पंजाब / पहले 20 फीट गड्ढा खोदा तो गिरने लगी मिट्‌टी, दूसरा बोर हाथ से खोदने में लगे 6 दिन... नहीं बचा बच्चा

Dainik Bhaskar

Jun 12, 2019, 09:58 AM IST



130 feet dug new borewell did not work
130 feet dug new borewell did not work
130 feet dug new borewell did not work
फतेहवीर की चिता को मुखाग्नि देते हुए दादा रोही सिंह। फतेहवीर की चिता को मुखाग्नि देते हुए दादा रोही सिंह।
संगरूर में रोष मार्च करते हुए विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि। संगरूर में रोष मार्च करते हुए विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि।
भगवानपुरा के खेत में उतरा चॉपर। भगवानपुरा के खेत में उतरा चॉपर।
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फतेहवीर की चिता को मुखाग्नि देते हुए दादा रोही सिंह।फतेहवीर की चिता को मुखाग्नि देते हुए दादा रोही सिंह।
संगरूर में रोष मार्च करते हुए विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि।संगरूर में रोष मार्च करते हुए विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि।
भगवानपुरा के खेत में उतरा चॉपर।भगवानपुरा के खेत में उतरा चॉपर।
130 feet dug new borewell did not work

  • बचाव अभियान में कई जगह दिखी अनियोजित कार्यप्रणाली
  • 130 फीट हाथ से खुदाई करने में लग गया ज्यादा वक्त
  • फतेहवीर को एंबुलेंस से चंडीगढ़ ले गए थे, लेकिन डेड बॉडी लाए चॉपर में

संगरूर (पंजाब). गांव भगवानपुरा में 6 जून को बोरवेल में गिरे 2 साल के फतेहवीर को 6 दिनों के बाद मंगलवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे बोरवेल से बाहर निकाल लिया गया, लेकिन तब तक बच्चे की मौत हो चुकी थी। 6 दिनों तक चले बचाव अभियान के दौरान शासन की बड़ी लापरवाही भी सामने आई।

 

पहले 20 फीट गड्ढा खोदा तो मिट्टी गिरने के कारण काम रुक गया। फिर दूसरा बोर 130 फीट खोदा गया लेकिन इसमें भी कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद हाथ से भी खुदाई की गई लेकिन अंत में मैन बोरवेल में रस्सी डालकर ही बच्चे को बाहर निकाला जा सका। बचाव कार्य में आई बाधा के कारण ऑपरेशन सफल नहीं हो सका। 6 दिन तक चले बचाव सबसे पहले रेस्क्यू ऑपरेशन में रविवार की रात को एनडीआरएफ को असफलता हाथ लगी, जब उसने बताया कि फतेहवीर के हाथों को बांध लिया गया, परंतु उसे ऊपर नहीं खींचा जा सकता। उसके शरीर को खतरा हो सकता है।

 

मिट्‌टी गिरी, तो हाथों से काम शुरू किया

शुक्रवार को बोरवेल को ओपन करना शुरू किया गया, परंतु दोपहर में ऊपर से मिट्टी गिरने लगी, जिसके कारण 20 फीट की बाद खुदाई बंदकर नया बोर बनाने का फैसला किया गया। इसके बाद शुक्रवार की रात नए बोरवेल को खोदने के लिए मशीन वाली बड़ी बोकी तैयार कर मशीन के साथ मौके पर फिट की गई। रात में बोकी ने खुदाई का काम शुरू किया तो फतेहवीर वाले बोरवेल में धमक पड़ने लगी।

 

शनिवार सुबह तक काम रोक दिया गया। शनिवार से लगातार हाथों से नया बोरवेल खोदकर 36 इंच चौड़े और साढ़े 8 फीट लंबे सीमेंट के पाइप बोरवेल में डालने शुरू किए गए। रविवार सुबह 13वां पाइप डाला जा रहा था कि अचानक नीचे पहले पाइप के कड़े पर दबाव बनने लगा और कड़ा टूटने का खतरा पैदा हो गया। ऐसे में लोहे का नया कम चौड़ा पाइप बनाकर सबसे नीचे भेजा गया और तब जमीनी स्तल से 130 फीट की गहराई को टच किया जा सका।

