खास बात / जासूसी के आरोप में आर्मी के राडार पर आ चुके रवि का कहना, झूठे केस में फंसाया गया

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 03:16 PM IST


accused of leaking intelligence to Pak agency ISI denied the same and blamed the police
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  • 30 मार्च 2018 को मोगा जिले के गांव धल्लेके से जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था रवि कुमार को
  • सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक फरवरी 2018 में आईएसआई द्वारा भेजे जाने पर चार दिन दुबई में ट्रेनिंग ली रवि ने
  • Dainik Bhaskar से खास बातचीत में रामकुमार और अन्य किसी आईएसआई एजेंट से संपर्क की बात से किया इनकार

मोगा. पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम करने आरोप में फाजिल्का के रामकुमार की गिरफ्तारी के बाद अब मोगा जिले का रवि नामक युवक इंडियन आर्मी के राडार पर आ गया है। एक तरफ उसकी कॉल डिटेल के आधार पर रामकुमार की गिरफ्तारी की बात सामने आई है, लेेकिन दूसरी तरफ वह खुद को बेकसूर बता रहा है। दरअसल जासूसी के मामले में 9 महीने 7 दिन बाद हाल ही में ढाई महीने पहले 5 जनवरी को वह जमानत पर आया है। ऐसे में भले ही वह अपनी जिंदगी की गाड़ी को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां लगातार उस पर नजर बनाए हुए हैं। किसी भी सेना की तरफ से उसकी जिंदगी के अतीत को कुरेदा जा सकता है।

 

Dainik Bhaskar के साथ खास बातचीत के दौरान अपने बारे में रवि बताता है कि वह एक प्राइवेट फर्म में काम करता है। फरवरी 2018 में वह दुबई में दोस्तों के पास गया था। वहां तबीयत खराब हो जाने के चलते 4 दिन बाद ही भारत लौट आया। अमृतसर एयरपोर्ट पर उतरा तो उसके पास गिफ्ट था, जिसकी तलाशी लेने पर बैटरियां और मेकअप किट निकली थी। पासपोर्ट मांगने एयरपोर्ट पर अधिकारियों को पासपोर्ट दे दिया तो मोबाइल नंबर और रिहायश का पता नोट करके छोड़ दिया गया। इसके एक महीने बाद अचानक 29 मार्च 2018 को अमृतसर स्पेशल सेल के 12 लोग उसके घर पहुंचे। उन्होंने आते ही उसका, भाई प्रदीप और भाभी अनीता का मोबाइल लेकर स्विच ऑफ कर दिए। घर की तलाशी भी ली, मगर कुछ नहीं मिला तो कुछ पूछताछ की बात कहकर उसे अपने साथ गाड़ी में बिठाकर अपने साथ ले गए। 30 मार्च को कोर्ट में पेश करके सरकारी वकील के जरिये बताया गया कि उसके पास से काले रंग का बैग मिला है, जिसमें से भारत व सेना से जुड़े नक्शे मिले हैं। इसी आरोप पर 10 दिन का रिमांड लेकर पुलिस ने उसके साथ ज्यादतियां की। डंडों से बुरी तरह पीटा गया और रिमांड खत्म होने पर मीडिया से बात नहीं करने के लिए धमकाया गया। फिर कोर्ट में पेश किया तो वहां से जेल भेज दिया गया।

 

रवि की मानें तो 30 मार्च 2018 से 5 जनवरी 2019 तक उसके परिवार का चार से पांच लाख रुपए खर्च हो चुका है। घर की हालत ठीक नहीं होने के चलते जान-पहचान वालों से रुपए उधार लेकर खर्च करने पड़े। घर का कर्ज उतारने के लिए उसने प्राइवेट फैक्ट्री में दस हजार रुपए प्रति महीना पर नौकरी शुरू कर दी। पिछले ढाई महीने से उसके पास मोबाइल भी नहीं है। इसके अलावा रामकुमार के बारे में बात करने पर रवि का कहना है, 'मेरा न तो पहले किसी पाकिस्तानी आईएसआई के एजेंट से कोई तालमेल था और न ही मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेस में इलेक्ट्रिशियन राम कुमार के साथ कोई संबंध है। मुझे झूठे आरोप में फंसाया गया है।'

 

दूसरी ओर खुफिया एजेंसियों के मुताबिक स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल की टीम ने 30 मार्च 2018 को मोगा के गुरु अर्जुन नगर के रहने वाले रवि कुमार को जासूसी के केस में गांव धल्लेके से पकड़ा था। रवि के कब्जे से सेना की खुफिया डॉक्यूमेंट मिले थे। वह फिलहाल जमानत पर चल रहा है, लेकिन पुलवामा अटैक के बाद सीमा पर तनाव को लेकर सुरक्षा एजेंसियां चौकस हो गई थी। टीम को रवि की कॉल डिटेल से राम कुमार का मोबाइल नंबर मिला तो राम कुमार को लेकर जांच शुरू की और उसकी गतिविधियां संदिग्ध मिली। राम ने माना कि वह रवि को जानता था। रवि की तरह एक साल से ज्यादा से पाकिस्तान के लिए जासूसी कर रहा है। अब बात रवि की जमीनी हकीकत की की जाए तो रवि को 29 मार्च 2018 को अमृतसर स्पेशल सेल ने जासूसी के आरोप गिरफ्तार किया था। इसके बाद वह अब 5 जनवरी को जमानत पर बाहर आया है। तब ही से गुप्त तौर पर उस पर नजर रखी जा रही है कि वह किन लोगों से मिलता है और कहां-कहां आता-जाता है। आरोप यह भी है कि सितंबर 2017 को हनी ट्रैप के जरिये वह फेसबुक से आईएसआई महिला एजेंट के सपंर्क में आया था। इसके बाद आईएसआई ने 20 फरवरी 2018 को उसे ट्रेनिंग के लिए भेजा था और वहां 4 दिन की ट्रेनिंग के बाद 24 फरवरी को वापस लौट आया। ऐसे में पूछताछ के लिए वह किसी भी वक्त फिर से सेना के हत्थे चढ़ सकता है।

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