वाह रे पुडा, लाइब्रेरी बनाई पर छत से पानी की निकासी भूले

2 वर्ष पहले
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सरकारी इमारतों का निर्माण अधिकारी कितनी जिम्मेदारी व गंभीरता से करवाते हैं, इसकी बानगी बठिंडा के माडल टाउन फेज 3 स्थित दादा पोती पार्क में सांसद ग्रांट से बनी लाइब्रेरी से समझी जा सकती है जहां छत से पानी की निकासी को कोई जगह ही नहीं बनाई गई। लगातार बारिश होने से छत पर पानी इकट्ठा होने से जब पानी का रिसाव होना शुरू हुआ अाैर वह लाइब्रेरी से बाहर आया तो लोगों को स्थिति का आभास हुआ। इसके बाद वहां के पार्षद हरपाल ढिल्लों व लोगों ने मिलकर छत के एक किनारे को सब्बल से तोड़कर पानी की निकासी की जगह बनाई, लेकिन बताने के बावजूद अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। छत से पानी का रिसाव होने से वहां रखी लाखों की किताबें खराब होने का अंदेशा पैदा हो गया है, लेकिन पुडा द्वारा गेट पर ताला लगाने के चलते अंदर की स्थिति मालूम नहीं है। पार्षद हरपाल ढिल्लों के अनुसार छत पर इतना अधिक पानी था कि छत अभी तक रिस रही है। केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल द्वारा पार्क अपग्रेड करने को दिए गए करीब 1.50 करोड़ रुपए से पार्क अपग्रेड करने के अलावा लाइब्रेरी का निर्माण करवाया गया था।

पानी बाहर आया तो मिली छत से रिसाव की जानकारी
दादी-पोती पार्क स्थित यह लाइब्रेरी करीब 150-200 गज में बनी हुई है जहां पूरे इलाके के लोग व बच्चे वहां अखबार व किताबें पढ़ने सुबह से शाम तक आते हैं, लेकिन कुछ समय से लाइब्रेरी बंद होने से लोगों का वहां जाना बंद हो गया है। 16 जुलाई को बारिश होने के बाद बिल्डिंग चेक की तो उन्हें पता लगा कि छत से पानी की निकासी की कोई जगह ही नहीं रखी गई है। वार्ड 6 के अकाली पार्षद हरपाल ढिल्लों ने बताया कि पानी निकासी नहीं होने के चलते सब्बल से लोगों को छत का एक किनारा तोड़कर पानी निकालना पड़ा, लेकिन पानी निकालने से पहले ही छत के रिसने से बहुत अधिक नुकसान हो गया। हालांकि अंदर जाना ताला लगा होने से संभव नहीं हुआ, लेकिन यहां आकर देखना किसी अधिकारी ने जरूरी नहीं समझा। माडल टाउन फेस 3 के हरनेक सिंह, कृष्ण कुमार शर्मा, लाल चंद वर्मा, हंसराज गोयल ने कहा कि लाइब्रेरी के निर्माण में लापरवाही बरतने से ही छत से पानी टपकने लगा है।

पानी निकलवा दिया गया है
तेज हवा की वजह से छत पर पत्ते काफी बिखर गए थे जिसके पानी की निकासी वाली जगह पर इकट्ठा होने से छत पर पानी भर गया। इसे निकलवा दिया गया है तथा सब कुछ ठीक है। अनिल भारद्वाज, एसडीओ, बीडीए

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