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5वीं की परीक्षा की मार्किंग भी कर रहे ईटीटी टीचर

एक वर्ष पहले
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पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से 10 साल बाद शुरू की पांचवीं बोर्ड की परीक्षा लेने वाले ही मार्किंग करेंगे और सबसे बड़ी बात तो यह है कि इन अध्यापकों ने पांचवीं कक्षा को न तो पढ़ाया तथा न ही वे इस क्लास के सिलेबस से अच्छी तरह से वाकिफ हैं। शनिवार से शुरू हुई 5वीं बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी देने वाले अध्यापकों को ऐन मौके पर ही सेंटरों की जानकारी मिली, वहीं इसी स्टाफ को पेपर मार्किंग में झोंक दिया गया जिसकी वजह से वे सुबह 8 से शाम 5 बजे तक 9 घंटे की लंबी पेपर ड्यूटी में ही उलझे रहे। बठिंडा जिले में 5वीं बोर्ड परीक्षा के लिए सेल्फ सेंटर नियमानुसार तमाम सरकारी व अधिकांश प्राइवेट स्कूल समेत 563 परीक्षा केंद्र बनाए गए जहां सुबह 10 से दोपहर 1.15 बजे तक पंजाबी भाषा पंजाबी अथवा हिंदी का पेपर हुआ। परीक्षा में जिले के 15 हजार 253 विद्यार्थी बैठे। एग्जाम ड्यूटी में 700 ईटीटी अध्यापक लगाए गए हैं जिन्हें देर शाम तक ड्यूटी क्लियर होने की वजह से सेंटरों की चेकिंग नहीं हुई बल्कि वे सुबह 8 बजे ही अपने सेंटरों पर सीधे परीक्षा लेने पहुंचे। एग्जाम ड्यूटी देने वाले अध्यापकों को सुबह 8.30 बजे क्वेश्चन-कम-आंसर शीट के पैकेट मिले और सुपरिटेंडेंट व स्कूल हेड से हस्ताक्षर करवाकर पैकेट खोला और सुबह 10 बजे पेपर शुरू कराया। वहीं नियमानुसार 10.30 बजे बच्चों की अटेंडेंस, अबसेंट रिपोर्ट तैयार की।

दोपहर लगभग दो बजे आंसर शीट के सीलबंद पैकेट लेकर बीपीईओ आफिस में जमा करवाने पहुंचे अध्यापकों को पेपर मार्किंग करने का फरमान सुनाया गया तो हंगामा खड़ा हो गया। बीपीईओ आफिस कर्मचारी और अध्यापकों में काफी बहस चली, अध्यापकों ने एतराज उठाया तो उन्हें तो सिर्फ एग्जाम ड्यूटी के लिए सुबह 8 बजे बुलाया गया था जबकि उन्हें पेपर मार्किंग के बारे में नहीं बताया गया, वैसे भी वे 20 से 50 पेपर चेक करने में शाम 5 बजे बज जाएंगे। ईटीटी अध्यापक ज्यादातर 3 से 4 क्लास को पढ़ाते हैं जबकि इन्होंने साल भर 5वीं नहीं पढ़ाई और न ही इन्हें सिलेबस की ही ज्यादा जानकारी है, ऐसे में पेपर चेकिंग में रिजल्ट के प्रभावित होने का अंदेशा है। शिक्षा विभाग ने पेपर ड्यूटी और मार्किंग में सरकारी अध्यापकों की ही ड्यूटी का फरमान जारी किया, इनका तर्क है कि किसी गड़बड़ी के लिए प्राइवेट अध्यापकों की जिम्मेदारी तय करने में दिक्कत रहेगी।

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