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डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन स्लिप के साथ फीस की रसीद भी देंगे

एक वर्ष पहले
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सरकारी अस्पतालों के डाॅक्टरों को अब प्राइवेट प्रैक्टिस के दौरान मरीज को अपने लेटर पैड पर बीमारी का प्रिस्क्रिप्शन लिखने के साथ-साथ फीस की रसीद भी देनी होगी। इस स्लिप पर डाॅक्टर का नाम, पता, विशेषता सहित शुल्क कितना लिया गया है ये सब कुछ अंकित करवाना होगा। इस बारे में सेहत विभाग के निदेशालय ने आदेश जारी कर किए हैं। निदेशालय को डाक्टरों के द्वारा लंबे समय से मनमर्जी का शुल्क वसूलने की शिकायतें मिल रहीं थीं। इसके बाद निदेशालय ने विशेष आदेश जारी किए हैं। इन आदेशों में किस ग्रेड के डाक्टर को कितना शुल्क लिए जाने के लिए अधिकृत किया गया है इसकी भी सूची जारी की है। एसएमओ डा. मनिंदर सिंह ने बताया कि अभी हमारे पास निदेशालय व विभाग की ओर से इस संबंध में कोई एडवाइजरी नहीं मिली है। मिलने के बाद सभी डाॅक्टरों को भेज दिया जाएगा।

आमजन को होगा फायदा: निदेशालय के इन आदेशों का आमजन पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा। अब चिकित्सक मरीजों से चाहकर भी अधिक राशि नहीं वसूल सकेंगे। निदेशालय स्तर पर कार्रवाई होने के भय से बोर्ड लगाएंगे इससे पता चल जाएगा कि किस डाक्टर का कितना शुल्क है।

निदेशालय डाक्टर एवं स्वास्थ्य सेवाओं के अतिरिक्त निदेशक द्वारा जारी किए गए आदेशों में लिखा है कि डाक्टर अपने निवास पर मरीजों को देखने के दौरान निर्धारित शुल्क से अधिक फीस ले रहे हैं। किसी भी मरीज को फीस की रसीद नहीं दी जाती। यहां तक की किसी भी डाक्टर ने अपने यहां परामर्श शुल्क का डिस्प्ले भी नहीं लगा रखा है।

सेहत विभाग ने चिकित्सकों का शुल्क किया निर्धारित

निदेशालय की सूची में मेडिकल आफिसर, मेडिकल कॉलेज से जुड़े डाॅक्टर, सरकारी व प्राइवेट प्रेक्टिस करने वाले डाॅक्टर शामिल हैं। ग्रामीण क्षेत्र में लगे हुए मेडिकल ऑफिसर प्रति मरीज 75 रुपए शुल्क लेंगे। सीनियर मेडिकल आफिसर, जूनियर विशेषज्ञ, ग्रामीण क्षेत्र के सीनियर मेडिकल ऑफिसर 100 रुपए फीस लेंगे। एसोसिएट प्रोफेसर व सीनियर स्पेशलिस्ट 125 रुपए प्रति मरीज शुल्क लेंगे। उच्च ग्रेड के लिए 150 रुपए शुल्क होगा। सीनियर प्रोफेसर 200 सौ रुपए शुल्क लेंगे।

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