खजाना खाली / वित्त विभाग ने निकायों के 400 करोड़ के बिल रोके कर्मचारियों को वेतन देना मुश्किल

प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • विभाग ने 150 करोड़ के बिल भी लेने से किया इनकार, राशि समय पर न मिलने से कई योजनाओं के काम भी अधर में

Dainik Bhaskar

Dec 04, 2019, 02:07 AM IST

बठिंडा. सूबा सरकार पर छाए आर्थिक संकट का असर शहरी विकास पर भी पड़ना शुरू हो गया है। निकाय विभाग के अक्टूबर माह में जमा कराए 400 करोड़ की ग्रांट इन एड व अन्य योजनाओं के बिल वित्त विभाग ने रोक लिए हैं।

वहीं, नवंबर माह के करीब 150 करोड़ रुपए के बिल भी लेने से इनकार कर दिया है। ऐसे में नगर निगमों व कौंसिलों के लिए मुलाजिमों की सैलरी देना मुश्किल हो गया है। इसके अलावा मुलाजिमों के पेंशन भत्ते में निगम व कौंसिल  अपना शेयर जमा नहीं करवा पा रहे हैं।

वहीं, केंद्रीय योजनाओं पर भी इसका असर पड़ा है। अगर इसमें सुधार न हुआ तो निगमों व काैंसिलाें को सैलरी देने के लाले पड़ जाएंगे। क्योंकि निगमों व कौंसिलों की 60% आय निकाय विभाग की ओर से जीएसटी फंड की एवज में मिलने वाली ग्रांट इन एड के सहारे चलती है। 

  • 1. वित्त विभाग ने निकाय विभाग को जीएसटी की एवज में प्रदेश की 167 नगर निगमों व कौंसिलों को ग्रांट इन एड के रूप में सालाना 1539 कराेड़ की सहायता देने का बजट पास किया है।
  • 2. इसके तहत हर माह करीब 153.90 करोड़ रुपए ग्रांट इन एड के तौर पर 13 निगमों समेत कौंसिलों को दिए जाते हैं, जिसमें मुलाजिमों का पेंशन फंड भी शामिल है।
  • 3. इसी क्रम में अक्टूबर माह में निकाय विभाग ने 153.90 करोड़ का बिल वित्त विभाग को भेजा था, जिसे आज तक पास नहीं किया गया। 
  • 4.अब नवंबर माह में फिर ये इतना ही बिल ग्रांट इन एड राशि का भेजा गया, जिसे आर्थिक मंदहाली का हवाला देकर लेने से ही इनकार कर दिया। इसमें 26 करोड़ रुपए की पेंशन राशि थी जो प्रदेश के निगम व कौंसिलों के मुलाजिमों के खाते में जानी थी। 

सीवरेज बोर्ड को भी नहीं मिली 8 करोड़ की राशि, काम हो रहा प्रभावित

प्रदेश की 59 नगर कौंसिलों में पानी व सीवरेज के रखरखाव का काम वाटर सप्लाई सीवरेज बोर्ड देखता है। इसका 3.92 करोड़ रुपए का बिल हर माह निकाय विभाग ग्रांट इन एड में से काटकर सीवरेज बोर्ड को भेजता है। मगर पिछले 2  माह से इस हैड की करीब 8 करोड़ की राशि सीवरेज बोर्ड को नहीं भेजी गई है। इससे छोटे शहरों में सीवरेज रखरखाव का काम प्रभावित हो रहा है। वहीं, मुलाजिमों का वेतन देना भी मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा केंद्र सरकार की अमृत योजना, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट, स्वच्छ भारत अभियान का काम भी प्रभावित हो रहा है। 

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