पिता 9 साल से चारपाई पर खुद काे पाेलियाे फिर भी मजबूत आत्मबल से परिवार का सहारा बनी
मन के हारे हार है, मन के जीते जीत ही सक्सेस मंत्रा है 23 वर्षीय सीता गिरी का जिसने अपनी शारीरिक कमजोरी को लाचारी नहीं बनाया बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति से अपने मन बेहद मजबूत बनाया।
इसी आत्मबल से जहां उसने खुद अपनी पढ़ाई पूरा की, वहीं अब अपने परिवार का पालन-पोषण भी कर रही है। महिला सशक्तिकरण की मिसाल सीता गिरी की दोनों टांगों में पोलियो है और वो व्हील चेयर पर है, लेकिन इसके बावजूद उसके चेहरे पर मायूसी नहीं बल्कि कामयाबी की चमक है जोकि अन्यों के लिए प्रेरणास्रोत है। समय पर पोलियो वेक्सीनेशन न मिल पाने की वजह से सीता गिरी के 2 साल की उम्र में ही दोनों पैर पोलियो का शिकार हो गए। बच्ची के चलने-फिरने में लाचार होने से परिवार में कोहराम मच गया। परिवार वालों की लड़की को पराया धन मानने की दकियानूसी सोच के विपरीत सावित्री देवी ने हिम्मत दिखाई और अपनी बेटी सीता गिरी को स्कूल में दाखिला दिलाया। सीता गिरी ने अपनी मां की उम्मीदों से कहीं ज्यादा करके दिखाया। हालांकि नेपाल में लड़कियों को ज्यादा पढ़ाने का चलन नहीं है, 8वीं-10वीं पढ़ाकर शादी कर देते हैं।सीता गिरी के पापा टुक लाल गिरी 9 साल से चारपाई पर हैं, एक हादसे में उनकी टांगों में राड डाली गई है और वे चलने-फिरने में मोहताज हो गए। वहीं उसकी धर्मप|ी सावित्री देवी घरेलू महिला हैं। पिता के एक्सीडेंट में घायल होने के वक्त सीता गिरी पुलिस पब्लिक स्कूल की 9वीं क्लास में पढ़ रही थी। घर के आर्थिक हालात पहले से ही कमजोर थे, ऊपर से पापा के हादसे में लाचार होना कहर बनकर टूट पड़ा। सीता गिरी जहां
खुद संभली, वहीं उसी दिन से उसने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी भी अपनी कंधों पर ले ली। समाज की चुनौतियों का सामना कर रही सीता गिरी कहती हैं वो फिजिकली हैंडीकैप्ड हैं, मेंटली नहीं।
12वीं तक के बच्चों को देती हैं इंग्लिश-साइंस कोचिंग
बाबा दीप नगर में किराए के मकान में अपने अभिभावकों के साथ रहने वाली सीता गिरी 12वीं तक के बच्चों को ट्यूशन पढ़ा रही हैं, स्पेशली इंग्लिश कोचिंग के साथ-साइंस और कंप्यूटर ट्रेनिंग देती हैं। इनके पढ़ाए बच्चे अपनी क्लास में अव्वल रहते हैं और गोल्ड मेडल पाने की खुशी सीता गिरी से साझा करते हैं। पुलिस पब्लिक स्कूल में 12वीं तक पढ़ी सीता गिरी ने छोटी उम्र से ही स्वावलंबन की दिशा में कदम रखा और 8वीं क्लास से ट्यूशन वर्क कर रही हैं। इस आमदनी से ही उसने अपनी पढ़ाई का खर्च निकाला। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से डिस्टेंस एजुकेशन के जरिए बीसीए के बाद अब एमसीए कर रही हैं। उनके साथ बहन दीपा गिरी भी एमसीए पढ़ रही है।
23 वर्षीय सीता जिसने अपनी शारीरिक कमजोरी को लाचारी नहीं बनाया बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति से अपने मन को बेहद मजबूत बनाया
बाबा दीप सिंह नगर में अपने घर में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती सीता गिरी