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अकाली नेता की करोड़ों की प्रॉपर्टी फिर भी बनवा लिया नीला कार्ड, 5 साल लिया फायदा, अब केस

गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के लिए शुरू की गई आटा-दाल स्कीम में संपन्न परिवारों की तरफ से लाभ लेने के मामले...

Danik Bhaskar

Apr 17, 2018, 03:15 AM IST
गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के लिए शुरू की गई आटा-दाल स्कीम में संपन्न परिवारों की तरफ से लाभ लेने के मामले में अपनी तरह का पहला मामला बठिंडा पुलिस ने दर्ज किया है। यह मामला आप के पूर्व नेता की तरफ से अकाली दल के पूर्व पार्षद शिवजीराम शर्मा की प|ी व बहू के खिलाफ दर्ज करवाया गया है। इसमें बताया गया है कि लाभ लेने वाले परिवार के नाम विभिन्न स्थानों में करोड़ों की प्रॉपर्टी के बावजूद गलत दस्तावेज जमा करवाने के साथ राजनीतिक पहुंच का फायदा लेकर नीला कार्ड बनवाया और इसी कार्ड पर 5 साल तक फायदा लेते रहे।

मामले में एसएसपी ने ईओ विंग के मार्फत करवाई जांच में आरोप साबित होने के बाद पूर्व अकाली एमसी व उनकी प|ी के खिलाफ जालसाजी के साथ जनप्रतिनिधि होने के नाते गलत जानकारी देने के मामले में केस दर्ज किया है। गौर हो कि प्रशासन ने जांच पड़ताल करवाकर हाल ही में 81166 लोगों के कार्ड यह कहकर काट दिए थे कि उन्होंने सरकार को गलत जानकारी देकर स्कीम का फायदा लिया है।

पूर्व एमसी शिवजीराम।

हलफिया बयान में बताया गरीब, जिले में 2,23,465 में से 81166 लोगों काटे थे कार्ड

सास-बहू के नाम पर मकान व प्लॉट समेत करोड़ों की प्रॉपर्टी

एसएसपी नवीन सिंगला के पास दी गई लिखित शिकायत में आप के पूर्व नेता व समाज सेवी आत्मा सिंह वासी लाल सिंह बस्ती ने आरोप लगाया कि शिरोमणि अकाली दल से संबंधित पूर्व पार्षद की प|ी मीना शर्मा और बहू अमनदीप कौर वासी लाल सिंह बस्ती सामान्य वर्ग से संबंधित है। वर्तमान में उन लोगों के नाम पर डबल स्टोरी मकान लाल सिंह बस्ती में बना हुआ है। वहीं मीना शर्मा व अमनदीप कौर के नाम एक दर्जन के करीब विभिन्न स्थानों में मकान और प्लॉट भी है। इसके बावजूद आटा दाल स्कीम के तहत कार्ड नंबर 2617869 बनाया गया है। नीले कार्ड मामले में आत्मा सिंह पुत्र बलवंत सिंह ने बताया कि पूर्व पार्षद व डिपो संचालक के पास जायदाद व पैसे की कोई कमी नहीं फिर भी उसने अपनी प|ी मीना शर्मा व बहु अमनदीप कौर प|ी सन्नी शर्मा के झूठे दस्तावेजों के आधार पर नीले कार्ड बनाए हैं।

ऐसे बनते हैं नीले कार्ड

नीले कार्ड एसडीएम के आदेश पर बनाए जाते हैं व इससे पहले दस्तावेज तैयार करने के लिए पटवारी, तहसीलदार और एसडीएम तक शामिल होते हैं। उनकी मंजूरी के बाद ही नीले कार्ड बनाए जाते हैं, जिनकी सालाना आय 60 हजार से कम व मकान 100 गज से अधिक न हो। ऐसे में कार्ड धारक एक घोषणा पत्र देता है जिसमें वह गरीबी की रेखा के नीचे रहने का प्रमाण देता है। इस मामले में पूर्व पार्षद के परिवार ने सभी औपचारिकताएं पूरी की, लेकिन अधिकारी कही भी इस गड़बड़ को नहीं पकड़ने पाए। जिस परिवार का कार्ड बनाया गया है वह इलाके का नामी परिवार है।

दूसरी तरफ 81 हजार लोगों के काट दिए कार्ड

बठिंडा जिले में आटा दाल स्कीम के कुल 2,23,465 लाभपात्री थे लेकिन इनमें से 81166 लोगों के कार्ड यह कहकर काट दिए गए कि उन्होंने गलत जानकारी देकर सरकारी स्कीम का लाभ हासिल किया। जिले में री- वेरिफिकेशन के बाद सिर्फ 147064 परिवार ही बाकी बचे हैं। इस मामले में पिछले दिनों विवाद उठा था कि रिवेरिफिकेशन करने वाले अधिकारियों ने बठिंडा सब डिविजन के ही 8886 लोगों को गैरहाजिर दिखा कार्ड काटे हैं जिसमें रिपोर्ट में गैरहाजिर लिखा होने के कारण उनके कार्ड काट दिए गए। अब इसमें एसडीएम दफ्तर फिर से जांच करवाने की हिदायत दे चुका है। वर्तमान में बठिंडा शहर में 69691 लाभपात्र थे जिसमे 3,17,712 लोगों के नाम काटे गए है।

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