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भारत में हर साल सात से दस हजार बच्चे थैलेसीमिया से पीड़ित होते हैं : डॉ. अकमल

रहबर आयुर्वेदिक व तिबी मेडिकल कॉलेज द्वारा थैलेसीमिया दिवस मनाया गया। यूनानी विभाग के डॉ. मोहम्मद अकमल ने संबोधन...

Danik Bhaskar | May 11, 2018, 03:20 AM IST
रहबर आयुर्वेदिक व तिबी मेडिकल कॉलेज द्वारा थैलेसीमिया दिवस मनाया गया। यूनानी विभाग के डॉ. मोहम्मद अकमल ने संबोधन करते बताया कि थैलेसीमिया माता-पिता से होता है। थैलेसीमिया के रोग से बच्चे के शरीर में हिमोग्लोबिन बनने की प्रक्रिया में गड़बड़ हो जाती है, जिस कारण शरीर में खून बनना बंद हो जाता है व बच्चे में खून की कमी हो जाती है। इस कारण बच्चे को बचाने के लिए बार-बार खून चढ़ाना पड़ता है। जिन बच्चों के माता-पिता को थैलेसीमिया होता है। उनके बच्चों को मेजर थैलेसीमिया होने का खतरा बना रहता है। यदि बच्चे के माता व पिता में से एक को थैलेसीमिया होता है तो बच्चे को थैलेसीमिया होने का खतरा कम हो जाता है। बच्चे के शरीर में थैलेसीमिया संबंधी 3 वर्ष की आयु में ही पता चल जाता है। बच्चे के शरीर में खून की कमी हो जाती है। उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया से बीमार बच्चे के शरीर व चेहरे की हड्डियां मोटी हो जाती है। बच्चे के दांत बाहर को आ जाते है।

बच्चे के लीवर का आकार बड़ा हो जाता है। उन्होंने बताया कि भारत में हर वर्ष 7 से 10 हजार बच्चों को थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी होती है। इस मौके पर संस्था के चेयरमेन डॉ. एमएस खान, डॉ. हरप्रीत भंडारी, डॉ. फुरकान आमीन, डॉ. एन इमतिआजी आदि उपस्थित थे। (लखविंदर)

डॉ. अकमल।