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म्यूनिसिपल व ट्रस्ट की प्राॅपर्टी बेचने को बनाया एक्ट, 12 साल से किराये पर बैठे लाेगों को पहल

एक वर्ष पहले
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पंजाब सरकार ने कमेटियों, निगमों व ट्रस्ट की प्राॅपर्टियों को लेकर पहली बार एक्ट बनाते हुए इन प्राॅपर्टियों पर पिछले 12 साल या इससे अधिक समय से किराये पर बैठे किरायेदारों या काबिज व्यक्तियों को बेचने के लिए हरी झंडी दे दी है। राज्य सरकार द्वारा हाल ही में द पंजाब मैनेजमेंट एंड ट्रांसफर आफ म्यूनिसिपल प्राॅपर्टी एक्ट 2020 बनने के बाद बठिंडा में नगर निगम की करीब 400 दुकानों में किराये पर बैठे दुकानदार खुश हैं। एक्ट के अनुसार दुकान की बिक्री के लिए प्राथमिकता उसे दी जाएगी जो कम से कम 12 साल तक दुकान में बतौर किरायेदार या काबिज होकर पानी या बिजली बिल का भुगतान करता रहा हो, लेकिन इससे पहले शिअद-भाजपा सरकार में पूर्व लोकल निकाय मंत्री अनिल जोशी तथा कांग्रेस सरकार में नवजोत सिंह सिद्धू विस में इस पर नोटिफिकेशन को मंजूरी दे चुके हैं, लेकिन बठिंडा नगर निगम हाउस में दो बार दुकानों की बिक्री का प्रस्ताव पास होने के बावजूद दुकानें या अन्य प्रापर्टी हस्तांतरित होने की कार्यवाही अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। गौरतलब है कि बठिंडा में नगर निगम की करीब 401 दुकानों में काफी दुकानों के केस कोर्ट में किराये या खाली करवाने के मामले में लंबित हैं तथा निगम का करीब 62 लाख रुपये से अधिक का किराया दुकानदारों पर लंबित है।

सरकार का आदेश, प्रापर्टी रजिस्टर तैयार करे म्यूनिसिपैलिटी व ट्रस्ट : सरकार के बनाए इस एक्ट के अनुसार म्यूनिसिपलिटी, जिसमें निगम, कौंसिल, कमेटी या ट्रस्ट आदि शामिल है, सारी प्रापर्टी का एक प्रापर्टी रजिस्टर तैयार करेगी ताकि इसे आम जनता की सूचना हित प्रदर्शित किया जा सके जिसमें किरायेदार का नाम, पता, फोन आदि भी शामिल करने जरूरी होंगे। इसके बार एक पारदर्शी तरीके से कमर्शियल प्रापर्टी को ई-आक्शन, रिहायशी प्रापर्टी को कूपन स्कीम तथा अन्य प्रापर्टी को सरकार के दिशा निर्देश बिक्री कर सकेगा।

पहले भी विधानसभा में पास हो चुका नोटीफिकेशन : अकाली भाजपा सरकार में अनिल जोशी के बतौर लोकल बॉडी मंत्री रहते समय वर्ष 2016 में पहली बार यह नोटीफिकेशन किया गया , लेकिन कार्यवाही की गति धीमी रही। इसके बाद नवजोत सिंह सिद्धू के बतौर मंत्री रहते समय इस नोटीफिकेशन को पुन लागू करने की कोशिश की गई। अब तीसरी बार सरकार ने इसे एक्ट बनाकर लोगों को राहत दी है। इस बाबत निगम की दुकान पर काबिज सुनील सिंगला कहते हैं कि अगर सरकार इस नियम को लागू करती है तो इसे लोकहित में कदम माना जाएगा जिससे लोगों को बहुत राहत मिलेगी। इंप्रवूमेंट ट्रस्ट बठिंडा के चेयरमैन केके अग्रवाल के अनुसार निगम अगर दुकानें बेचता है तो एकमुश्त रकम मिलने के साथ वार्षिक टैक्सों की आमदनी भी होगी। वहीं नगर निगम के पूर्व मेयर बलवंत राय नाथ के अनुसार पिछली बार सरकार ने बिना छत दुकानें काबिजों को बेचने की मंजूरी दी थी जिसमें निगमों व कमेटियों ने सरकार को नियम संशोधित करने को लिखा था जिससे इसमें प्रगति नहीं हो सकी।

नोटिफिकेशन शिअद-भाजपा ने लागू की थी

शिअद-भाजपा सरकार में मैने इस लोकहित के नोटीफिकेशन को लागू किया था ताकि चंद रुपयों पर किराये पर चढ़ी दुकानों की बिक्री कर निगम, कौंसिंल आदि अपनी आमदनी बढ़ा सकें व विकास को पर्याप्त फंड जुटाया जा सके, लेकिन तीन साल बाद जाकर कांग्रेस सरकार को यह नियम लागू करना याद आया है।
अनिल जोशी, पूर्व लोकल बॉडी मिनिस्टर, पंजाब

पहले नोटिफिकेशन की थी, अब कानून पास किया

2002 से पहले सरकार ने वन टाइम आफर देकर एक बार नोटिफिकेशन की थी पर हमने इस बार विधानसभा में इसे बतौर कानून पास किया है। इसमें 12 साल तक के लोगों को तो मलकीयत मिलने का फायदा होगा ही, साथ ही जिनका समय अभी पूरा नहीं हो पाया है, वह भी भविष्य में इस नियम का फायदा ले पाएंगे।
ब्रह्ममोहिंदरा, लोकल निकाय मंत्री, पंजाब

कौन नहीं खरीद पाएगा यह प्राॅपर्टी|एक्ट के अनुसार म्यूनिसिपैलिटी की यह प्रापर्टी किसी भी लोकल बॉडी विभाग, निगम, कौंसिल, कमेटी या ट्रस्ट का कर्मचारी नहीं हो। इसके अलावा वह इन संस्थानों में किसी भी पद पर चुना गया नुमाइंदा नहीं हो तथा ना ही वह कोई सांसद या विधायक या उसका कोई रिश्तेदार नहीं हो।

स्पोटर्स मार्केट में निगम की दुकानों में लंबे अर्से से किरायदार बैठे हैं।
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