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शहर में करियाना के होलसेल दाम बेलगाम पूछ रहे हैं लोग-कब लागू होगी रेट लिस्ट

Bathinda News - कोरोना वायरस के खिलाफ पिछले 15 दिनों से जहां एक वर्ग अपना सब कुछ त्याग जिंदगियां बचाने की जंग लड़ रहा है, वही कर्फ्यू...

Apr 07, 2020, 07:30 AM IST

कोरोना वायरस के खिलाफ पिछले 15 दिनों से जहां एक वर्ग अपना सब कुछ त्याग जिंदगियां बचाने की जंग लड़ रहा है, वही कर्फ्यू के 15 दिन बाद भी प्रशासन की कोशिशों के बावजूद शहर में रोजमर्रा की जरूरतों के सामान की कालाबाजारी कंट्रोल होना बेहद कठिन नजर आ रहा है। करियाना में विशेषकर रसोई के सामान के स्टॉकिस्ट तथा होलसेलर्स लाेगाें से मनमाने रेट वसूलने में कसर नहीं छोड़ रहे हैं जिसका खामियाजा रिटेलर व आमजन को भुगतना पड़ रहा है। लॉकडाउन से पहले सामान्य रेटों पर स्टोर सामान को स्टॉकिस्ट मर्जी से निकाल रहे हैं जिसमें कुछ समय पहले आटा 26 रुपए की बजाए 32 से 34 रुपए तक बिक गया। इसी तरह रसोई के मुख्य घटक दालें व अन्य जरूरी सामान ट्रांसपोर्ट की ढुलाई असामान्य रहने के चलते व्यापारियों को मौजूद स्टॉक के दाम बढ़ाने की खुली छूट मिल गई है। आलम यह है कि होलसेलर्स रिटेलर्स को 100 या 500 की बजाए 2 हजार के नोट लाने की ताकीद के साथ जेबों में नोट भरकर लाने को स्पष्ट कहने लगे हैं, लेकिन बिल देने की बजाए कच्ची पर्ची बना रिटेलर को थमाई जा रही है। रिटेलर व शहरवासियों के अनुसार अगर सब्जी मंडी में रेट लिस्ट लागू हो सकती है तो होलसेल करियाना में इसे लागू करने में देरी क्यों हो रही है।

सब्जी मंडी में रेट लिस्ट, किराना पर लागू क्यों नहीं : शहर में शुरूआत में दो दिन बहुत महंगे भाव सब्जी बिकने के बाद कांग्रेस नेताओं ने उन पर लगाम लगाने का दावा करते हुए मार्केट कमेटी में रेट लिस्ट लगा शहर को राहत देने की बात कही, लेकिन शहर में किराना के सामान पर लगाम लगाने में कांग्रेस की दिलचस्पी नजर नहीं आ रही है। एक जानकारी के अनुसार कोरोना हेल्पलाइन पर शुरूआत में करियाणा महंगा बेचने की रोजाना करीब 4 हजार शिकायतें थीं, जो प्रशासन के प्रभावी काम से अब 10 फीसदी रह गई हैं। इस बाबत कांग्रेस के जिला शहरी प्रधान अरूण वधावन कहते हैं कि अगर शहर में कालाबाजारी हो है तो यह बिल्कुल गलत है। कल ही मीटिंग कर सब्जी मंडी की भांति होलसेल करियाणा की लिस्ट फिक्स व डिस्पले करने की कार्यवाही की प्रक्रिया शुरू की जाएगी ताकि शहरवासियों को अधिक महंगे दामों पर सामान लेने को मजबूर नहीं होना पड़े।

लोगों की भूख की तड़प पर मुनाफाखोर हावी

कोरोना वायरस के मद्देनजर कर्फ्यू के चलते प्रशासन बेहद जरूरी सर्विस ही चला रहा है। अमीर व्यक्ति भले ही इस संकटकाल में कम समस्याएं झेल रहे हों, लेकिन निम्न व मध्यमवर्ग को यह समय काटना भारी पड़ना शुरू हो चुका है। सभी विकास कार्य अवरुद्ध होने से दिहाड़ीदार व इंडस्ट्री की लेबर पर संकट बढ़ रहा है, लेकिन ऐसे बुरे समय में भी स्टॉकिस्टों तथा होलसेल मुनाफाखोरी से बाज नहीं आ रहे हैं तथा जमकर तिजोरियां भरने का काम हो रहा है तथा कर्फ्यू की आड़ में चीजों की कमी दिखा दाम ऊंचे चढ़ाए जा रहे हैं जिसमें दो मिनट में बनने वाले भोज्य पदार्थ तक शामिल हो गए हैं। शहर के रिटेलर्स के अनुसार होलसेलर्स से इस समय अगर आप दाम पर बहस करते हैं तो वह आपको माल नहीं देते। दूसरा 100 के नोटों कीं जगह बड़े नोट देने का दबाव रिटेलरों पर है ताकि उनका समय खराब नहीं हो। वहीं फोन पर भाव नहीं बताने के अलावा महंगे भाव पर मध्यम क्वालिटी का सामान ही मिल रहा है जो उनकी परेशानी बढ़ा रहा है।


होलसेल करियाना दामों में बदलाव

आइटम कर्फ्यू से पहले कर्फ्यू के बाद रेट

मूंगी धूली 98 125 छिलका मूंगी 88 110

बेसन 68 76

चना दाल 55 67

लाल मसरी 80 56

सरसों तेल 90 110 मूंगी साबुत 89 105

अरहर दाल 78 90

चीनी 36.50 38.50

लाल राजमा 72 85

राजमा चितरा 88 98

रिफाइंड 95 105

गुड़ 35 43

आटा नॉन-ब्रांडेड 250 270

(दामों में थोड़ा अंतर संभावित है)

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