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पंजाब / फिलीपींस से बेटे का शव लाने के लिए पिता के पास पैसे नहीं थे, दोस्तों ने वहीं अंतिम संस्कार किया; मां ने वीडियो कॉल से देखा

मां वीडियो कॉल के दौरान कहती रही कि बेटे को देखने दो। मां वीडियो कॉल के दौरान कहती रही कि बेटे को देखने दो।
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मां वीडियो कॉल के दौरान कहती रही कि बेटे को देखने दो।मां वीडियो कॉल के दौरान कहती रही कि बेटे को देखने दो।

  • 35 साल के सुखजीत सिंह को अज्ञात लोगों ने मनीला में 5 फरवरी को गोली मारी थी, 12 फरवरी को मौत हो गई 
  • पिता ने बताया- बेटे का अंतिम संस्कार उसके दोस्तों ने किया, मेरे पास इतना पैसा नहीं था कि मैं उसके शव को भारत ला पाता

दैनिक भास्कर

Feb 15, 2020, 01:04 PM IST

फिरोजपुर (कपिल सेठी).  पंजाब के फिरोजपुर के पूर्व फौजी के परिवार के लिए शुक्रवार का दिन बेहद मुश्किल भरा रहा। मां समेत पूरे परिवार ने 22 साल के बेटे के अंतिम दर्शन वीडियो कॉल के जरिए किए। दरअसल, फिरोजपुर जिले के मुदकी का रहने वाला 35 साल का सुखजीत सिंह दोधी 22 महीने पहले मनीला गया था। 5 फरवरी को अज्ञात लोगों ने उसे गोली मार दी। 7 दिन इलाज के बाद 12 फरवरी को उसकी मौत गई। परिवार के पास पैसा नहीं था कि वे शव को भारत ला पाते, इसलिए वहीं पर अंतिम संस्कार किया गया।

सुखजीत सिंह का पूरा परिवार और रिश्तेदार शुक्रवार को उसके घर पर इकट्ठा हुए और वीडियो कॉल के जरिए अंतिम संस्कार का हिस्सा बने। सभी की आंखें नम थी। बेसुध सी मां बार-बार कह रही थी कि बेटे को एक बार अच्छे से देख लेने दो, उसे छू लेने दो। 

परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं 
परिवार के सदस्य ने बताया कि सुखजीत के दोस्तों ने उसके इलाज के दौरान देखभाल की और खर्च उठाया। शव को भारत लाने में खर्च ज्यादा था, इसलिए मनीला में ही अंतिम संस्कार करने का फैसला किया। सुखजीत के पिता नछतर सिंह (60) पूर्व फौजी हैं। वे 1992 में फौज से रिटायर हुए थे। परिवार के पास कुल पौने दो एकड़ जमीन है, जिस पर खेती कर उनके घर का गुजारा चलता है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने से उन्होंने मनीला जाने का निर्णय लिया। 

फाइनेंस कंपनी में रिकवरी का काम करता था 
सुखजीत 29 अप्रैल 2018 को फिलीपींस गया था। वहां एक फाइनेंस कंपनी में रिकवरी का काम करता था। पिता ने बताया, ‘‘सुखजीत के दोस्तों ने किसी भी तरह से उसके इलाज में कमी नहीं छोड़ी, मगर वह बच नहीं पाया। उसके दोस्त बेटे का शव भेजना चाहते थे, मगर मैंने मना कर दिया। उन लोगों ने पहले ही काफी पैसा खर्च कर दिया था। मैं नहीं चाहता था कि उन पर और बोझ पड़े। जब सुखजीत मनीला गया था, तब भी पूरा खर्च दोस्तों ने ही किया था। मेरी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। इतना पैसा कहां से लाता।’’

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