रिवेदी ने बताया कि सूतक काल से लेकर चंद्र ग्रहण तक मंदिरों में पूजा-पाठ पर रोक रहती है। चंद्र ग्रहण खत्म होने के बाद ही मंदिरों के पट खोलकर साफ-सफाई कर पूजा शुरू हुई। चंद्रग्रहण के चलते लोगों ने गायों को चारा और पक्षियों को दाना खिलाया। कई लोगों ने गरीबों को वस्त्र भी दान किए।

शाम साढ़े 5 से लेकर 8.41 बजे तक रहा चंद्र ग्रहण

साल 2018 का पहला चंद्र ग्रहण शाम साढ़े 5 बजे शुरू हुआ और रात के 8.41 मिनट तक रहा। यह चंद्र ग्रहण करीब 77 मिनट तक पूर्ण तौर पर रहा। इस दौरान चंद्रमा का निचला हिस्सा ज्यादा चमकीले रग का दिखा।

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