पति ने सरकारी टीचर और पत्नी ने खुद को बीपीईओ बता एलआईसी से 18 लाख लोन लेकर की धाेखाधड़ी
एक व्यक्ति ने खुद को सरकारी टीचर और उसकी प|ी ने खुद को ब्लाॅक प्राइमरी एजुकेशन अधिकारी बताकर एलआईसी से 18 लाख रुपए का लोन ले लिया। लेकिन लोन की कुछ किश्तें जमा करने के बाद किश्तें देनी बंद कर दीं।
जब एलआईसी अधिकारियों ने उक्त दंपती के खिलाफ पुलिस को शिकायत देकर जांच करवाई तो पता चला कि दोनों में से कोई भी सरकारी मुलाजिम नहीं है और इन्होंने लाेन हासिल करने के लिए फर्जी सरकारी दस्तावेज लगाए। पुलिस ने जांच के आरोपी दंपती के खिलाफ ठगी और जाली दस्तावेज तैयार करने के तहत केस दर्ज कर लिया है। आरोपियों की पहचान राकेश गुप्ता व गीता देवी प|ी राकेश गुप्ता वासी मलोट के तौर पर हुई है। दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस रेड कर रही है। थाना सिविल लाइन पुलिस ने को दी शिकायत में एलआईसी एचएफएल के एरिया मैनेजर ने बताया कि मलोट के रहने वाले राकेश गुप्ता व उसकी प|ी गीता देवी ने 19 नवंबर 2010 को मकान बनवाने के लिए एलआईसी से 18 लाख रुपये का लोन हासिल किया। लोन पास होने के बाद दंपति ने कुछ समय तक किश्तें भरी, लेकिन बाद में उन्होंने बंद कर दी।
मकान पर लोन लेने के लिए जमीन की जमाबंदी भी जाली लगाई
मैनेजर ने बताया कि जब उन्होंने आरोपियों की ओर से किश्तें भरनी बंद करने के बाद उनके दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई करने के लिए जांच शुरू क तो पता लगा कि राकेश गुप्ता ने खुद को सरकारी टीचर बताते हुए मुक्तसर के गांव इीनाखेड़ा के सरकारी स्कूल में तैनात बताया। इसके अलावा उसकी प|ी गीता ने खुद को ब्लाॅक प्राइमरी एजुकेशन आॅफिसर मलोट बताकर जाली बैंक स्टेटमेंट लोन के दस्तावेजों में लगाई। जब उन्होंने उक्त सरकारी विभागों में दंपती के बारे में जानकारी प्राप्त की तो पता चला कि आराेपी राकेश गुप्ता व गीता गुप्ता वहां पर नौकरी ही नहीं करते है। आरोपियों ने मकान पर लोन लेने के लिए जमीन की जमाबंदी भी जाली लगाई। दंपती ने एक सोची समझी साजिश के तहत एलआईसी से 18 लाख रुपये की ठगी की। पुलिस ने दंपति पर मामला दर्ज कर अगली कार्रवाई शुरू कर दी है।