अस्पताल में नहीं ठहरते डाॅक्टर, एचआरए का उठा रहे लाभ

Bathinda News - सिविल अस्पताल बठिंडा के रेनुवेट करने का काम किया जा रहा है इसमें लाखों रुपए खर्च कर डाक्टरों व अधिकारियों के...

Feb 15, 2020, 07:31 AM IST

सिविल अस्पताल बठिंडा के रेनुवेट करने का काम किया जा रहा है इसमें लाखों रुपए खर्च कर डाक्टरों व अधिकारियों के रहने के लिए बने क्वार्टरों की दशा में भी सुधार किया जा रहा है। यह खर्च ऐसे समय में किया जा रहा है जब इन क्वार्टरों में कोई भी डाॅक्टर लंबे समय से नहीं ठहर रहा है। सरकारी अस्पताल में कार्यरत डॉक्टरों को रात्रि ठहरने के लिए विभाग द्वारा सरकारी क्वार्टर बनाए गए है ताकि मरीजों को 24 घंटे सेहत सुविधा उपलब्ध हो सके और समय पर इलाज हो सके लेकिन डाक्टर इनमें ठहरने की बजाय अपने निजि आवास में ठहरने को तरजीह देते हैं। क्वार्टरों में न ठहरकर भी नियम के विपरित एचआरए (हाउस रेंट एलाउंस) का लाभ उठा सरकार को हर माह मोटी तपत लगाते हैं। अब सवाल उठता है कि आखिर जब डाॅक्टर इन क्वार्टरों में रहना नहीं चाहते हैं तो फिर मरम्मत पर लाखों रुपए बर्बाद करने का क्या कारण है वही एचआरए के मामले में घपलेबाजी करने वाले डाॅक्टरों पर सख्ती करने से अधिकारी गुरेज क्य़ों कर रहे हैं।

गौरतलब है कि सरकार डाॅक्टरों को तनख्वाह के साथ एचआरए, एनपीए (मकान किराया भत्ता, नॉन प्रेक्टिस अलाउसं) भी देती है। ताकि कोई भी सरकारी डॉक्टर अस्पताल के अलावा घर पर प्रेक्टिस न करे। हालात यह है कि माहिर डाॅक्टर अस्पताल परिसर में बने आवास पर ही नहीं ठहर रहे हैं, जबकि वह नियम विरूद्ध तरीके से एचआरए (हाउस रेंट एलाउंस) का लाभ उठा रहे हैं। इसके चलते सरकार को प्रतिमाह लाखों रुपए का नुकसान झेलना पड़ रहा है।

रैनोवेशन के लिए डिमांड भेजी जा चुकी है : डाॅ. संधू

सिविल सर्जन बठिंडा डाॅ. अमरीक सिंह संधू ने कहा कि अस्पताल में सरकारी आवास सुविधा के लिए बनाया जाता है, लेकिन सरकारी आवास में रहने के लिए कोई तैयार नहीं है, किसी को मजबूर नहीं किया जा सकता। सरकारी आवासों के रैनोवेशन के लिए बहुत पहले डिमांड भेजी गई थी, विभाग द्वारा मंजूर कर फंड जारी कर दिया गया है, रैनोवेशन का कार्य शुरू हो गया है। रैनोवेशन के बाद डाक्टरों से आवास में ठहरने के लिए कहा जाएगा।

सिविल अस्पताल परिसर में कर्मचारियों के लिए बनाया सरकारी आवास।

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