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बटाला कौंसिल में वाहन सप्लाई

बटाला नगर कौंसिल के प्रधान नरेश महाजन को नगर कौंसिल की ओर से मुहैया करवाए गए वाहन (इनोवा) का सप्लाई आर्डर रद्द कर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 25, 2018, 02:25 AM IST

बटाला कौंसिल में वाहन सप्लाई
बटाला नगर कौंसिल के प्रधान नरेश महाजन को नगर कौंसिल की ओर से मुहैया करवाए गए वाहन (इनोवा) का सप्लाई आर्डर रद्द कर दिया गया है। जिस कंपनी को वाहन सप्लाई का आर्डर दिया गया था, उसे नोटिस भेजा गया है क्योंकि जो नियम कौंसिल ने वाहन सप्लाई आर्डर के समय तय किए थे, उन्हें पूरा नहीं किया गया जिससे कौंसिल को भारी नुकसान हुआ है। सप्लाई आर्डर रद्द होने के बाद नरेश महाजन के पास अब वह वाहन नगर कौंसिल के खाते में नहीं रहेगा। एक तरह से वाहन उनसे छीन लिया गया है। नगर कौंसिल बटाला के ईओ भूपेन्द्र सिंह ने मामले की जांच करने के बाद यह सप्लाई आर्डर रद्द किया है। फिलहाल साफ नहीं किया गया कि महाजन को कोई वाहन दिया जाएगा या नहीं।

जानकारी के अनुसार नगर कौंसिल बटाला की ओर से प्रधान नरेश महाजन को इनोवा प्रदान करवाई गई थी। कौंसिल के रिकार्ड के अनुसार माशा मार्केट स्थित पार्थ एंड कंपनी को प्रधान के लिए इनोवा सप्लाई करने का ठेका दिया गया था। शर्त के अनुसार यह इनोवा शाम पांच बजे के बाद कौंसिल में खड़ी होनी चाहिए थी। इस इनोवा को चलाने के लिए चालक कंपनी को ओर से प्रदान किया जाना था। इस इनोवा को जिला के बाहर नहीं ले जाया जा सकता था। अगर कोई सरकारी टूर हो तो पूर्वअनुमति के बाद ही इनोवा बाहर ले जाई जा सकती थी। इसके लिए नगर कौंसिल की ओर से कंपनी को प्रतिमाह 31 हजार 900 रुपए दिए जा रहे थे। यह इनोवा महाजन को 15 सितंबर 2016 को अलाट हुई थी। तब से हर माह पेमेंट हो रही थी।

प्रधान ने नहीं उठाया फोन | इस मामले के बारे में जब प्रधान नरेश महाजन को फोन किया गया तो उन्होंने कई बार कई कॉल के बावजूद भी फोन नहीं उठाया।

प्राइवेट फर्म से प्रधान के लिए ली गई इनोवा, चलाता था कौंसिल ड्राइवर, 5 लाख से ज्यादा का भुगतान, गाड़ी छिनी

शिकायत मिलने के बाद ईओ भूपेंद्र सिंह ने करवाई जांच, ठेका रद्द कर कंपनी को भेजा नोटिस

मामले की ईओ को शिकायत मिली थी, जिसकी जांच में पता चला कि कंपनी घपला कर रही है। जांच में पाया कि कंपनी तय नियमों को पूरा नहीं कर रही। इनोवा को 5 बजे के बाद कौंसिल में नहीं खड़ा किया जाता था। वहीं, कई बार बाहर भी ले जाया गया, जिसकी पूर्वानुमति किसी से नहीं ली गई। समझौता शर्त के अनुसार इनोवा के लिए कंपनी ने तो कोई ड्राइवर नहीं दिया, लेकिन उसे कौंसिल का कर्मी चलाता था जिसका वेतन नगर कौंसिल के खाते से जाता था। नगर कौंसिल के इस कर्मी को कौंसिल के काम की बजाय प्रधान की इनोवा चलाने के लिए अब तक 5 लाख से अधिक वेतन के रूप में दिया जा चुका है।

कंपनी पर कौंसिल कर सकती है फर्जीवाड़ा का केस

जांच के बाद ईओ ने कंपनी को रजिस्ट्री से नोटिस भेजा लेकिन कोई जवाब नहीं आया। कंपनी के पते की जांच की गई तो पाया गया कि वाहन सप्लाई कंपनी का जो पता नगर कौंसिल में लिखवाया है, उस जगह ऐसी कोई कंपनी ही नहीं है। यह सच्चाई जानने के बाद ईओ ने वाहन सप्लाई आर्डर तुरंत रद्द कर दिया। कंपनी की तलाश की जा रही है। इस संदर्भ में नगर कौंसिल की ओर से कंपनी के खिलाफ मामला भी दर्ज करवाया जा सकता है क्योंकि उसने फर्जीवाड़ा किया है।

ड्राइवर का पांच लाख का वेतन भी लौटाने को लिखा

ईओ भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि मामले में धांधली हुई है। 15 सितंबर 2016 से लेकर 30 जून 2018 तक वाहन को कौंसिल के चालक अनिल ने चलाया, जो कि नियमों के खिलाफ था। इस तरह चालक का करीब पांच लाख सात हजार रुपए वेतन नगर कौंसिल के खाते से गया है। वेतन की रकम वापस लौटाने के लिए कंपनी को कहा है। जिस कंपनी से वाहन हायर किया था, उसने जो पता दिया है, वहां उसका आफिस ही नहीं है। हम जांच कर रहे हैं कि कहीं कंपनी फर्जी तो नहीं है।

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