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एएसआई ने 1.15 लाख लेकर झपटमारों पर केस किया दर्ज रुपए न लौटाने पर एसएसपी को दी शिकायत, जांच के बाद सस्पेंड

एएसआई द्वारा केस रफा-दफा करने के लिए पहले बाइक झपटमारों से रुपए ऐंठने, बाद में रुपए लेने वाले के खिलाफ केस दर्ज...

Dainik Bhaskar

Feb 07, 2018, 02:20 AM IST
एएसआई द्वारा केस रफा-दफा करने के लिए पहले बाइक झपटमारों से रुपए ऐंठने, बाद में रुपए लेने वाले के खिलाफ केस दर्ज करने, रिश्वत के तौर पर लिए रुपए में से 22 हजार रुपए वापस लौटाने और इस संबंधी मोबाइल पर हुई बात की आॅडियो रिर्काडिंग वायरल होने के बाद एसएसपी ने एसआईटी बनाकर इस मामले की जांच करवाई। जिसमें एएसआई को दोषी पाए जाने पर उसके खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। गौरतलब है कि इस मामले को प्रमुखता से दैनिक भास्कर अखबार ने 25 नंबवर 2017 को प्रकाशित किया था। जिसके बाद मजबूर होकर एएसआई को एक सप्ताह बाद झपटमारों के खिलाफ केस दर्ज करना पड़ा था। एएसआई के खिलाफ एसएसपी को दी लिखित शिकायत में शिकायतकर्ता ने भास्कर अखबार में छपी खबर को साथ में लगाकर दिया था। वहीं एएसआई के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद एसएसपी ने उसे सस्पेंड कर दिया है। साथ ही थाना कोटइसेखां थाने के एसएचओ को भी सस्पेंड कर पुलिस लाइन भेज दिया है।

पैसै लेकर किया केस रफा-दफा, खबर प्रकाशित हुई तो दवाब में झूठा केस बना दिया

गांव मसीतां निवासी महावीर सिंह ने डीजीपी से लेकर विजिलेंस के डायरेक्टर को एएसआई अवनीत सिंह के खिलाफ दी शिकायत में कहा था कि उसके सगे भाई जगराज सिंह उर्फ जोगा और चचेरे भाई बलविंदर सिंह उर्फ बिंदर के खिलाफ मोबाइल झपटमारी का केस दर्ज न करने के एवज में एक लाख 15 हजार रुपए लिए थे। साथ ही एएसआई ने उनको धोखे में रखकर मेेरे दोस्त मनजिंदर सिंह निवासी लोहगढ़ से कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए लिए और कहा कि उसके भाईयों को बचाने के लिए उसके दोस्त के हस्ताक्षर जरूरी हैं। बाद में एक दिसबंर 2017 को उसी दोस्त के हस्ताक्षरों को आधार बनाकर एएसआई ने उसके भाई जगराज सिंह उर्फ जोगा और चचेरे भाई बलविंदर सिंह उर्फ बिंदर के खिलाफ मोबाइल चोरी का झूठा केस बनाकर गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन गिरफ्तारी के चार दिन बाद ही उसने अपने भाइयों को जमानत पर रिहा करवा लिया। जब उसने एएसआई से पैसे लेने के बाद भी केस करने संबंधी पूछा तो उसने कहा कि उसकी नौकरी खतरे में पड़ गई थी। इसलिए उसने मनजिंदर सिंह के बयान पर मजबूरन केस दर्ज करना पड़ा। महावीर सिंह ने उसे दिए एक लाख 15 हजार रुपए वापस मांगी तो उसमें से 22 हजार रुपए एएसआई ने उसके चाचा को दे दिए। महावीर सिंह ने कहा कि 22 हजार रुपए चाचा को तो दिए हैं बाकि की राशि कब दोगे, इस पर एएसआई ने बाकि रुपए देने से साफ इंकार कर दिया। इस बात से दुखी होकर उसने डीजीपी से लेकर विजिलेंस तक एएसआई अवनीत सिंह के खिलाफ शिकायत दी थी। डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने मामले की जांच मोगा के एसएसपी को करने के लिए कहा था। जिस पर एसएसपी ने जिले के तीन अधिकारियों की एसआईटी गठित कर एसपी डी वजीर सिंह खैहरा, डीएसपी डी सर्बजीत सिंह , डीएसपी धर्मकोट अजयराज सिंह को जांच सौंप दी थी। जांच टीम ने मामले की जांच एक सप्ताह में पूरी कर एएसआई अवनीत सिंह को रुपए लेने का आरोपी मानते हुए उसके खिलाफ केस दर्ज करने की सिफारिश की। जिसके बाद कोटइसेखां थाने में एएसआई अवनीत सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। वहीं जांच कर रही टीम के हाथ एएसआई अवनीत सिंह व शिकायतकर्ता की आॅडियों रिर्कांडिग लग गई। वहीं इस मामले में थाना कोटइसेखां के एसएचओ हरिंदर सिंह चमेली को भी एसएसपी ने सस्पेंड करके उसे पुलिस लाइन भेज दिया है। एसआईटी टीम के डीएसपी डी सर्बजीत सिंह ने कहा कि एएसआई के खिलाफ शिकायत आने के बाद एसएसपी राजजीत सिंह हुंदल ने एसआईटी की तीन सदस्य टीम बनाकर जांच सौंप दी। जांच में एएसआई के खिलाफ रुपये लेने के पुख्ता सबूत मिलने के बाद उसके खिलाफ केस दर्ज किया। साथ ही एसएसपी ने एएसआई को सस्पेंड कर दिया है।

बाइक सवारों ने धर्मकोट के बाजार से युवती का मोबाइल झपटा था

चार नंबवर को बाइक सवार दो युवकों ने धर्मकोट बाजार से एक स्कूटी सवार युवती से मोबाइल झपटा था। थाना कोटइसेखां में तैनात एएसआई अवनीत सिंह सीसीटीवी कैमरे की फुटेज लेकर बाइक सवार दोनों युवकों की तलाश की। जिनकी पहचान जगराज सिंह उर्फ जोगा, बलविंदर सिंह उर्फ बिंदर निवासी गांव मसीता के रूप में हुई। आरोपियों की पहचान होने के बाद एएसआई ने झपटमारों से दो लाख रुपए की मांग की। आरोपियों के भाई ने 21 नबंवर को 15 हजार और 22 नबंवर को एक लाख केस दर्ज न करने की एवज में दिए थे। जबकि उन्हीं युवकों से पूछताछ में पता चला कि उन्होंने युवती का मोबाइल गांव चिरागशाह वाला के युवकों को बेचा था। इसके बाद एएसआई अवनीत सिंह चोरी का मोबाइल खरीदने वाले युवकों से केस दर्ज न करने के एवज में पांच-पांच हजार रुपए की कीमत के चार मोबाइल और बीस हजार रुपए नकदी लेकर मामले को रफा-दफा दिया था।

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