पंजाब / 97 साल के स्वतंत्रता सेनानी गुरदियाल सिंह का निधन, 20 दिन पहले मिला था राष्ट्रपति सम्मान



97 years old Freedom Fighter Gurdial Singh Passes away
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97 years old Freedom Fighter Gurdial Singh Passes away
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  • आजाद हिंद फौज के नेता सुभाष चन्द्र बोस के ड्राइवर रह चुके गुरदियाल सिंह
  • सुप्रीम कोर्ट में देशभक्तों की सूची में 282 नंबर पर दर्ज है नाम
  • सरकारों से निराश हो 26 जनवरी 2019 को लौटा दिया था सरकारी सम्मान
  • एक दिन पहल नई बैटरी डलवाने के बावजूद गुरदियाल की सांसों के साथ रुके घड़ी के कांटे

Dainik Bhaskar

Aug 30, 2019, 11:23 AM IST

संगरूर. आजाद हिंद फौज के नेता सुभाष चन्द्र बोस के ड्राईवर रहे 97 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी गुरदियाल सिंह की मौत हो गई है। 20 दिन पहले ही गुरदियाल सिंह जी को दिल्ली में राष्ट्रपति सम्मान दिया गया। हालांकि जिला प्रशासन की लापरवाही के कारण गुरदियाल सिंह यह सम्मान पिछले वर्ष लेने से चूक गए थे। उनकी यह सम्मान प्राप्त करने की अंतिम इच्छा थी। संस्कार की रस्म शुक्रवार सुबह उभावाल रोड स्थित शमशान में सरकारी सम्मान के साथ की जाएगी। पार्थिव शरीर घर पर ही रखा गया है।

 

गुरदियाल सिंह के परिवार में उनका बेटा राजविन्द्र सिंह, पुत्र बधु मनप्रीत कौर और दो पोते हैं। राजविन्द्र सिंह बरनाला के सिविल अस्पताल में सरकारी एंबुलेंस पर ड्राइवर के पद पर तैनात हैं। गुरदियाल सिंह के पिता सज्जन सिंह 1927 में मलेशिया में पीडब्ल्यू की नौकरी करने के लिए चले गए थे। 16 वर्ष की उम्र में गुरदियाल सिंह अपने पिता के पास मलेशिया चले गए थे। वहां गुरदियाल सिंह गाड़ी चलाने लगे थे। रेडिय़ो सुनने के शौकीन गुरदियाल सिंह रेडियो पर नेता जी सुभाष चंद्र बोस का भाषण सुनकर प्रभावित हो गए थे। इसके बाद वह अंग्रेजों को भारत से निकालने के लिए अपनी जमीन-जायदाद आजाद हिंद फौज को देकर आजादी की लहर में कूद पड़े। नेता जी सुभाष चन्द्र बोस आजाद हिंद फौज की कमान संभालने के लिए 1943 में जर्मनी से मलेशिया आ गए थे।

 

इसी दौरान गुरदियाल सिंह ने बिना वेतन के नेता जी की गाड़ी चलानी शुरू की थी। 1943 से लेकर 1945 तक उन्होंने नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की गाड़ी चलाई। 1945 में अंग्रेजों ने उन्हें साथियों समेत गिरफ्तार कर लिया। उन्हें सिंगापुर व दिल्ली के लाल किले में कैद रखा गया। आजाद हिंद फौज में उन्हें अच्छे काम के लिए चार मैडल दिए गए। गुरदियाल सिंह का नाम सुप्रीम कोर्ट में देश भक्तों की सूची में 282 नंबर पर दर्ज है।

 

देश की आजादी के बाद गुरदियाल सिंह काफी समय तक इधर-उधर भटकते रहे। देश की सरकार ने आजाद हिंद फौज को स्वतंत्रता लहर मानने से इनकार कर दिया था। परिवार का गुजारा करने के लिए गुरदियाल सिंह ने 1960 से 1993 तक संगरूर में रहकर निजी बस पर ड्राइवर की नौकरी की। शरीर वृद्ध होने पर संगरूर बस स्टैंड पर हॉकर का काम किया।

ऐसे में 1947 से लेकर 1996 तक गुरदियाल सिंह को कोई पेंशन या भत्ता तक नहीं दिया गया। जिसके बाद गुरदियाल सिंह ने कोर्ट का सहारा लिया। कोर्ट के फैसले के बाद सरकार ने गुरदियाल सिंह को स्वतंत्रता सेनानी मान कर पेंशन देनी शुरू की थी।

 

गुरदियाल सिंह समय की सरकारों से निराश ही रहे हैं, जिसके चलते गुरदियाला सिंह ने 26 जनवरी 2019 को गणतंत्र दिवस पर सरकारी सम्मान को लौटा दिया था। क्योंकि जिला प्रशासन गुरदियाला सिंह का नाम राष्ट्रपति सम्मान के लिए भेजने में देरी कर दी थी। अगस्त 2018 को मिलने पर राष्ट्रपति सम्मान जिला प्रशासन की लापरवाही के कारण 9 अगस्त 2019 को मिल पाया था। गुरदियाल सिंह की राष्ट्रपति सम्मान लेने की अंतिम इच्छा थी।

 

गुरुवार सुबह 7 बजे उठने के बाद गुरदियाल सिंह ने अपनी पुत्रवधु से खाना लिया और इसके बाद दोबारा सो गए। 10.12 बजे परिवार ने उठाना चाहा तो वह नहीं उठे। उनकी मौत हो चुकी थी। पुत्र वधु मनप्रीत कौर ने बताया कि गुरदियाल सिंह ने कमरे में लगी घड़ी में बुधवार ही नई बैटरी डाला था। गुरुवार गुरदियाल सिंह की मौत के साथ ही घड़ी की टिक-टिक भी थम गई।

 

 

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