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मोबाइल, नशा और मनपसंद बैरक देने के लिए रिश्वत लेने वाला जेल सुपरिटेंडेंट काबू

मानसा जेल में कैदियों को मोबाइल, मनपसंद बैरक और नशा करने की छूट देने की एवज में 25 हजार की रिश्वत लेने के मामले में...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 03:20 AM IST
मानसा जेल में कैदियों को मोबाइल, मनपसंद बैरक और नशा करने की छूट देने की एवज में 25 हजार की रिश्वत लेने के मामले में जेल सुपरिटेंडेंट दविंदर सिंह रंधावा को गिरफ्तार किया है। विजिलेंस ब्यूरो बठिंडा रेंज ने वीरवार को मानसा जेल से रंधावा को उस समय गिरफ्तार किया जब वह ड्यूटी पर जेल में थे।

विजिलेंस ने उनकी कोठी में भी सर्च किया। आरोपी को विजिलेंस शुक्रवार को मानसा कोर्ट में पेश करेगी। 17 दिसंबर को विजिलेंस ब्यूरो टीम ने मानसा जेल के वेलफेयर अफसर सिकंदर सिंह और कैदी पवन कुमार को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। वे लोग एक अन्य कैदी गौरव के भाई रविंदर से रिश्वत ले रहे थे। उनके कब्जे से 50 हजार की नकदी और 86200 रुपए का चेक बरामद हुआ था। विजिलेंस ब्यूरो ने इस मामले में मानसा जेल के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट गुरजीत सिंह बराड़ को भी केस में नामजद किया था, लेकिन वह केस दर्ज होने के बाद से फरार हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि जेल सुपरिटेंडेंट रंधावा ने ही उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी पवन को जेल से बाहर रिश्वत के पैसे लेने भेजा था। कैदी ने खुलासा किया है कि वह रिश्वत के पैसे जेल सुपरिटेंडेंट दविंदर रंधावा और डिप्टी सुपरिटेंडेंट गुरजीत बराड़ को देता था।

विजिलेंस की टीम ने वीरवार को आरोपी को ऑन ड्यूटी जेल से किया अरेस्ट

विजिलेंस की ओर से पकड़ा गया मानसा जेल सुपरिटेंडेंट दविंदर सिंह रंधावा।


कैदी गौरव को नशा तस्करी में 12 साल की कैद हुई थी। मौड़ मंडी निवासी कैदी पवन कुमार उस कैंटीन का इंचार्ज है। हत्या के एक मामले में वह 20 साल की सजा काट रहा है। अन्य कैदियों के परिजन कैदी गौरव के अकाउंट में पैसे डाल देते थे, ताकि गौरव उन कैदियों को उनकी जरूरत का सामान मुहैया करवा सके। जब जेल के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट गुरजीत सिंह बराड़ को इस बात का पता चला तो उसने गौरव को अपने ऑफिस में बुला लिया। उसने गौरव को धमकाया और मारपीट की। बराड़ ने उससे कहा कि कैदियों से लिए गए 86 हजार रुपए और उसके अलावा एक लाख रुपये देने पर उसकी जान छूटेगी। उसने गौरव से पैसे वसूलने के लिए वेलफेयर अफसर सिकंदर सिंह और कैदी पवन की ड्यूटी लगा दी। दहशत में आया गौरव पैसों के इंतजाम के लिए लगातार अपने घर फोन कर रहा था। इससे तंग आकर रविंदर ने शनिवार को विजिलेंस के पास शिकायत कर दी।

रंधावा ने ही कैदी पवन को जेल से बाहर रिश्वत के पैसे लेने के लिए भेजा था

विजिलेंस के एसपी भुपिंदर सिंह ने बताया कि जेल में कैदियों से रिश्वत लेने का हिसाब-किताब डिप्टी जेल सुपरिटेंडेंट गुरजीत बराड़ की निगरानी में सहायक सुपरिटेंडेंट सिकंदर सिंह जो कैंटीन इंचार्ज था वही करता रहा। कैंटीन से मिले दो आरजी रजिस्टरों में रिश्वत लेने का हिसाब किताब है। जेल अधिकारी कैदियों को जेल में सुविधाएं मोबाइल, नशा, मनपसंद बैरक आदि के लिए 10 से लेकर 25 हजार रुपए तक की रिश्वत ली जाती थी। ये भी खुलासा हुआ कि बाहर सहायक सुपरिटेंडेंट सिकंदर सिंह के साथ रिश्वत लेने गया कैदी पवन कुमार को जेल से बाहर भेजने के लिए जेल सुपरिटेंडेंट ने ही दरबान को आदेश दिए थे।

पूर्व डिप्टी जेल सुपरिटेंडेंट बराड़ भी फरार

रिश्वत मामले में नामजद पूर्व डिप्टी जेल सुपरिटेंडेंट गुरजीत बराड़ की अग्रिम जमानत याचिका हाइकोर्ट ने खारिज कर दी थी। उनके खिलाफ 17 दिसंबर को विजिलेंस ने केस दर्ज किया था। केस दर्ज होने के बाद से आरोपी 6 महीने से फरार चल रहा था। जिसे गिरफ्तार करने में विजिलेंस की टीम असफल रही। अब विजिलेंस ब्यूरो ने आरोपी गुरजीत सिंह को भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अगली पेशी 19 मई है।