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वोट न देने का प्रण ले 7 जिलों की 25 यूनियनों का प्रदर्शन, बोले-वादाखिलाफी में कांग्रेस अव्वल

3 वर्ष पहले
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चुनाव से पहले कांग्रेसी नेता और वर्तमान में मुख्यमंत्री और मंत्री बने नेताओं ने हमसे ढेरों वादे किए थे, लेकिन सरकार बनने के बाद अकाली-भाजपा सरकार की भांति सारे वादे भूला दिए। आज हमारी सरकारों को नई लग्जरी कारें लेना जरूरी हैं, लेकिन बात जब 3.5 लाख सरकारी कर्मचारियों के हितों की हो तो खजाना खाली होने का बहाना सुना दिया जाता है। जबकि सरकारी कर्मचारी सबसे ज्यादा और पहले इनकम टैक्स अदा करते हैं। आलम यह है कि कर्मचारियों को 23 माह से डीए किश्तें, डीए एरियर नहीं दिया जा रहा, जबकि नौकरियां रेगुलर करने व पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग को अब तक अनसुना किया जा रहा है। यह बातें सांझा मुलाजिम मंच, पंजाब व यूटी के तहत द्वारा वीरवार को बठिंडा के मिनी सचिवालय के बाहर आयोजित जोनल धरने के दौरान मंच से विभिन्न यूनियन लीडरों ने कहीं। रैली के अंत में वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल के ओएसडी जसवीर सिंह को यूनियन नेताओं ने रैली मंच पर मांग-पत्र भी सौंपा।

सांझा मुलाजिम मंच, पंजाब अौर यूटी के बैनर तले 1 हजार से ज्यादा कर्मचारी प्रदर्शन में पहुंचे
बठिंडा के मिनी सचिवालय रोड पर नारेबाजी करते सांझा मुलाजिम मंच, पंजाब व यूटी के सदस्य।

अध्यापकों के भविष्य से खेल रही सरकार
संगरूर से आए यूनियन नेता वासवीर भुल्लर व पंजाब स्टेट मिनिस्ट्रियल सर्विस यूनियन के राज्य प्रधान मेघ सिंह सिद्धू कहा कि 35 सालों तक सरकार की सेवा करने वाले लोगों को सौतेला समझकर हटाया जा रहा है। अध्यापकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि देश का भविष्य बनाने वाले अध्यापकों के भविष्य के साथ ही सरकार खेल रही है। एक माह से पटियाला में धरने पर बैठे अध्यापकों की कोई सुनवाई नहीं हो रही।

ये हुए शामिल| इस मौके पर विभिन्न यूनियनों के सदस्यों गुरनाम सिंह विर्क, गुरमीत सिंह वालिया, खुशविंतर कपिला, गुरमेल सिंह सिद्धू, नछत्तर सिंह भाई रूपा, पवनजीत सिद्धू, भरपूर सिंह, परविंदर सिंह खंगूड़ा, केवल बांसल, बलदेव सिंह, अमित कटोच, सुखविंदर सिंह, जगदेव कौल, पवन कुमार, गुरचरण सिंह हुंदल, अवतार सिंह, मनदीप सिंह के अलावा हजारों की संख्या में कर्मचारी प्रदर्शन के दौरान शामिल हुए।

कर्मचारियों के हितों की अनदेखी कर रहीं सरकारें
सांझा मुलाजिम मंच के कन्वीनर सुखचैन सिंह खैहरा ने कहा कि राज्य सरकारें कर्मचारियों के हितों की अनदेखी कर रही हैं। 23 माह से कर्मचारियों के डीए की किश्तों के एरियर के अलावा डीए की चार किश्तें, छटे वेतन कमीशन की रिपोर्ट लागू करने व पहले वेतन आयोगों की त्रुटियां ठीक करने व 2004 नई पेंशन स्कीम हटाने, बोर्ड व कार्पोरेशन के कर्मचारियों को रेगुलर करने तथा खाली पदों को भरने का काम सरकार नहीं कर रही है। नई सरकार के वित्तमंत्री ने प्रोफेशनल टैक्स के रूप में ‘जजिया कर’ 200 रुपये प्रतिमाह कर्मचारियों से वसूलकर खाली खजाना भरना शुरू किया है। पंजाब स्टेट मिनिस्ट्रियल सर्विस यूनियन के केवल बांसल ने कहा कि उन्होंने कहा कि रैली में 7 जिलों से आए हजारों कर्मचारियों ने यह साबित कर दिया है कि सरकार के खिलाफ संघर्ष का झंडा उठाए रखने को सब एकजुट हैं।

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