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अहंकार इंसान का आपसी प्रेम, मेल मिलाप और सब कुछ खत्म करवा देता है : विजय कौशल

दातारपुर| गांव रकड़ी के शिव मंदिर मे चल रही श्रीमद् भागवत कथा की तीसरे दिन की बैठक में जनकपुरी धाम से पधारे कथावाचक...

Dainik Bhaskar

May 31, 2018, 02:15 AM IST
अहंकार इंसान का आपसी प्रेम, मेल मिलाप और सब कुछ खत्म करवा देता है : विजय कौशल
दातारपुर| गांव रकड़ी के शिव मंदिर मे चल रही श्रीमद् भागवत कथा की तीसरे दिन की बैठक में जनकपुरी धाम से पधारे कथावाचक विजय कौशल महाराज जी कहा कि चौरासी लाख योनियां भोगने के बाद मानव जीवन प्राप्त होता है और भगवान हमें यह अनमोल हीरा जन्म इसलिए देता है, कि समाज में आपसी प्रेम भाईचारा बढ़े और सब एक दूसरे के सहायक बने। विजय कौशल महाराज ने कहा कि जब तक इंसान बाल अवस्था में होता है, तो सबसे प्रेम भाव होता है, लेकिन जैसे जैसे वह अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पैसे कमाने मे जुट जाता है और ज्यादा धन जमा होने पर वह अहंकार से भर जाता है, तब उसको अपने सगे संबंधी रिश्तेदार सब भूलने शुरू हो जाते है। एक दिन ऐसा आ जाता है कि वह सभी से मुख मोड़ने लगता है।

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा में भी मानव को जन सेवा करने के लिए प्रेरित किया, ताकि उसका अगला जन्म भी सुधर जाए। इस मौके सुषमा मेहता, अंजू डोगरा, सुदेश कुमारी, सुनीता, कमलेश, सुलक्षणा, मंजू, ममता, राज रानी, शशी, विपन मेहता, सतीश, अंकित, मोहित, साहिल और भारी तादाद मे भक्त हाजिर थे।

श्रीमद् भागवत कथा सुनाते विजय कौशल महाराज। और मौजूद भक्त।

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अहंकार इंसान का आपसी प्रेम, मेल मिलाप और सब कुछ खत्म करवा देता है : विजय कौशल
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