खाने के लिए राशन खत्म, प्रवासी मजदूर ने पत्नी को घर से निकाला, बोला-जाओ कहीं से भी कमा कर लाओ

Bathinda News - कोरोना से निपटने के लिए पांच दिन से चल रहे कर्फ्यू के बीच घरों में खाद्य पदार्थों का संकट उपजने लगा है। वहीं...

Mar 28, 2020, 07:27 AM IST

कोरोना से निपटने के लिए पांच दिन से चल रहे कर्फ्यू के बीच घरों में खाद्य पदार्थों का संकट उपजने लगा है। वहीं प्रशासन एनजीओ की मदद से लोगों तक खाना, खाद्य सामग्री पहुंचने का प्रयास लगा है। स्थिति यह रही कि पांचवें दिन स्लम क्षेत्रों में योजना के अनुसार जरूरतमंद लोगों तक खाद्य सामग्री जाने में देर हुई है। परिणामस्वरूप किसी के बच्चों को भूखे रहना पड़ा तो महिला सड़कों पर जलील होती दिखी। शहर के वार्ड 6/10 के एक प्रवासी मजदूर को कर्फ्यू के कारण कोई काम नहीं मिला घर में राशन खत्म हुआ तो प|ी को घर से बाहर निकाल दिया कि जाओ कहीं कमा कर लाओ। कर्फ्यू के दौरान अस्पताल बाजार में सड़क पर घूम रही पीड़ित महिला ने पुलिस को बताया की पती ने उसे घर से धकेल दिया है कि कमाकर लाओ। थाना प्रभारी ने उसे घर पर छोड़कर खाद्य सामग्री की व्यवस्था करवाई। अंबेडकर नगर में एक मजदूर को कर्फ्यू के कारण काम नहीं मिला, घर में बच्चों को न चाय मिली और न खाना खाया। शुक्रवार दोपहर को मोहल्ले के किसी व्यक्ति ने दिए एक किलो चावल दिए तब जाकर मासूम बच्चे को खाना मिल पाया। वहीं स्लम एरिया गांधी बस्ती में घरों से बाहर निकलकर लोग मेडिकल, राशन सामग्री का इंतजार करते रहे, लेकिन प्रशासन की कोई मदद नहीं पहुंच पाई। भीड़ में मौजूद कुछ मजदूरों ने बताया कि वो दिन में मजदूरी के पैसे से रोटी का जुगाड़ करते थे,जरूरतमंदों की प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली। प्रशासन ने लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए फल, सब्जी और मेडिकल, खाद्य सामग्री होम डिलीवरी शुरू की है। इससे आप घर बैठे दवाई, खाद्य सामग्री, फल और सब्जी मंगवा सकते हैं। शुक्रवार को केमिस्ट एसोसिएशन के ग्रामीण क्षेत्र के मेडिकल स्टोर बंद रहे। क्षेत्र में केवल होम डिलिवरी पर ही दवाइयां मिली।

केस 1 . बच्चों को भी खिलाने के लिए कुछ नहीं बचा है

प्रताप नगर की विभिन्न गली मोहल्लों में 40 से अधिक परिवार किराए के कमरे लेकर रह रहे हैं। चंद्रशेखर, उमेश कुमार, गोपाल, संतोष कुमार व अरविंद कुमार ने बताया कि वह दिहाड़ी और कबाड़ खरीदने का काम करते हैं। इन दिनों काम बंद है। अब तो बच्चों को भी खिलाने के लिए कुछ नहीं है। वृद्ध महिला कृष्णा देवी ने बताया कि लोग घरों में काम करवाने से भी मना कर रहे हैं। इन्होंने बताया कि तीन दिन बाद गत रात किसी की मदद से इन लोगों ने खाना खाया। कोरोना वायरस क्या है वह नहीं जानते मगर अब वह यह जान रहे हैं कि भूख से वह लोग जरूर मर जाएंगे।

