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आज संस्कृति का संरक्षण एक चुनौती : डॉ. शर्मा

डीएवी कॉलेज के पोस्ट ग्रेजुएट पंजाबी विभाग ने शनिवार को पंजाबी सभ्याचार ते वैश्वीकरण दा प्रभाव विषय पर नेशनल...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 02:15 AM IST
डीएवी कॉलेज के पोस्ट ग्रेजुएट पंजाबी विभाग ने शनिवार को पंजाबी सभ्याचार ते वैश्वीकरण दा प्रभाव विषय पर नेशनल सेमिनार करवाया। वर्ल्ड पंजाबी सेंटर के पूर्व डायरेक्टर डॉ. दीपक मनमोहन सिंह, पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के प्रो. डॉ. जसविंदर सिंह, डीएवी कॉलेज जालंधर के पंजाबी पीजी विभागाध्यक्ष डॉ. रजनीश बहादुर सिंह, पंजाबी यूनिवर्सिटी रीजनल सेंटर से डॉ. सतनाम सिंह जस्सल व डॉ. जीत सिंह जोशी विशेष तौर पर पधारे। मुख्य वक्ता डॉ. जसविंदर सिंह ने कहा कि 21वीं सदी में वैश्वीकरण के प्रभाव के कारण परिवर्तन की गति तीव्र हो गई है। वैश्वीकरण को विस्तारपूर्वक समझौते हुए उन्होंने डब्ल्यूटीओ की नीतियों उदारीकरण, निजीकरण, विलीनीकरण की नीतियों के विषय में बताया। डॉ. रजनीश बहादुर ने वैश्वीकरण की प्रक्रिया को साहित्य के माध्यम से संपृक्त करने का प्रयास किया। प्रिंसिपल डॉ. संजीव शर्मा ने कहा कि वैश्वीकरण के प्रभाव से पंजाबी संस्कृति के विभिन्न सरोकार भंगड़ा, गिद्दा, संस्कार, लोकगीत, त्योहार आदि बदल रहे हैं। वहीं व्यापारीकरण के युग में संस्कृति का संरक्षण एक चुनौती बन गया है। डॉ. जीत सिंह जोशी ने अपनी अमूल्य सेवाएं पंजाबी साहित्य को दी हैं। पंजाबी विभाग के सदस्य प्रो. रविंदर सिंह, डॉ. सुखदीप कौर, डॉ. सविंदर कौर, प्रो. रवि नागपाल, प्रो. बलविंदर कौर, प्रो. किरण कौर, प्रो. कुलविंदर कौर, प्रो. रितु कौर, प्रो. मनप्रीत कौर, प्रो. वीरपाल कौर ने सेमिनार में सहयोग दिया। इस अवसर पर कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के शोधार्थी वेदपाल भाटिया सोनी की खामोशी दी आहट नामक पुस्तक का विमोचन किया गया। डॉ. सतनाम जस्सल ने चरण सिंह द्वारा भेजी 80 किताबें लाइब्रेरी को उपहारस्वरूप दी।

डीएवी कॉलेज में पंजाबी विभाग के नेशनल सेमिनार में संबोधित करते वक्ता।