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पढ़ाने के साथ-साथ टीचर रणजीत पौधे लगा पर्यावरण को भी बना रहे स्वच्छ

बच्चों को विद्या का दान देने के साथ-साथ वातावरण की संभाल में लगे प्राइमरी स्कूल जौहल नंगल के अध्यापक रणजीत सिंह...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 30, 2018, 02:01 AM IST

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    बच्चों को विद्या का दान देने के साथ-साथ वातावरण की संभाल में लगे प्राइमरी स्कूल जौहल नंगल के अध्यापक रणजीत सिंह छीना को इलाके भर में ‘कुदरत के रक्षक’ के नाम से जाना जाता है। बटाला के गांव छीना रेलवाला निवासी अध्यापक रणजीत सिंह छीना असल जिंदगी में भी पूरे कर्मयोगी हैं। वह जिधर भी जाते हैं, अपनी अच्छाई की छाप छोड़ते जाते हैं और लोगों को कुदरत के साथ जुड़ने का संदेश देते हैं।

    1995 में जेबीटी टीचर भर्ती हुए रणजीत छीना स्कूल में बच्चों को पूरी तनदेही से पढ़ाते हैं। इसके साथ ही वह बच्चों को मौलिक शिक्षा देने के साथ-साथ वातावरण की संभाल के लिए भी प्रेरित करते हैं। रणजीत सिंह ने बताया कि वह पिछले 10 सालों से काफी संख्या में पौधे लगाकर वातावरण की संभाल में अपना योगदान दे रहे हैं। सड़कों किनारों पर बहुत से उनके द्वारा पौधे लगाए गए हैं। रणजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने विशेष पानी वाली टंकी बनाई हुई है, जिसको वह अपने मोटरसाइकिल के पीछे बांधकर लगाए गए पौधों को पानी लगाने की सेवा भी करते हैं। कई बार ज्यादा पौधे लगाने हों तो रणजीत सिंह पौधे लगाने के लिए दिहाड़ी पर मजदूर भी साथ लेकर जाते हैं।

    रणजीत सिंह अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर छीना रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए पानी की छबील भी हर साल लगाते हैं, जो कि हर साल बैसाखी से लेकर 31 अक्टूबर तक रोजाना चलती रहती है। रणजीत सिंह समाज भलाई के कार्यों को करने को पहल देता है। उनका मानना है कि हर व्यक्ति को मानवता की भलाई के लिए प्रयास करने चाहिएं तथा अपनी कुछ न कुछ देन समाज को जरूर देनी चाहिए।

    पौधे लगाते हुए अध्यापक रणजीत सिंह छीना।

    पौधे लगाने के लिए निकाल रहे अपनी दसवंध |रणजीत सिंह अपना दसवंध पौधे लगाने के लिए होते खर्च के लिए निकालते हैं और वह जिस भी रास्ते पर जाते हैं, रास्ते के किनारों पर पौधे लगा देते है। रणजीत सिंह स्कूल समय के बाद या छुट्टी वाले दिन जनतक स्थानों, सड़कों के किनारे अकेले ही पौधे लगाते रहते हैं।

    पौधे लगाने के साथ सड़क पर मरे जानवरों को जमीन में दफनाते हैं

    रणजीत सिंह छीना अकेले पौधे ही नहीं लगाते, बल्कि 10 किलोमीटर के क्षेत्र में सड़क पर कोई भी जानवर, पक्षी मर जाए तो उसे सड़क से उठाकर जमीन में भी दफन करते हैं, ताकि मरे जानवर की वातावरण में बदबू न फैले। मास्टर इस कार्य के लिए अपनी गाड़ी में हमेशा खुरपा, कही, बालटा आदि रखते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रयोग किया जा सके। इलाके में उनकी इस काम के लिए प्रसिद्धी होने के कारण कई लोग उन्हें फोन करके भी बता देते हैं कि किस जगह पर कोई मरा हुआ जानवर पड़ा है और वह स्कूल समय के बाद उस जानवर को दफना कर आते हैं।

    बाइक से पानी की टंकी जोड़ पौधों को देते हैं पानी

    वातावरण की संभाल के लिए आगे आने का किया आह्वान

    रणजीत सिंह का मानना है कि हर व्यक्ति को मानवता की भलाई के लिए य| करने चाहिएं और अपनी कुछ न कुछ देन समाज को जरूर देनी चाहिए। वह अपने काम से पूरी तरह से संतुष्ट हैं और लोगों को भी वातावरण की संभाल के लिए आगे आने का बुलावा देते हैं। रणजीत ने कहा कि कई बार उनके द्वारा लगाए पौधे गुज्जरों के जानवर खा जाते हैं, जिस कारण उनका नुकसान होता है। उन्होंने गुज्जरों से भी अपील की है कि वह जानवरों से पौधों को बचाएं, यही उनकी सेवा होगी। रणजीत से प्रेरणा लेकर बहुत से युवा समाज भलाई के लिए आगे आ रहे हैं।

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