10 साल की सर्विस व कोर्ट प्रोटेक्शन नहीं होने की शर्त बन सकती है रेगुलराइजेशन में अड़चन
प्रदेश के 48 सरकारी कॉलेजों में सेवाएं दे रहे गेस्ट फैकल्टी स्टाफ बिना शर्त रेगुलर करने की मांग पर अड़े हैं जबकि हायर एजुकेशन विभाग ने क्वालिफिकेशन के अलावा 10 साल की सर्विस और कोर्ट प्रोटेक्शन न होने की शर्त लगा दी है जोकि इनके रेगुलर के मार्ग में बड़ी अड़चन साबित हो सकती है। प्रांतीय कमेटी के आह्वान पर वीरवार को दूसरे दिन भी सरकारी राजिंदरा कॉलेज के गेस्ट फैकल्टी के 34 असिस्टेंट प्रोफेसरों ने क्लासेज का बायकाट करके कॉलेज गेट के बाहर धरना-प्रदर्शन करके सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इनके समर्थन में पहुंची आम आदमी पार्टी की बठिंडा देहाती विधायक प्रो. रूपिंदर कौर रूबी को मांगों का ज्ञापन सौंपा। वहीं नौजवान भारत सभा व स्टूडेंट्स यूनियन ने आंदोलन को समर्थन दिया।
हायर एजुकेशन सहायक डायरेक्टर की ओर से जारी पत्र में दर्ज शर्तों ने गेस्ट फैकल्टी के लिए मुसीबतें बढ़ा दी हैं। हायर एजुकेशन की ओर से निर्धारित किए गए मापदंड में विभाग की ओर से प्रतिभागियों की प्रारंभिक नियुक्ति अथवा सेंक्शन खाली पोस्टों पर प्रदेश सरकार के एम्प्लायमेंट एक्सचेंज के आधार पर की जाएगी। पारदर्शी और कांपीटेटिव प्रोसेस के तहत मेरिट के आधार पर प्रतिभागियों की प्रारंभिक नियुक्ति की जाएगी। पंजाब सरकार के नियम और यूजीसी नार्म्स पूरा के अनुसार यूजीसी नेट क्लियर होना लाजिमी है। इसके अलावा 31 मार्च 2020 तक सरकारी कॉलेजों में 10 साल अथवा इससे ज्यादा साल की सर्विस लाजिमी होनी चाहिए। वहीं प्रतिभागी का बिना किसी हस्तक्षेप अथवा अदालती के आदेशों पर कवर यानी कोर्ट प्रोजेक्टेड नहीं होना चाहिए। इन 5 मापदंडों में से पहली दो शर्तें तो गेस्ट फैकल्टी पूरा कर लेंगे जबकि अगली 3 मापदंडों पर खरा उतरने में अड़चन आएगी। सरकारी कॉलेजों में सेवारत अधिकांश गेस्ट फैकल्टी 10 साल की सर्विस पर खरा नहीं उतरते, इन्हें 2017 के बाद से पूरा साल कॉलेजों में रखा जा रहा है जबकि 1997 से सरकारी कॉलेजों में इन्हें जुलाई से मार्च महीने तक रखा जाता है। इनका वेतन भी कॉलेज अपने स्तर पर देता रहा है जबकि 2017 के बाद से 10 हजार रुपए डीपीआई कॉलेज से जबकि 11000 रुपए कॉलेज की ओर से अदा किए जाते हैं। इसके आधार पर इनकी सेवाओं को शिक्षा विभाग रेगुलर सर्विस नहीं मानता। कॉलेजों में सेवाएं दे रहे गेस्ट फैकल्टी में से अनेक यूजीसी नेट क्लियर नहीं हैं और कई असिस्टेंट प्रोफेसर को कोर्ट में स्टे लेने की वजह से कोर्ट प्रोजेक्टेड हैं। बता दें कि 1996 के बाद से रेगुलर भर्ती न होने की वजह से सरकारी कॉलेजों में 1997 में गेस्ट फैकल्टी व पार्ट टाइम का प्रावधान आया और अब सरकार ने रेगुलर भर्ती प्रक्रिया शुरू की है।
हड़ताल से डायरेक्टर, सचिव को कराया अवगत
गेस्ट फैकल्टी अपनी मांगों को लेकर छुट्टी साइन करके धरना लगा रहे हैं, स्टडी के पीक डेज में प्रोफेसरों की हड़ताल से विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। इस बारे में हायर एजुकेशन के डायरेक्टर व सेक्रेटरी को अवगत करवा दिया है।
ज्योति प्रकाश, प्रिंसिपल सरकारी राजिंदरा कॉलेज बठिंडा
नौकरी पर आंच आने पर तीखा संघर्ष किया जाएगा
प्रो. हरमिंदर सिंह डिंपल व प्रो. रविंदर सिंह ने बताया कि प्रदेश के 40 सरकारी कॉलेजों में सेवारत 1011 गेस्ट फैकल्टी सहायक प्रोफेसरों की नौकरी सुरक्षित की जाए, वहीं एक भी नौजवान की नौकरी पर आंच आने पर तीखा संघर्ष किया जाएगा। अब कॉलेजों में नौकरी रखते समय पंजाब सरकार के अधिकारियों ने नादिरशाही फरमान जारी करके गेस्ट फैकल्टी सहायक प्रोफेसरों को अयोग्य बनाकर विभिन्न कैटेगरी में बांटने का प्रयास कर रही है।
सरकारी राजिंदरा कॉलेज के बाहर धरना प्रदर्शन करते गेस्ट फैकल्टी असिस्टेंट प्रोफेसर।