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सीएए व एनआरसी कानून के भ्रम होने पर ग्रामीणों ने स्वास्थ्य टीम का विरोध किया

एक वर्ष पहले
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बठिंडा के गांव माइसरखाना में विभिन्न मरीजों की खोज करने पहुंची सेहत विभाग की सर्वे टीम का भाकियू के नेतृत्व में ग्रामीणों ने विरोध किया। लोगों ने सीएए एवं एनआरसी कानून को लेकर जातिगत आंकड़े एकत्र करने का आरोप लगाते हुए जानकारी देने से इंकार कर दिया। माइसरखाना पीएचसी की स्वास्थ्य टीम को गांव माइसरखाना में विरोध का सामना करना पड़ा। जिक्रयाेग है कि विभाग द्वारा विभिन्न रोग खोजी अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत सेहत विभाग के सुपरवाइजर कर्मजीत सिंह के साथ आशाओं को लेकर गांव माइसरखाना में पहुंचे। टीम ने गांव में काफी समय से बुखार, खांसी से पीड़ित या टीबी का इलाज नहीं कराने वाले मरीजों की घर-घर जाकर तीन भाग में करीब 30 सवाल पूछते हुए आंकड़े एकत्र करने शुरू कर दिए। टीम दूसरे वर्ग की मोहल्ले में पहुंची। टीम ने लोगों से जातिगत सवाल पूछने के साथ टीबी के मरीजों के आंकड़े लेने शुरू किए। जिस पर वर्ग के लोगों ने सीएए और एनआरसी कानून को लेकर आंकड़े एकत्र करने का आरोप लगाते हुए टीम का विरोध करना शुरू कर दिया। किसान नेता दर्शन सिंह ने बताया हेल्थ विभाग की टीम गांव में जातिगत सवाल पूछे जाने से आक्रोशित हुए लोगों ने उनको सर्वे करने से रोक दिया। सुपरवाइजर कर्मजीत सिंह ने कहा कि टीम टीबी व अन्य मरीजों की खोज करके आंकड़े एकत्र कर रह रही थी। आशा वर्कर घर-घर जाकर ब्योरा जुटाकर कम्प्यूटर /टेबलेट से ऑनलाइन पोर्टल रियल टाइम डाटा एंट्री करेंगी। सीएए और एनआरसी कानून के भ्रम होने पर ग्रामीणों ने टीम का विरोध किया। बाद में टीम ने अपने आईडी कार्ड दिखाए, तब भी कुछ ग्रामीणों ने गांव में टीम को काम नहीं करने दिया।

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