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वातावरण शुद्धता के लिए पीपीसीबी ने लाजमी किया स्टार्च कैरीबैग का प्रयोग

प्लास्टिक के लिफाफों से पैदा होने वाले प्रदूषण से छुटकारा दिलाने और वातावरण को साफ सुथरा रखने के लिए पंजाब...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 03:15 AM IST
प्लास्टिक के लिफाफों से पैदा होने वाले प्रदूषण से छुटकारा दिलाने और वातावरण को साफ सुथरा रखने के लिए पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वीरवार से बठिंडा शहर में भी मक्की और आलू स्टार्च से बने कैरीबैग का प्रयोग करना जरूरी कर दिया है। इसके लिए पीपीसीबी व नगर निगम बठिंडा के अधिकारियों की बैठक हुई। इस दौरान निगम कमिश्नर डॉ. रिशीपाल सिंह, एसटीपी कमलप्रीत कौर, चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर सतीश कुमार, सुपरिटेंडेंट राजीव सग्गड़, पीपीसीबी के एक्सईएन परमजीत सिंह, एसडीओ रूबी सिद्धू ने मक्की और आलू से बने लिफाफे जारी किए। निगम कमिश्नर डॉ. रिशीपाल सिंह ने कहा कि ना गलने वाले प्लास्टिक के लिफाफे हमारे वातावरण के लिए एक बड़ी समस्या बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को चाहिए कि वह प्लास्टिक के लिफाफों की जगह मक्की और आलू के स्टार्च से बने लिफाफे ही प्रयोग में लाएं जिससे कि प्लास्टिक के लिफाफों को धीरे धीरे समाप्त किया जा सके और प्लास्टिक के लिफाफों से पैदा होने वाले प्रदूषण को रोका जा सके।

डिमांड को पूरी करने के लिए 4 विदेशी कंपनियों से किया करार

मक्की व आलू से बने स्टार्च कैरीबैग को जारी करते निगम कमिश्नर व अन्य।

प्लास्टिक लिफाफ इसलिए नुकसानदाक| प्लास्टिक के बने लिफाफे न गलने के कारण पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं और सीवरेज आदि में फंस कर सीवरेज व्यवस्था को भी जाम कर देते हैं।

6 महीने में मिट्टी में गल जाते है स्टार्च के बने लिफाफे : एक्सईएन

पीपीसीबी बोर्ड के एक्सईएन परमजीत सिंह ने बताया कि बोर्ड ने मक्की और आलू के स्टार्च को इस्तेमाल कर गलनशील लिफाफे तैयार करने वाले उद्योगों के साथ तालमेल किया है। यह नई किस्म के लिफाफे अपने उपयोग के 6 महीने में मिट्टी और वातावरण में गल जाते हैं और इनका वातावरण पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता। पंजाब में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रदूषण के खात्मे के लिए लगातार प्रय| जारी है और ताजा कोशिश पंजाब को प्लास्टिक बैगो से मुक्त करना है। इसी नीति के तहत बीते दिनों सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब से इसकी शुरुआत की गई थी। इन लिफाफों की बाजार में सप्लाई पूरी करने पर प्लास्टिक के लिफाफों पर पूर्ण रूप में पाबंदी होगी।

बिक्री करने के लिए डिस्ट्रीब्यूटरों और होलसेलर्स काे करें प्रेरित

निगम कमिश्नर ने तहबाजारी सुपरिटेडेंट व चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर को आदेश दिए कि शहर में पॉलीथिन बैग बेचने वाले डिस्ट्रीब्यूटरों और होलसेलर्स के साथ मीटिंग करे और उन्हें इन मक्की और आलू स्टार्च से बने कैरीबैग की बिक्री करने के लिए प्रेरित करे। इसके साथ ही उन्हें बताया कि प्रशासन ने 15 मई से शहर में प्लास्टिक के लिफाफे इस्तेमाल करने पर पूर्ण पाबंदी लगाने का फैसला किया है। उसके बाद जो डिस्ट्रीब्यूटर या होलसेलर पॉलीथिन बेचता पाया जाएगा, उस पर कानूनी कार्यवाही की जाएगा। पंजाब सरकार ने साल 2016 में ही पॉलीथिन बनाने, बेचने और इस्तेमाल करने पर पाबंदी लगा दी थी।

पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार ने 4 विदेशी कंपनियों से समझौता किया है जो आलू और मक्की के स्टार्च से कंपोस्ट कैरीबैग तैयार करेंगी। इनकी खास वजह यह है कि हवा के संपर्क में आने पर ये कैरीबैग 5-6 महीने के अंदर खुद ब खुद नष्ट हो जाएगा। इन कंपनियों को कच्चे माल की सप्लाई के लिए दो-तीन महीने के अंदर प्लांट लग जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि कंपोस्ट कैरीबैग की कीमत ज्यादा नहीं होगी।