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ई-वे बिल से सहमा बाजार, भाव गिरे इस हफ्ते भी टूट सकते हैं दाम

Bhatinda News - बिजनेस रिपोर्टर | मंडी गोबिंदगढ़ एक अप्रैल से लागू होने वाले ई-वे बिल के कारण पंजाब की लोहा नगरी मंडी गोबिंदगढ़ में...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 02:10 AM IST
ई-वे बिल से सहमा बाजार, भाव गिरे इस हफ्ते भी टूट सकते हैं दाम
बिजनेस रिपोर्टर | मंडी गोबिंदगढ़

एक अप्रैल से लागू होने वाले ई-वे बिल के कारण पंजाब की लोहा नगरी मंडी गोबिंदगढ़ में हफ्ते के दौरान चली आ रही तेजी का दौर थम गया। हफ्ते के आखिरी दिन इंगट का भाव 600 रुपए प्रति टन तक टूट कर 35,400 रुपए पर पहुंच गया। स्क्रैप के भाव में भी 400 रुपए प्रति टन की गिरावट देखने को मिली। इसका भाव 25,000 रुपए प्रति टन पर बंद हुआ। कारोबारी सूत्रों का मानना है कि ई-वे बिल के कारण भावों में गिरावट का दौर अगले हफ्ते जारी रह सकता है। कारोबारी हिमांशु गंभीर ने बताया कि भावों में गिरावट का दौर अस्थायी है, जल्द ही बाजार ई-वे बिल के मुताबिक खुद को संभाल लेगा। उन्होंने कहा कि मंडी का 5-7 फीसदी कारोबार शुरूआती दौर में प्रभावित हो सकता है। कारोबारियों सूत्रों अनुसार इससे दो नंबर के कारोबार पर कुछ खास असर नहीं होने वाला हैं हालांकि दो नंबर का कारोबार भी महंगा जरूर हो जायेगा। उधर दिल्ली बाजार में पिछले हफ्ते पुरानी व मैल्टिंग स्क्रैप की गलाई वाली कंपनियों में शॉर्टेज बन गई, जिससे 800/1200 रुपए प्रति टन की तेजी आ गई। पिग व स्पंज आयरन के भाव भी 500/600 रुपए विदेशों में महंगे हो गये। इसके प्रभाव से मार्च क्लोजिंग के बावजूद उत्तर भारत की कंपनियों में सरिया, एंगल, चैनल, गॉर्डर, टी-आयरन के भाव मंदे के बाद से 800/1000 रुपए बढ़ गए। लागत पड़ता महंगी हो जाने से अप्रैल में और बाजार बढ़ सकता है। आलोच्य सप्ताह यूपी, हरियाणा, राजस्थान एवं एमपी से कच्चे माल की आपूर्ति 23 प्रतिशत के आसपास घट गई, जिससे 800/1200 रुपए छलांग लगाकर पुरानी स्क्रैप 28500 रुपए, मैल्टिंग 29300 रुपए एवं इंगट 35500 रुपए प्रति टन की ऊंचाई पर जा पहुंचे। पिग व स्पंज आयरन के भाव भी विदेशों में 500/600 रुपए प्रति टन हाजिर शिपमेंट के हिसाब से ऊंचे बोलने लगे।

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उत्तरी राज्यों में 56 लाख गांठ कपास पैदावार की संभावना, आमद घटी

भूपेंद्र शर्मा पराशर | जैतों

पंजाब, हरियाणा व राजस्थान की मंडियों में इस साल करीब 56 लाख गांठ कपास की पैदावार होने की संभावना है जबकि बीते साल पूरे सीजन में करीब 45.50 लाख गांठ कपास मंडियों में आई थी। अब तक इन राज्यों में कुल करीब 52.75 लाख गांठों की आमद हुई है। एक रूई कारोबारी ने भास्कर को बताया कि इस हफ्ते कपास की आमद 18000-19000 गांठों से घटकर 13-14000 गांठ रह गई है। कपास की आमद घटने का मुख्य कारण कपास के भाव गिर कर 4750 से 4850 रुपए क्विंटल आ जाना है। जबकि इस साल जनवरी में कपास के भाव करीब 5800 रुपए क्विंटल पहुंच गये थे। उचाना मंडी के युवा किसान रवि श्योकंद व सोनू खटकड़ उचाना ने बताया कि यदि कपास के भाव इस प्रकार ही गिरते रहे तो नए कपास सीजन 2018-19 के लिए किसान कपास की बुआई बहुत कम करेंगे, क्योंकि कपास की खेती बहुत महंगी पड़ने लगी है। इन भावों में खेती के खर्च तो क्या पूरे होने हैं बल्कि उन्हे नुकसान होता है। दूसरी तरफ कपास जिनर मिलर भी इस धंधे से काफी परेशान नजर आने लगे हैं। इस बार तो कॉटन सीड (बिनौलों) ने भी कपास जिनरों से मुंह फेर कर पीठ दिखाई है जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ है। सूत्रों का कहना है कि कपास जिनर मिलों को हाजिर में कपास खरीद उसके बदले रूई बेचने से हानि हो रही है क्योंकि डिस्पैरिटी चल रही है। कपास जिनर मिलों को तो केवल तेजी ही हाथ लगती है। इस हफ्ते 20 से 30 रुपए मन रुई में तेजी रही। रूई व्यापार शनिवरा बठिंडा में 4180 व 4178 रुपए मन, अबोहर 4225 रुपए मन, भुन्ना 4192 रुपए मन, मट्‌टु 4200 रुपए मन, हनुमानगढ़ 4200 रुपए मन व आदमपुर 4195 रुपए मामूली कारोबार रहा। शनिवार को आगामी दिनों में रूई भाव की तेजी मंदी को लेकर रूई खरीदारों व बिकवालों में चर्चा अच्छी चली। सूत्रों का कहना है कि बीते साल से करीब 10 लाख गांठ ज्यादा रूई निर्यात की संभावना के बावजूद अभी तक रूई बाजार ने तेजी के तेवर नहीं दिखाये हैं। बाजार में धन की तंगी भी खूब सता रही हैं। यह भी एक कड़वी सच्चाई है कि रूई खरीददार व बिकवाल दोनों नहीं चाहते हैं कि रूई के भावों की हर हर गंगे हो। रूई भाव गिरने से धागे के भाव डूब सकते हैं जिससे मिलों को बड़ा नुकसान हो सकता है।

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