ओपीडी में ही बनाया फ्लू कॉर्नर, स्टाफ का भी प्रबंध नहीं
स्वाइन फ्लू और कोरोना वायरस को लेकर विश्व भर में दहशत का माहौल है। सेहत विभाग की ओर से एडवाइजरी के बावजूद अस्पताल प्रशासन गंभीर नहीं है। अस्पताल प्रशासन की ओर से अस्पताल की ओपीडी में कोरोना वायरस व स्वाइन फ्लू के लक्षणों वाले मरीजों की सुविधा के लिए बनाए गए फ्लू कॉर्नर महज कागजी कार्रवाई साबित हो रहे हैं। मरीजों के लिए बनाए गए आईसोलेशन वॉर्ड भी नीतियों को मुंह चिढ़ा रहे हैं। अस्पताल प्रशासन की ओर से अस्पताल की ओपीडी में स्वाइन फ्लू व कोरोना वायरस के मरीजों को बिना लाइन में खड़े होने, भीड़-भाड व अन्य मरीजों से अलग बनाने के बजाय ओपीडी में ही फ्लू कॉर्नर बनाया गया है। जबकि फ्लू कार्नर अन्य मरीजों अलग से होना चाहिए ताकि संक्रमित मरीज इन मरीजों के संपर्क में न आएं। यहां नर्सिंग छात्राओं को बिठा कर अस्पताल प्रशासन कोरोना वायरस को टक्कर देने का सपना देख रहा है। दोपहर करीब 12 बजे के बाद नर्सिंग छात्राएं चली जाती हैं और फ्लू कॉर्नर खाली हो जाता है और मरीज भटकते रहते हैं। इस दौरान ओपीडी में आने वाले लोग बिना किसी जानकारी के इधर-उधर अन्य मरीजों की बीच में फंसे रहते हैं। अस्पताल प्रशासन की ऐसी व्यवस्था से अन्य मरीजों को भी खतरा पैदा होने की संभावना अधिक होगी। यहां तक ओपीडी में इलाज के लिए आने वाले मरीज व अन्य लोगों को वायरस प्रति जागरूक करने व बचाव के लिए मास्क आदि बांटने एक भी स्टाफ तैनात नहीं है। एसएमओ डाॅ. मनिंदर सिंह ने बताया कि फ्लू कार्नर व आइसोलेशन वार्ड के लिए अतिरिक्त कर्मचारी तैनात नहीं है। अस्पताल में पहले ही कर्मचारियों की कमी है, जरूरत पड़ने पर समय-समय पर फ्लू कार्नर व आइसोलेशन वार्ड में कर्मचारी व स्टाफ निगरानी करते रहते हैं।
ओपीडी में एमडी मेडिसिन डाॅक्टर के रूम के बाहर मरीजों की भीड़, इन लोगों को मास्क व जागरूक करने के लिए एक भी कर्मचारी तैनात नहीं।