बठिंडा

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बहबलकलां गोलीकांड: मोगा के पूर्व एसएसपी, एसपी, थाना प्रभारी और एक इंस्पेक्टर के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज

जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की सिफारिश पर बड़ी कार्रवाई

Dainik Bhaskar

Aug 12, 2018, 04:51 AM IST
kotakpura bahabalakalan bullet case fir lodge on former sp

चंडीगढ़/कोटकपूरा. पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब समेत अन्य धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी से जुड़े मामलों की जांच के लिए बने रिटायर्ड जस्टिस रणजीत सिंह कमीशन की सिफारिशों पर एफआईअार में चार पुलिस अफसरों के नाम शामिल कर लिए गए हैं। ये कार्रवाई बेअदबी के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान फायरिंग में दो युवकों की मौत के मामले में की गई है। कार्रवाई सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के निर्देश पर शनिवार को हुई। फरीदकोट के एसएसपी राज बचन सिंह संधू ने बताया कि मोगा के तत्कालीन एसएसपी चरणजीत सिंह, फाजिल्का के पूर्व एसपी बिक्रमजीत सिंह के साथ इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह और एसआई अमरजीत सिंह के नाम भी एफआईआर में आ गए हैं। चरणजीत सिंह व बिक्रमजीत सिंह रिटायर हो चुके हैं।

पहले अज्ञात पुलिस वालों के नाम दर्ज थी एफअाईअार: जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की ओर से पिछले महीने सीएम को सौंपी गई रिपोर्ट के पहले हिस्से में इन चार पुलिस अफसरों के नाम शामिल करते हुए सिफारिश की थी कि इन्हें आरोपी के तौर पर नामजद किया जाए। जबकि एफआईआर में अभी तक अज्ञात पुलिसवालों का जिक्र था।

एसएचअो समेत पांच पुलिसवालों की भूमिका की भी जांच होगी: आयोग की सिफारिशों के अनुसार इस मामले में पांच अन्य पुलिस अफसरों व मुलाजिमों की भूमिका की भी जांच के निर्देश दिए गए हैं। इसके अनुसार मोगा के तत्कालीन एसएसपी चरणजीत के सुरक्षा गार्ड रहे शमशेर सिंह, हरप्रीत सिंह, गुरप्रीत सिंह, परमिंदर सिंह व थाना लाडोवाल के प्रभारी इंस्पेक्टर हरपाल सिंह की मामले में भूमिका की जांच की जाएगी। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 30 जुलाई को केस की जांच सीबीआई को सौंपने का एलान किया था।

अक्टूबर 2015 का है पूरा मामला: 12 अक्टूबर, 2015 को गांव बरगाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के बाद गांव बहबलकलां की मुख्य सड़क पर व कोटकपूरा के मेन चौक पर 14 अक्टूबर को पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे लोगों पर फायरिंग और लाठीचार्ज किया था। इस दौरान प्रदर्शन कर रहे कृष्ण भगवान और गुरजीत सिंह की मौत हो गई थी। जबकि 10 से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे।

घटनास्थल पर मिलीं गोलियाें से टैंपरिंग: जांच के दौरान पुलिस ने खुद को भी बचाने की भी कोशिश की। एक रिपोर्ट के अनुसार घटना में चलाई गई दो गोलियां कई महीने तक थाने में ही रखी रहीं। बाद में दो जगह फॉरेंसिक जांच हुई। पंजाब की लैब में जांच के दौरान बताया गया कि ये गोलियां पुलिस के किसी हथियार से नहीं चलीं। केंद्र की लैब की जांच में सामने आया कि दोनों गोलियों को जांच के लिए भेजने से पहले टेंपर कर दिया गया था।

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