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चंडीगढ़ के रोजाना 600 यात्री, बसों में 500 किराया, रेल लिंक हो तो ~ 100 में जा पाएंगे

एक वर्ष पहले
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राजधानी चंडीगढ़ तक रेल लिंक के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है, हालांकि बठिंडा से राजपुरा तक डबल रेल ट्रैक व इलेक्ट्रिफिकेशन का काम चल रहा है लेकिन इससे आगे मोहाली तक रेल लिंक के लिए जमीन एक्वायर न हो पाने की वजह से इस प्रोजेक्ट के शुरू होने के आसार नहीं बने। प्रदेश सरकार तीन साल से रेलवे को जमीन ही नहीं दिला पाई है जबकि रेल बजट में इस ट्रैक को मंजूरी के साथ प्रोजेक्ट ग्रांट भी मंजूर कर चुकी है और सिंबालिक बजट भी जारी कर चुकी है।

बठिंडा-राजपुरा-मोहाली प्रोजेक्ट को शुरू कराने में पटियाला के पूर्व सांसद धर्मवीर गांधी निजी दिलचस्पी से जुटे हैं। वे इस प्रोजेक्ट के लिए रेलवे बोर्ड से कई बार बैठकें कर चुके हैं और बार-बार शुरू करने के लिए रेलमंत्री पीयूष गोयल से आग्रह भी कर चुके हैं। बठिंडा-राजपुरा तक डबलिंग व इलेक्ट्रिफिकेशन हो रहा है जबकि राजपुरा-मोहाली का रेल ट्रैक का रास्ता क्लियर नहीं हो रहा, इसके लिए वे मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल से भी जमीन अधिग्रहण के लिए अपनी बात रख चुके हैं।

2022 में मुकम्मल होगा बठिंडा-राजपुरा रेल ट्रैक


बठिंडा-राजपुरा प्रोजेक्ट 3 अलग-अलग फेज में काम चल रहा है। राजपुरा-बठिंडा के 172.64 किलोमीटर डबल रेल ट्रैक व इलेक्ट्रिफिकेशन का काम रेलवे विकास निगम लिमिटेड कर रही है। यह प्रोजेक्ट तीन पैकेज में चल रहा है, जिसमें पहले पैकेज में राजपुरा-ककराला वाया पटियाला 308.29 करोड़, दूसरे पैकेज में ककराला-हंडियाला 339.29 करोड़ व तीसरे पैकेज में हंडियाया-बठिंडा ट्रैक 301.20 करोड़ को अलग-अलग ठेकेदार कंपनियां काम कर रही हैं और दिसंबर 2022 मुकम्मल किया जाना है। बठिंडा-राजपुरा रेल सेक्शन में 4 हाल्ट समेत 23 रेलवे स्टेशन हैं। रेलवे डबल ट्रैक से रेल लाइन पर गाड़ियों की भीड़ कम होगी और ट्रेन क्रॉसिंग का झंझट खत्म होने के साथ गाड़ियों की स्पीड भी बढ़ेगी।


प्रदेश सरकार की कारगुजारी से फ्रीज हुआ प्रोजेक्ट

राजपुरा से नलास तक रेल लाइन बिछाई गई है जबकि इससे आगे मोहाली तक केवल 16 किलोमीटर रेल लाइन बिछाई जानी है। इस ट्रैक के लिए फतेहगढ़ साहिब, पटियाला व मोहाली के अलग-अलग शहरों से लगभग 41 एकड़ जमीन खरीद की जानी है और इसका 78 करोड़ रुपए का बजट है। किसान इस रेल लिंक प्रोजेक्ट के लिए जमीन देने को भी तैयार हैं जबकि बुर्जियों के अलावा नक्शे भी बने हुए हैं। इसके बावजूद प्रदेश सरकार जमीन एक्वायर करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। रेल अधिकारियों की मानें तो पंजाब सरकार जगह नहीं दे सकी, जिसके चलते रेलवे ने प्रोजेक्ट फ्रीज कर दिया।

बठिंडा से राजपुरा तक ही उपलब्ध है रेल सेवा, आगे लोग ट्रेन बदल पहुंचते चंडीगढ़

3 साल मेंे नलास से मोहाली रेलट्रैक के लिए 41 एकड़ जमीन नहीं दिला पाई सरकार

केंद्र में दो बार राजपुरा-मोहाली रेल लिंक का प्रोविजन लाने के बावजूद प्रदेश सरकार जमीन एक्वायर नहीं कर रही। एक ही परिवार की बसें चलने से मोटी कमाई की जा रही है। वे मुख्यमंत्री और वित्तमंत्री से कई बार मिल चुके हैं। रेलवे ने 1000 रुपए सिंबालिक बजट राशि भी जारी दी ताकि प्रोजेक्ट चालू हो।
डॉ. धर्मवीर गांधी, पूर्व सांसद पटियाला

प्रदेश सरकार की प्रोजेक्ट में दिलचस्पी नहीं

रेल लिंक से 10 जिलों को फायदा

प्राइवेट-सरकारी बसों का महंगा सफर

बठिंडा से प्रतिदिन 600 से ज्यादा लोग प्राइवेट एसी बसों में 500 रुपए एक तरफ का किराया अदा करके जाते हैं। सरकारी बसों का किराया लगभग 280 रुपए है। वहीं बठिंडा से रात 12 बजे कालका मेल ट्रेन से प्रतिदिन लगभग 150 से ज्यादा मुसाफिर चंडीगढ़ जाते हैं और किराया 100 रुपए है।

बठिंडा-राजपुरा-मोहाली-चंडीगढ़ रेल लिंक बनने से बठिंडा, बरनाला, धूरी, नाभा, पटियाला, मुक्तसर, फरीदकोट, फाजिल्का आदि 10 जिलों के अलावा राजस्थान के श्रीगंगानगर, अनूपगढ़ व बीकानेर तक सीधे राजधानी चंडीगढ़ से सीधा कनेक्ट होंगे। इस रेल ट्रैक से प्रतिदिन हजारों लोगों को फायदा होगा

बठिंडा-राजपुरा डबल ट्रैक के लिए तैयार की गई जमीन, जल्द ही इस पर ट्रैक बिछाया जाना है
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