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साइन बोर्डों पर अंग्रेजी में लिखे शहरों और गांवों के नाम पर कालिख पोती

मां बोली सत्कार कमेटी व शिअद अमृतसर के नौजवानों द्वारा भवानीगढ़ से नदामपुर तक नेशनल हाईवे पर लगे साइन बोर्डों पर...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 02:15 AM IST
साइन बोर्डों पर अंग्रेजी में लिखे शहरों और गांवों के नाम पर कालिख पोती
मां बोली सत्कार कमेटी व शिअद अमृतसर के नौजवानों द्वारा भवानीगढ़ से नदामपुर तक नेशनल हाईवे पर लगे साइन बोर्डों पर अंग्रेजी भाषा में लिखे शहरों व गांवों के नाम पर कालिख पोती गई। नौजवानों की मांग है कि साइन बोर्डों पर शहरों व गांवों के नाम ऊपर पंजाबी में व नीचे अंग्रेजी में लिखे जाएं लेकिन इन बोर्डों पर नाम ऊपर अंग्रेजी में व नीचे पंजाबी में लिखे हुए हैं। ऐसे में नौजवानों ने साइन बोर्डों पर अंग्रेजी में लिखे नामों पर काली पोत दी है। इस मौके पर शिअद अमृतसर किसान विंग जिला पटियाला के प्रधान राजिंदर सिंह फतेहगढ़ छन्ना, मां बोली सत्कार कमेटी के राज्य प्रधान लक्खा सधाना, हरदीप सिंह असमानपुर ने कहा कि पंजाबी मां बोली को बनता सम्मान दिलाने के लिए अंग्रेजी भाषा पर कालिख पोती गई है। उनकी मांग है कि बोर्डों पर सबसे ऊपर पंजाबी में नाम लिखे जाएं लेकिन सरकार ने अंग्रेजी को पहल दी हुई है। इस मौके हरमन सिंह, नोबल सिंह, प्रदीप सिंह, संदीप सिंह, करनजीत सिंह, सिद्धू धनेठा, राम सिंह, गुरविंदर सिंह मौजूद थे। (लखविंदर)

साइन बोर्ड पर पंजाबी नहीं लिखी गई तो रंग फेरना दोबारा करेंगे शुरू : लक्खा

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धूरी |पंजाबी हमारी मां बोली है जिसकी जगह कोई ओर भाषा नहीं ले सकती है। इसलिए पंजाबी को राज्य में पहले नंबर पर लाने हेतू प्रयास जारी रहेंगे। यह विचार लक्खा सिधाना ने आज धूरी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रगट किए। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए शुरू किए गए संघर्ष के चलते उन पर मुकदमे भी दर्ज हुए हैं। उन्हें जेल तक भी जाना पड़ा है। बावजूद इसके उनके प्रयास जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब में लगे साइन बोर्डों व दफ्तरों में मां बोली पंजाबी को पहला दर्जा दिलाने के लिए उनके द्वारा पंजाब के राज्यपाल, मुख्यमंत्री व सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को मिल कर मांग पत्र दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि बावजूद इसके उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अब इसके लिए वह फिर से ऐसे साइन बोर्डों पर रंग फेरने की मुहिम का आगाज करेंगे, जिन बोर्डों पर मां बोली पंजाबी को पहला दर्जा नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि मां बोली पंजाबी को बनता सम्मान दिलाने हेतू समूचे पंजाबियों को आगे आना चाहिए। (राजेश टोनी)

धूरी |पंजाबी हमारी मां बोली है जिसकी जगह कोई ओर भाषा नहीं ले सकती है। इसलिए पंजाबी को राज्य में पहले नंबर पर लाने हेतू प्रयास जारी रहेंगे। यह विचार लक्खा सिधाना ने आज धूरी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रगट किए। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए शुरू किए गए संघर्ष के चलते उन पर मुकदमे भी दर्ज हुए हैं। उन्हें जेल तक भी जाना पड़ा है। बावजूद इसके उनके प्रयास जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब में लगे साइन बोर्डों व दफ्तरों में मां बोली पंजाबी को पहला दर्जा दिलाने के लिए उनके द्वारा पंजाब के राज्यपाल, मुख्यमंत्री व सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को मिल कर मांग पत्र दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि बावजूद इसके उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अब इसके लिए वह फिर से ऐसे साइन बोर्डों पर रंग फेरने की मुहिम का आगाज करेंगे, जिन बोर्डों पर मां बोली पंजाबी को पहला दर्जा नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि मां बोली पंजाबी को बनता सम्मान दिलाने हेतू समूचे पंजाबियों को आगे आना चाहिए। (राजेश टोनी)

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