2. सिर्फ एक दिन किसी संस्था ने चावल बांटे

शहर के जोगी नगर के टिब्बा बस्ती, बरनाला रोड स्थित झुग्गी, उडिया बस्ती में झुग्गी झोपड़ी व सुर्खपीर रोड पर स्थित 2 नंबर खाल के नजदीक रहे लोगों ने बताया कि इस इलाके में मजदूर वर्ग के लोग रहते हैं। 5 दिनों में सिर्फ एक दिन किसी संस्था द्वारा चावल बांटे गए थे। लेकिन उसके बाद कोई नहीं आया। दो दिन पहले सुनने में आया था कि प्रशासन द्वारा राशन बांटा जाएगा, अभी तक कोई नहीं आया। राशन खरीदने के लिए अब पैसे भी नहीं है।

मानसा : स्लम बस्तियों में लाेग सेहत सुविधाओं से वंचित

मानसा|कोरोना वायरस को लेकर पंजाब सरकार द्वारा लगाए कर्फ्यू के बाद शहर की स्लम बस्तियों व झुगी झोपड़ी में रहने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बेशक जिला प्रशासन की ओर से इन प्रभावित लोगों को राशन समेत मेडिकल सुविधाएं देने के दावे किए गए है, लेकिन वह हकीकत से कोसों दूर हैं। जरूरतमंद लोगों को दो वक्त के खाना देने के लिए शहर की समाजसेवी संस्थाओं की ओर से खाना व फल मुहैया करवाए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार शहर के सिरसा रोड पर सब्जी मंडी के सामने झुगी-झोपड़ी में रहने वाले परिवारों ने बताया कि उनका काम बंद होने के चलते उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा, वहीं काम बंद होने के चलते उनके घर के चूल्हे भी ठंडे हो गए हैं। रमदित्तेवाला चौक में रहने वाले पेशे से राखे कर्फ्यू लगने के बाद अपनी ही झुगी झोपड़ी में रहने को विवश हैं। उन्होंने बताया कि काम बंद हाेने से दो वक्त के खाना भी उनके व उनके बच्चों पर भारी पड़ गया है। उन्होंने बताया कि खाने के अलावा उन्हें दुध के लिए काफी दिक्कत पेश आ रही है। सिवल सर्जन मानसा डाॅ. लाल चंद ठकराल ने बताया कि सेहत विभाग कोरोना वायरस को लेकर काफी अलर्ट है अाैर सिविल अस्पताल में आने वाले लोगों को हर प्रकार की सुविधा प्रदान करवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि सेहत विभाग स्लम एरिया में रहने वाले लोगों को जागरुक करने के अलावा कैंप भी आयोजित कर रहा हैं।

रामपुरा फूल : खाने-पीने का इंतजार कर रहे हैं लोग

रामपुरा फूल|कोरोना वायरस के चलते लगे कर्फ्यू के दौरान रामपुरा फूल शहर के अलग-अलग इलाकों में मजदूरी का काम कर अपना परिवार पालने वाले लोग शुक्रवार घरों में बंद होकर खाने-पीने के सामान का इंतजार करते रहे। बेशक सूबा सरकार की तरफ से जरूरतंमद गरीब लोगों को घरों अंदर राशन का सामान देने की शुरुआत की गई परंतु यह सुविधा में शहर के बाहर झुग्गी झौंपड़ियां के लोगों तक ही सीमित होकर रह गई। शहर के कांग्रेसी प्रधान संजीव धींगड़ा ने कहा कि वह अपने वर्करों के साथ जरूरतमंदों की तलाश कर हर घर में एक दो दिनों तक राशन पहुंचा देंगे। उधर, शहर की समाज सेवी संस्थाओं में लगी मदद की होड़ भी झुग्गी झौंपड़ियाें तक ही सीमित हो रही है।

प्रशासन के दावे खोखले : लोगों तक नहीं पहुंच रहा राशन और दवाएं, अस्पताल में नहीं आए मास्क और सेनेटाइजर

