संगरूर लोकसभा सीट / भगवंत, ढिल्लों व ढींडसा में तिकोना मुकाबला सिमरनजीत मान और जस्सी बिगाड़ेंगे समीकरण



Ground Report from Sangrur Lok Sabha seat
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Ground Report from Sangrur Lok Sabha seat

  • ढिल्लों पर कैप्टन के वादे, ढींडसा पर बेअदबी और आप पर नशे की आंच
  • पिछले लाेकसभा चुनाव में हर तरफ आप का बाेलबाला था

Dainik Bhaskar

May 16, 2019, 06:56 AM IST

पुनीत गर्ग. संगरूर सीट ने 2014 के लाेकसभा चुनाव में सूबे में सबसे ज्यादा मार्जिन (211721) से जीत दर्ज करने वाली सीट का गाैरव हासिल किया था। 15 लाख 21 हजार 748 वोटर्स वाले संगरूर हलके में बरनाला अाैर संगरूर जिले के 9 विधानसभा क्षेत्र अाते हैं। पिछले लाेकसभा चुनाव में हर तरफ अाप का बाेलबाला था।

 

इस बार आप, कांग्रेस और अकाली दल तीनों ही पार्टियों का विरोध हाे रहा है। कांग्रेस उम्मीदवार केवल सिंह ढिल्लों को कैप्टन द्वारा लोगों से किए घर-घर नौकरी, स्मार्ट फोन, कर्ज माफी और 2500 रुपए बुढ़ापा पेंशन जैसे वायदों को पूरा नहीं करने, शिअद प्रत्याशी परमिंदर सिंह ढींडसा को बेअदबी और आप उम्मीदवार भगवंत मान काे नशे पर केजरीवाल द्वारा मांगी गई माफी का विरोध सहना पड़ रहा है। मान काे ताे उनके गाेद लिए गांव बेनड़ा के लाेग भी काली झंडियां दिखा चुके हैं।

 

इस सबके बीच कैडिडेंट एक दूसरे पर सियासी तीर खूब चला रहे हैं लेकिन क्षेत्रीय मुद्दों पर कोई बात नहीं कर रहा। मान हास्य अंदाज में वोटर्स को लुभा  रहे हैं। ढिल्लों कैप्टन के नजदीकी होने का दावा करके बड़े प्रोजेक्ट लाने का वादा करके वोटर्स काे खींचने का प्रयास कर रहे हैं ताे ढींडसा मोदी चेहरे के साथ जंग जीतने की कोशिश में हैं। इन सबके बीच शिअद (अ) सिमरनजीत मान और पीडीए प्रत्याशी जस्सी जसराज तीनों के गणित बिगाड़ेंगे। सिमरनजीत गर्म ख्याली माने जाते हैं ऐसे में पंथक वाेट इनके पास जा सकता है। जबकि जस्सी जसराज आप से नाराज वोटरों का लाभ ले सकते हैं।

 

हलके की मुख्य समस्याओं पर कोई उम्मीदवार नहीं कर रहा बात :
मूनक के गांव सुरजनभैणी के पूर्व सरपंच राम पाल सिंह, मकौरड साहिब के पूर्व सरपंच सज्जन सिंह, जीत सिंह और मूनक निवासी दर्शन सिंह ने कहा कि घग्गर दरिया की बाढ़ से भारी नुकसान हाेता है। रेल लाइन भी नहीं है। सुनाम में शहीद ऊधम सिंह का यादगारी हाल के निर्माण पर किसी का ध्यान नहीं है। वाटर लेवल नीचे जाने से संगरूर ब्लैक जोन घोषित है। यहां ट्यूबवेल नहीं लगा सकते। शिक्षा में सुधार की जरूरत है। पर इन मुद्दों पर कोई उम्मीदवार बात नहीं करता।

 

हलके में 3 कांग्रेस, 5 आप और 1 शिअद का विधायक :

संगरूर लोकसभा क्षेत्र में 9 विधानसभा हलके हैं। संगरूर जिले में तीन कांग्रेस, 5 आप और एक शिअद का विधायक है। बरनाला में तीनों आप के विधायक हैं। मालेरकोटला से कांग्रेसी विधायक रजिया सुल्ताना जल सप्लाई व सेनीटेशन विभाग की मंत्री हैं और संगरूर से कांग्रेसी विधायक विजय इन्दर सिंगला लोक निर्माण व तकनीकी सूचना मंत्री हैं। दिडबा से आप विधायक हरपाल सिंह चीमा विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं। जबकि आप विधायक अमन अरोड़ा पार्टी के राज्य उप प्रधान हैं।

 

कैंडिडेट के प्लस और माइनस पाइंट

 

भगवंत मान (आप) :

 

प्लस- 2014 का चुनाव सबसे अधिक मार्जिन से जीता। हास्य अंदाज लोगों को प्रभावित करता है। पूरी लीडरशीप का जोर संगरूर पर है। अाप गांवों में ज्यादा मजबूत।
माइनस- शराब पीने की आदत का धब्बा अभी साफ नहीं हुआ। कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं ला सके। आप की गुटबाजी भी लोगों की जुबान पर है। शहरों में कमजोर हैं।

 

 

केवल सिंह ढिल्लों (कांग्रेस) :

 

प्लस- कैप्टन का दाया हाथ समझे जाते हैं। बड़े कारोबारी होने से बड़े उद्योग आने की उम्मीद। कैबिनेट मंत्री रजिया सुल्ताना और विजय इन्दर सिंगला खुद कैपेन कर रहे।
माइनस- पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी भी नुकसान कर रही है। सरकार का विरोध भी ढिल्लों को महंगा पड़ रहा है। लोगों की उन तक पहुंच भी आसान नहीं है।

 

 

परमिंदर सिंह ढींडसा (शिअद) :

 

प्लस- शरीफ कैंडिडेट के तौर पर जाने जाते हैं। अकाली सरकार में 2 बार मंत्री और 5 बार विधायक बने हैं। ढींडसा परिवार संगरूर से 40 से अधिक वर्षों से जुड़ा है। 
माइनस- 
अकाली-भाजपा में गुटबाजी। पिता सुखदेव ढींडसा का साथ न होना। बेअदबी का असर। पिता-बेटे का 30 साल से अधिक राज। इसके बावजूद जिला पिछड़ा है।
 

 

 

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