76 करोड़ हजम! / बुढ़ापा पेंशन का तीन साल से सूबे की पंचायतों ने नहीं दिया कोई हिसाब-किताब

प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • पहले पंचायतें देती थीं पेंशन, 2016 तक पंचायतें बांटती थी पेंशन
  • पुराना हिसाब न देने पर 2017 में कर दी थी ऑन अकाउंट अदायगी
  • सबसे ज्यादा जालंधर में 14.73 करोड़, संगरूर में 10.46 करोड़
  • मुक्तसर के 7.41 करोड़ का हिसाब नहीं मिला 
     

Dainik Bhaskar

Dec 05, 2019, 12:58 AM IST

बठिंडा (नरिंद्र शर्मा). प्रदेश में सरकार की तरफ से बांटी जाने वाली बुढ़ापा व विधवा पेंशन में से करीब 76 करोड़ का ग्राम पंचायतों ने हिसाब ही नहीं दिया। यह राशि पंचायतों को पूर्व अकाली-भाजपा सरकार के समय गांवों में पेंशन धारकों को बांटने के लिए दी गई थी, जिसे बांटने के बाद इसका हिसाब पंचायतों काे देना था।

मगर पंचायतों के हिसाब न देने से 2017 में नई बनी कांग्रेस सरकार ने पंचायतों से पेंशन बांटने का अधिकार लेकर इसे ऑन अकाउंट कर दिया, जिससे पेंशन धारकों को पेंशन खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर होने लग गई। मगर 2016 तक जो 76 करोड़ का हिसाब लंबित था वह आज तक सरकार को नहीं मिल पाया।

दिसंबर 2018 में पंचायती चुनाव होने के बाद गांव में नई ग्राम पंचायतें भी बन गई। अब पुरानी पंचायतों से इस करोड़ों का हिसाब लेने को सामाजिक सुरक्षा विभाग के पसीने छूट रहे हैं। विभाग ने कई बार पंचायत विभाग व बीडीपीओ से पत्राचार भी किया, मगर विफल साबित हुए।

सामाजिक सुरक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर चरणजीत सिंह मान ने बताया कि पंचायतों की तरफ लंबित पेंशन राशि की एपीआर के लिए मंथली मीटिंग में रिव्यू किया जाता है। काफी पंचायतों ने हिसाब नहीं दिया। हम इसके लिए संबंधित विभाग को भी लिखते रहते हैं।

903 करोड़ रुपए बांटे थे, 76 करोड़ का हिसाब अभी तक नहीं मिला
सामाजिक सुरक्षा व स्त्री बाल विकास विभाग के मार्फत बुढ़ापा व विधवा पेंशन स्कीम में 2015 में 173.20 करोड़ रुपए जारी किए थे, जिसमें से 7.44 करोड़ का पंचायतों ने आज तक हिसाब नहीं दिया। इसके बाद 2016 में पेंशन राशि के तौर पर फिर से ग्राम पंचायतों को 730.51 करोड़ रुपए बांटे गए, जिसमें से इसमें से 68.86 करोड़ रुपए के खर्च का पंचायतों ने हिसाब नहीं दिया। इस तरह दो साल में दिए गए 903 करोड़ रुपए में से 76.30 करोड़ रुपए का विभाग को हिसाब नहीं दिया गया।
 

बठिंडा में भी 2.31 करोड़ रुपए का हिसाब लंबित 
पेंशन के करोड़ों रुपए हजम करने वाली पंचायतों में सबसे ज्यादा जालंधर की है। इसमें 14.73 करोड़ रुपए की राशि का 2016 के बाद पिछले तीन साल से हिसाब नहीं दिया गया। दूसरे नंबर पर जिला संगरूर की पंचायतें हैं, जिनकी तरफ 10.46 करोड़ रुपए का हिसाब लंबित हैं। पूर्व मुख्यमंत्री परकाश सिंह बादल के जिला मुक्तसर में भी पंचायतों ने पेंशन की जारी की 7.41 करोड़ का हिसाब नहीं दिया। जबकि बठिंडा जिले के करीब सवा लाख पेंशन धारकों के लिए जारी किए गए 2.31 करोड़ रुपए का हिसाब लंबित है।

25 नवंबर को प्रिंसिपल सेकेटरी फाइनांशियल कमिशन सीमा जैन ने चंडीगढ़ में पंचायत विभाग के अधिकारियों को पेंशन की करोड़ों की राशि का हिसाब पंचायतों द्वारा न देने का मामला रखा था। इसके बाद हमने बठिंडा में तमाम बीडीपीओज की मीटिंग बुलाकर रिकार्ड रीकंसाइल करने को कहा है। पेंशन भी बांटी गई क्योंकि पिछले ढ़ाई साल से सामाजिक सुरक्षा व बाल विकास विभाग ने हमसे बात ही नहीं की। हम जल्द ही इसे क्लीयर कर लेंगे।
हरजिंदर सिंह जयसवाल डीडीपीओ, बठिंडा।
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