भुच्चो मंडी| प्रशासन की ओर से लोगों को सुविधा देने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं पर ग्राउंड लेवल पर सभी दावे फेल साबित हो रहे हैं। भुच्चो मंडी के सरकारी अस्पताल में डाॅक्टरों के लिए सिर्फ 3 पीपी किट्स और 3 ही एन 95 मास्क आए जबकि अस्पताल में मरीजों की देखभाल करने वाले स्टाफ नर्सों, फार्मासिस्ट और दर्जा चार कर्मचारियों के बचाव के लिए कोई मास्क अथवा सेनेटाइजर स्टाॅक में ही नहीं है। डॉ. मनिंदरजीत कौर ने बताया कि अस्पताल में तीन बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है और अस्पताल का स्टाफ 24 घंटे लोगों की सुविधा के लिए उपलब्ध है। अस्पताल के फार्मासिस्ट ने बताया कि उच्च अधिकारियों की डिमांड संबंधी लिस्ट भेज दी गई है।

वहीं भुच्चो मंडी के वार्ड नंबर 5 और शहर के विभिन्न वार्डों के स्लम इलाके में रहने लोगों ने बताया कि मंडी की कुछ संस्थाएं उन्हें खाना मुहैया करवा रही हैं पर सरकार की तरफ से उन्हें कुछ नहीं दिया गया। वार्ड नंबर 5 की झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले रमेश कुमार, सुखराम, सुरतिया, अशोक, रामू और नेहरू आदि ने बताया कि वह लगभग 90 परिवार हैं और खाने के लिए भी मोहताज हो गए हैं। प्रशासन की ओर से उन्हें अभी तक कोई सुविधा नहीं दी गई है।

शहर में कामधंधा चौपट, कई परिवारों काे राेटी के लाले पड़े

भास्कर न्यूज|बठिंडा

झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले सैकड़ों प्रवासी लोग बिना किसी सुविधा के कर्फ्यू के कारण अपने घरों में कैद हो कर रह गए हैं, जिनके पास खाने के लिए एक वक्त का राशन भी नहीं है। एक-एक कमरे में 5 से ज्यादा लोग रह रहे है जिन्हें कोरोना से ज्यादा भूख सताने लगी है। लोगों का कहना है कि कर्फ्यू लगे 6 दिन हो गए अभी तक सरकार व प्रशासन की ओर से उनका हाल जानने कोई नहीं पहुंचा।

3. पिछले तीन दिनों से दवाई नहीं मिल रही

जोगी नगर के टिब्बा बस्ती स्थित झुग्गियों में रह रहे सुरिंदर पाल, सुकुमारी देवी, काजल, सतली देवी, ऊषा देवी, राज बहादुर, दिलीप, मुकेश, भागीरथ, राम ने बताया कि यहां पिछले लंबे समय करीब 150 मजदूर परिवार यहां रहता है। झुग्गी में कई लोग बीमार हैं। पिछले तीन दिनों से दवाई नहीं मिल रही है, दवाई लेने के लिए परसराम नगर चौक पर गए, लेकिन दवाई की सभी दुकानें बंद है, दवाई नहीं मिली। सभी ने पैसे एकत्र किए और शाम को राशन लेने के लिए बाजार गए। राशन की दुकानें बंद होने के कारण राशन नहीं मिला, लेकिन चौक पर तैनात पुलिस कर्मचारियों से लाठी जरूर मिली।

भुच्चो मंडी में सुविधाएं न मिलने सबंधी जानकारी देते लोग।

_photocaption_धोबियाना बस्ती की सुखविंदर कौर का कहना है कि उसके पति का देहांत हो चुका है। वह सिलाई करती थी, लेकिन काम न आने से खाने के लाले पड़ गए हैं। फोटो : अश्वनी*photocaption*

धोबियाना बस्ती में घर में राशन न होने पर परेशान बबलू का परिवार।

मौड़ मंडी के अंबेडकर नगर में एक मजदूर को कर्फ्यू के कारण काम नहीं मिला, जिस कारण घर में बच्चों को न चाय मिली और ना ही खाना। शुक्रवार दोपहर को मोहल्ले के किसी व्यक्ति ने उन्हें एक किलो चावल दिए तब जाकर मजदूर ने अपने मासूम बच्चों के लिए चावल बनाकर उनको खिलाया, जिससे उनका पेट भर पाया।

बच्चों को न तो मिली चाय और न ही खाया खाना...

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