 

सुंरग गलत दिशा में बनी, तो पूरी रात निकल गई

रविवार की रात दोनों बोर के बीच सुरंग बनाई जा रही थी तो उसकी दिशा गलत हो गई, जिसके कारण पूरी रात दिशा को ठीक करने में निकल गई। इसके बावजूद फतेहवीर तक नहीं पहुंचा जा सका। बचाव अभियान के अंतिम दिन सोमवार को पूरा दिन और रात फतेहवीर तक पहुंचने में लग गई। हालांकि सेंसर की मदद से फतेहवीर की लोकेशन को ट्रेस कर लिया गया। इसके बावजूद फतेहवीर तक नहीं पहुंचा जा सका। सुरंग की खुदाई के काम में मिट्टी गिरने से रुकावट आती चली गई। अचानक मंगलवार की सुबह करीब 5.20 बजे फतेहवीर को पुराने बोर से ही खींच कर निकाल लिया गया।

 

 

जानिए... कैसे निकाला फतेहवीर को और मिशन के 5 ब्लंडर

 

  • ऑपरेशन से पहले ‘क्विक प्रायर सर्वे’ होता है, जिसमें घटनास्थल व अंदर फंसे शख्स से जुड़ी जानकारी जुटाई जाती है। इसी सर्वे पर पूरा ऑपरेशन प्लान होता है। यहां खुदाई करने वालाें काे पता नहीं था कि बोर वर्टिकल ही है? कहीं थाेड़ा-बहुत टेढ़ा तो नहीं। इसी कारण सुरंग गलत खोदी गई।
  • एनडीआरएफ, जिला प्रशासन के पास सिविल इंजीनियरिंग में एक्सपर्ट व 100 फीट से ज्यादा गहरी खुदाई के बारे में बताने वाला माइनिंग इंजीनियर नहीं था। 
  • मशीनरी की बजाय मैन्युअल तरीके पर भरोसा किया। उन्नत तकनीकों के बावजूद समानांतर बाेर की मिट्टी निकालने को लगाया रस्सा तक हाथ से खींचा गया। सरकार कारसेवा करने वालाें पर निर्भर रही।
  • जिस बाेर में बच्चा गिरा, वक्त बर्बाद करते हुए उसके चारों तरफ 20 फीट तक का सारा हिस्सा खोदा, इसकी जरूरत नहीं थी। 
  • टीम में नेतृत्व औैर विल पावर नहीं थी। कभी एनडीआरएफ, कभी डेराप्रेमी, कभी जिला प्रशासन ताे कभी सेना के हिसाब से ऑपरेशन चलाया गया।-जसवंत सिंह गिल, रिटायर्ड चीफ इंजीनियर

 

 

करीब 30-35 घंटे तक जिंदा रहा फतेहवीर

6 जून को दोपहर 4 बजे बोरवेल में गिरे बच्चे की मौत 3-4 दिन पहले ही हो गई थी यानी करीब 30-35 घंटे फतेहवीर जिंदा रहा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। डॉ. सेंथिल कुमार और प्रो. वाईएस बंसल का कहना है कि फतेहवीर की मौत बोरवेल में दम घुटने व उसका शरीर गल जाने से हुई है। मंगलवार सुबह 7 बजकर 24 मिनट पर बच्चे को पीजीआई लाया गया था।

 

हाईपॉक्सिया रही मौत की वजह
मौत की वजह हाईपॉक्सिया यानी दम घुटना बताया। जब किसी इंसान के शरीर तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती तो वह हाईपॉक्सिया का शिकार हो जाता है। इस कारण इंसान का ब्रेन, लीवर और कई ऑर्गन काम करना बंद कर देते हैं। फतेह के साथ भी ऐसा ही हुआ था। जहां वह गिरा था, उस जगह उसे ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही होगी, जिससे मौत हो गई।

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