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श्रावण के आगमन से प्राचीन शिव मंदिर ‘गगन जी का टिल्ला’ में दर्शन के लिए आते हैं भक्त

दातारपुर से 12 किलोमीटर दूर गांव सोहड़ा के घने जंगलों में स्थित प्राचीन शिव मंदिर ‘गगन जी के टिल्ले’ के नाम से...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 16, 2018, 02:05 AM IST

श्रावण के आगमन से प्राचीन शिव मंदिर ‘गगन जी का टिल्ला’ में दर्शन के लिए आते हैं भक्त
दातारपुर से 12 किलोमीटर दूर गांव सोहड़ा के घने जंगलों में स्थित प्राचीन शिव मंदिर ‘गगन जी के टिल्ले’ के नाम से प्रसिद्ध है, क्योंकि जिस पहाड़ी पर भगवान शिव शंकर जी ने डेरा जमाया है, वह कंडी नहर सोहड़ा पुल से हजारों मीटर ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर में शिवलिंग के दर्शन करने के लिए भक्तों को 766 सीढ़ियां चढ़कर जाना पड़ता है। भक्तों की थकावट को दूर करने के लिए आधे रास्ते के बाद एक मनमोहक तीस फीट ऊंची भगवान शिव शंकर जी की मूर्ति रंजन ब्रदर्स दसूहा वालों की तरफ से तैयार करवाई गई है। सीढ़ियां चढ़ते समय भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर प्रबंधक कमेटी की ओर से बरसात और धूप से बचाव के लिए जगह-जगह पर पक्के शेड बनाए गए हैं व पीने वाले पानी का भी पुख्ता इंतजाम किया गया है।

सोहड़ा के जंगल में पहाड़ी पर है मंदिर, पांडवों ने अज्ञातवास में यहां की थी भगवान शिव की पूजा

इस प्राचीन मंदिर का इतिहास पांडवों से जुड़ा है। दंत कथा के अनुसार अज्ञातवास काटने से पहले भगवान श्रीकृष्ण जी ने पांडवों को सुनसान घने जंगल में जाकर शिव शंकर जी की पूजा अर्चना करने को कहा था। तब पांडवों ने इस घने जंगल में द्रोपदी के साथ आकर शिवजी की पूजा की। पूजा से खुश होकर भगवान शिव शंकर ने शिवलिंग रूप में दर्शन दिए जो आज भी मंदिर में स्थित है। अज्ञातवास के दौरान पांडव प्रत्येक पूर्णमासी वाले दिन इस जंगल में आकर शिवलिंग के दर्शन करके पूजा करते रहे। धीरे-धीरे यह बात आसपास के गांवों में लोगों तक पहुंच गई तो लोग भी दर्शन करने के लिए आने लगे। अब जंगल की पहाड़ियों को काट कर शिवलिंग वाले स्थान पर आकर्षक मंदिर बना हुआ है और मंदिर के रखरखाव के लिए कमेटी गठित की गई है। इस मंदिर में आज श्रावण महीने के शुभ आगमन से सवा महीना लगातार हर रोज हजारों भक्तजन पहुंचकर शिवलिंग पर जल चढ़ाकर पूजा अर्चना करेंगे। सवा महीना लगातार हर रोज मंदिर में पहुंचने वाले भक्तजनों के लिए लंगर लगाए जाएंगे। मंदिर में श्रावण महीने के दौरान हर रोज सुबह दसूहा, हाजीपुर, दातारपुर, मुकेरियां, नंगल घोगरा, सहित नजदीकी गांवों से भक्तजन पहुंचते हैं।

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