Hindi News »Punjab »Datarpur» बैसाखी पर गंगा मैया दरबार में होती हैं प्रकट

बैसाखी पर गंगा मैया दरबार में होती हैं प्रकट

भास्कर संवाददाता | दातारपुर कस्बा दातारपुर से चार किलोमीटर दूर गांव ललोते उलाहा बाग में महान विभूति बाबा ईशर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 14, 2018, 02:10 AM IST

भास्कर संवाददाता | दातारपुर

कस्बा दातारपुर से चार किलोमीटर दूर गांव ललोते उलाहा बाग में महान विभूति बाबा ईशर दास जी के पावन दरबार पर शनिवार को बैसाखी का भारी मेला लगेगा। बाबा जी इस तपोस्थल पर आसपास के गांवों और बाहरी दूर दराज शहरो से भारी तादाद में भक्त नतमस्तक होने के लिए पहुंचेंगे।

बाबा ईशर दास जी का इतिहास करीब 160 साल पुराना है। ऐसी धारणा है कि अगर दरबार मे स्थित कुएं के जल से जो भी भक्त बैसाखी वाले दिन स्नान करता है उसकी छोटी मोटी बीमारियां और आलस्यपन दूर हो जाता है। भक्त बैसाखी वाले दिन सुबह सुबह इस दरबार पर आकर कुएं के जल से स्नान करते है और माथा टेका कर अटूट लंगर का प्रसाद ग्रहण करते हैं। बाबा ईशर दास जी गंगा मैया के सच्चे भक्त थे वह दिन रात गंगा मैया की तपस्या व पूजा करते थे। एक बार संत महात्माओं का जत्था गंगा मैया हरिद्वार जाने लगा इलाके के सभी साधु संत इकट्ठे हुए। परंतु किसी कारण वंश बाबा ईशर दास जी इस जत्थे मे हरिद्वार नहीं जा सके। उन्होंने अपने साथी संत से कहा कि मै गंगा स्नान करने नहीं जा सकता आप मेरी चिश्ती ले जाओ और इसमें गंगा जल भरकर ले आना। हरिद्वार पहुंचने पर सभी संतो ने गंगा मे डुबकी लगाई और जब बाबा ईशर दास जी की और से भेजी चिश्ती में गंगा जल भरने के लिए गंगा मे डुबोई तो चिश्ती हाथ से निकल कर नदी मे बह गई।

जिस संत को गंगा जल भरने के लिए चिश्ती दी गई थी उसने सोचा कि बाजार से नई चिश्ती खरीदकर उसमें गंगा जल भरकर ले जाते हैं उसने ऐसा ही किया। हरिद्वार से वापस आने पर संत ने बाबा ईशर दास जी को गंगा जल से भरी चिश्ती थमा दी। चिश्ती को देखते ही बाबा ईशर दास जी बोले यह मेरी चिश्ती नहीं है। साधु संतों ने बैठकर हरिद्वार वाली सारी बात बाबा ईशर दास जी को बताई। बात सुनने के बाद बाबा ईशर दास जी ने कहा कि अगर मै गंगा मैया का सच्चा भक्त हूंगा तो गंगा मैया मुझे जरूर दर्शन देगी यह बात कहकर वह फिर भक्ति मे लीन हो गए। कुछ पलों के बाद ही दरबार मे स्थित कुएं मे से गंगा मैया की लहरों की आवाज सुनाई देने लगी तब बाबा ईशर दास जी और वहां बैठे सभी साधु संत कुएं के पास आए तो देखा जो चिश्ती बाबा ईशर दास जी ने हरिद्वार गंगा जल भरने के लिए भेजी थी वह उस कुएं मे तैर रही थी। उस समय से ही गंगा मैया बाबा ईशर दास के पावन दरबार पर ललोते उलाहा बाग मे स्थित कुएं मे साक्षात प्रस्थान करती है।

आस्था

आज बाबा ईशर दास के दरबार गांव ललोते उलाहा बाग में लगेगा बैसाखी का मेला

गांव ललोते उलाहा बाग मे स्थित बाबा ईशर दास की प्रतिमा से सजा दरबार।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Datarpur

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×