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टीचर्स देंगे सफेद मक्खी से बचाव के सुझाव

कपास की फसल को सफेद मक्खी के नुकसान से बचाने के लिए किसान काफी परेशान हैं। खेतीबाड़ी विभाग की तरफ से जिला प्रशासन...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 02:15 AM IST
टीचर्स देंगे सफेद मक्खी से बचाव के सुझाव
कपास की फसल को सफेद मक्खी के नुकसान से बचाने के लिए किसान काफी परेशान हैं। खेतीबाड़ी विभाग की तरफ से जिला प्रशासन के सहयोग से फसल को बचाने के लिए प्रयास भी शुरू कर दिए हैं। मगर अब विभिन्न विभागों के साथ टीचर्स की भी ड्यूटी लगाई गई है।

इसमें टीचर्स को कहा गया है कि वह अपने वर्किंग एरिया में किसानों की मदद करें। साथ ही स्कूलों के आसपास टीचर सभी किसानों को बचाव के तरीके बताकर अवेयर करेंगे। इसके अलावा वह अपने स्कूल के अंदर भी सफेद मक्खी से फसल को बचाने का प्रयास करेंगे। इस संबंध में बीपीईओज की जिम्मेदारी लगाई गई है कि वह हर सप्ताह प्रगति रिपोर्ट ब्लाक वाइज कंसोलिडेट्स कर भेजेंगे। जबकि जिले में 2017 में 1.25 लाख हेक्टेयर जमीन पर कपास की बिजाई की गई थी।

विभिन्न विभागों की ड्यूटियां लगाई : डॉ. गुरादित्ता

फसल को सफेद मक्खी से बचाने के लिए विभिन्न विभागों की ड्यूटियां लगाई गई हैं। जिसके तहत टीचर्स भी सफेद मक्खी से फसल को बचाने के लिए अपने स्कूलों के आसपास किसानों को जागरूक करेंगे। नरमे की फसल पर हमला करने वाली सफेद मक्खी पहले पीली बूटी, कंघी बूटी, कांग्रेसी घास व भंग पर पनाह लेती है। यह नदीन सड़कों, नहरों, रजवाहों, ड्रेनों व निजी खेतों के किनारों पर होते हैं।

जानकारी

पढ़ाने के साथ वर्किंग एिरया के किसानों को जागरूक करने की लगाई ड्यूटी

नीम आधारित कीटनाशक का करें पहला छिड़काव

यदि कपास की फसल में प्रति पत्ता सफेद मक्खी के व्यस्क 4-6 के आसपास या इससे अधिक दिखाई दें तो पहला छिड़काव नीम आधारित कीटनाशक जैसे निम्बीसीडीन 300 पीपीएम या अचूक 1500 पीपीएम की 1.0 लीटर मात्रा को 150-200 लीटर पानी में घोलकर करें। सफेद मक्खी के बच्चों की संख्या प्रति पत्ता 8 से ज्यादा दिखाई दे तो स्पाइरोमेसिफेन (ओबेरोन) 200 मिलीलीटर या पायरीप्रोक्सीफेन (लेनो) नामक दवा की 400-500 मि.ली मात्रा को प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

विभाग के पास फंड नहीं

नरमे की बिजाई से पहले खेतीबाड़ी विभाग ने फसल को सफेद मक्खी के हमले से बचाने के लिए विभिन्न विभागों के साथ मीटिंग कर प्लानिंग तो कर ली है। मगर प्लानिंग को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए विभाग के पर्याप्त अभी फंड नहीं है। अभी गेहूं की कटाई का काम शुरू भी नहीं हुआ कि सफेद मक्खी से निपटने के लिए बिना फंड के ही प्रयास शुरू कर दिए हैं। जिसके तहत नरमे की बिजाई दौरान कीटाणुओं की रोकथाम के लिए मुलाजिमों को हिदायत भी जारी की गई है। इस बार 1.40 लाख हेक्टेयर में नरमे की बजाई का लक्ष्य तय किया है। पिछले साल भी यह रकबा इतना ही था, लेकिन बिजाई 1.25 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

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