स्वच्छता में टॉप रहना है तो पॉलीथिन को कहें ना

Bathinda News - शहर में 2 अक्टूबर गांधी जयंती पर पॉलीथिन बैग पर बैन पूर्णतया लागू हो गया है। शहर से श्रमदान कर एक दिन में 7400 किलो से...

Oct 03, 2019, 07:41 AM IST
शहर में 2 अक्टूबर गांधी जयंती पर पॉलीथिन बैग पर बैन पूर्णतया लागू हो गया है। शहर से श्रमदान कर एक दिन में 7400 किलो से अधिक सिंगल यूज पॉलीथिन व प्लास्टिक कचरा शहरवासियों व सरकारी टीमों ने मिलकर एक दिन में हटाया, लेकिन शहर अभी भी सिंगल यूज प्लास्टिक से जूझ रहा है। बठिंडा जिले में प्रतिवर्ष अनुमानित 1.70 करोड़ कोल्डड्रिंक छोटी व बड़ी प्लास्टिक बोतलों में बिकता है। वहीं नॉन ब्रांडेड व ब्राडेंड पानी की अनुमानित 50 लाख से अधिक एक लीटर, 200 एमएल बोतलों व गिलास व 100 ग्राम प्लास्टिक पानी की थैलियों की खपत बठिंडा में प्रतिवर्ष हो रही है। शहर में रोजाना पैदा हो रहे करीब 110 टन कचरे यानी 1.12 लाख किलोग्राम कचरे में 10 से 15 टन तक यानी 16 हजार किलोग्राम प्लास्टिक कचरे के हिसाब से हम हर साल करीब 5400 टन या 54.86 लाख किलोग्राम प्लास्टिक वेस्ट पैदा कर रहे हैं जिसे जलाने से पर्यावरण व इंसान दोनों को नुकसान हो रहा है। होटल व रेस्टोरेंट में कांच की बोतल में आरओ पानी देने का फैसला करते हुए इसे लागू करना शुरू कर दिया है।

110 टन कचरा रोज सॉलिड वेस्ट प्लांट पर होता है कलेक्ट, इसमें 15 टन प्लास्टिक

बठिंडा के परसराम नगर के ओवरब्रिज के नीचे पड़ा प्लास्टिक के लिफाफों का ढेर।

कोल्डड्रिंक व बाजारों में बिक रही प्लास्टिक बोतलों पर एक बार प्रयोग के बाद नष्ट करने का संदेश अंकित होता है, लेकिन शहर में लाखों व करोड़ों की संख्या में खप रही प्लास्टिक बोतलों का उपयोग जहां इंसान की सेहत के लिए घातक हैं, वहीं इन्हें जलाने पर बहुत घातक कैमिकल व गैस उत्पन्न होती हैं। नगर निगम की एक जानकारी अनुसार शहरवासी करीब 70 हजार घरों, दुकानों, मैरिज पैलेस, होटल व संस्थानों आदि से रोजाना 110 टन कचरा पैदा कर रहे हैं। इसमें अलग-अलग प्लास्टिक की मात्रा ही 12 से 15 टन यानी 16 हजार किलोग्राम तक होती है। प्रतिमाह के हिसाब से हम करीब 450 टन तथा प्रतिवर्ष करीब 5400 टन प्लास्टिक अकेले बठिंडा शहर ही पैदा कर रहा है। ऐसे में इतने बड़ी प्लास्टिक की मात्रा को खपाना बहुत कठिन काम है। शहर की 3.50 लाख की आबादी से अगर प्लास्टिक कचरे को विभाजित किया जाए तो यह मात्रा 15.67 किलोग्राम प्रति बठिंडा वासी बनती है, जोकि देश में प्रतिवर्ष प्रति व्यक्ति 11 किलोग्राम के उपयोग से करीब 4.67 किलोग्राम अधिक बनता है जिसे हमें हर हाल में कम करना होगा। हालांकि पॉलीथिन बैन होने से प्रतिवर्ष बठिंडा में 212.59 टन पॉलीथीन बैग वेस्ट खत्म होगा।

धागे व प्लास्टिक रेशे से बने बैग विकल्प

शहर में कपड़े व प्लास्टिक के महीन रेशे से बने बैग बेहतर विकल्प के तौर पर उभरे हैं। होलसेल कारोबारी भी इन्हीं बैग की बिक्री कर रहे हैं। पंजाब सरकार ने 18 फरवरी 2016 को पत्र संख्या 5/18/2016-4सस4/692728 के माध्यम से पॉलीथिन व सिंगला यूज थर्मोकोल पर बैन लगाया था, लेकिन पैकिंग मैटीरियल को छूट दी गई थी। 1 अगस्त 2016 को अकेले थर्मोकोल पर बैन हटा लिया था।


पॉलीथिन बैन होने से ये होंगे फायदे





यह कदम बहुत पहले उठना चाहिए था


पॉलीथिन पर अब जीरो टोलरेंस अपनाएंगे


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