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सुप्रीम कोर्ट बनने के वर्षों पहले छिड़े विवाद पर विराम; धार्मिक मामलों में जस्टिस नजीर की मांग सबसे ज्यादा

Bathinda News - एेतिहासिक पल: अयोध्या विवाद में शनिवार को फैसला देने के बाद 11:30 बजे (बाएं से) जस्टिस अशोक भूषण, एसए बोबड़े सीजेआई...

Nov 10, 2019, 07:35 AM IST
एेतिहासिक पल: अयोध्या विवाद में शनिवार को फैसला देने के बाद 11:30 बजे (बाएं से) जस्टिस अशोक भूषण, एसए बोबड़े सीजेआई रंजन गोगोई,जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस एसए नजीर ने सामूहिक तस्वीर खिंचवाई।

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद में शनिवार को अपना एेतिहासिक फैसला दिया। सुप्रीम कोर्ट बनने से वर्षों पहले छिड़े इस विवाद पर अब विराम लग गया है। धार्मिक केसों में जस्टिस नजीर की मांग सबसे ज्यादा रही है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। इससे 8 दिन पहले ही उन्होंने ऐसा फैसला सुनाया, जिसने उनका नाम इतिहास में दर्ज करवा दिया। फैसले के बाद सीजेआई ने ग्रुप फोटो भी खिंचवाई।

बठिंडा, रविवार, 10 नवंबर, 2019

जस्टिस बोबड़े बोले

सीट से उठता हूं तो तनाव वहीं पर छोड़ देता हूं...

नई दिल्ली । अयोध्या मामले में शनिवार को छुट्‌टी के दिन सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने एेतिहासिक फैसला सुनाया। ये केस बेहद संवेदनशील होने के साथ-साथ पुराना भी है। अयोध्या मामला 1950 में सुप्रीम कोर्ट के गठन से भी पहले का है। चीफ जस्टिस गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। इससे 8 दिन पहले ही उन्होंने ऐसा फैसला सुनाया, जिसने उनका नाम इतिहास में दर्ज करा दिया। 40 दिन चली मैराथन सुनवाई के बाद फैसला सुनाया गया। उनके अलावा बेंच में जस्टिस एसए बोबड़े भी थे, जो 18 नवंबर के बाद सीजेआई की जिम्मेदारी संभालने वाले हैं। इतने बड़े फैसले के वक्त होने वाले तनाव पर जस्टिस बोबड़े कहते हैं- तनाव का सवाल ही नहीं। जिस पल मैं सीट से उठता हूं, तनाव वहीं छोड़ देता हूं।

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दैहिक दैविक भौतिक तापा, राज राज नहिं काहुहि ब्यापा।

सब नर करहिं परस्पर प्रीती, चलहिं स्वधर्म निरत श्रु़ति नीती।।

लाखाें कार्यकर्ताअाें के बलिदान काे सलाम

सुप्रीम काेर्ट का फैसला लाखाें कार्यकर्ताअाें के बलिदान काे सलाम है। हिंदू इसी स्थान पर 450 सालाें से मंदिर बनाने की मांग कर रहे थे। लाखाें हिंदुअाें ने इसके लिए जीवन त्याग िकया है। - प्रवीण ताेगड़िया, पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष, विहिप

कोर्ट का फैसला सबको पसंद आए ये मुमकिन नहीं

अदालत का कोई भी फैसला सभी को पसंद आए ये मुमकिन नहीं। दुनिया के इतिहास में किसी भी फैसले से कुछ लोग खुश होते हैं तो कुछ नहीं। लेकिन देश की सबसे बड़ी अदालत के फैसले को चुपचाप मान लिया जाए यही सभ्य समाज की जिम्मेदारी है।

- जावेद अख्तर, गीतकार

5 एकड़ जमीन का अाॅफर खारिज कर देना चाहिए

हमें मस्जिद के लिए 5 एकड़ की जमीन के ऑफर को खारिज कर देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम जरूर है, लेकिन इनफिलेबल यानी अचूक नहीं है। यदि 6 दिसंबर, 1992 को मस्जिद न ढहाई जाती तो क्या सुप्रीम कोर्ट का यही फैसला होता। - असदुद्दीन ओवैसी, प्रमुख, एआईएमआईएम

अर्थात: "रामराज्य' में किसी को शारीरिक, आध्यात्मिक और सांसारिक दुख नहीं है। सब मनुष्य परस्पर प्रेम है और वेदों में बताई हुई नीति (मर्यादा) में तत्पर रहकर अपने-अपने धर्म का पालन करते हैं।

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