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साथ बैठे, पास बैठे, बातें चलीं तो फिर एक हुए राजविंदर व सुखविंदर

पलभर में रिश्तों में तीखी खटास की बर्फ पिघल गई। जजों ने उनकी बात बड़े ध्यान से सुनीं और उनको साथ बैठकर बातचीत करने को...

Danik Bhaskar | Feb 11, 2018, 02:15 AM IST
पलभर में रिश्तों में तीखी खटास की बर्फ पिघल गई। जजों ने उनकी बात बड़े ध्यान से सुनीं और उनको साथ बैठकर बातचीत करने को कहा। उन्होंने बात मानी और आपस में बातचीत शुरू की तो उनके बीच गलतफहमियों की दीवारें ढहती चली गईं। अब वे एक थे। उनका परिवार टूटने से बच गया।

लहरागागा की निवासी राजविंदर कौर की 8 वर्ष पहले नाभा के सुखविंदर सिंह से शादी हुई थी। शादी के बाद एक बेटा पैदा हुआ जो अभी 4 वर्ष का है। शादी के बाद से राजविंदर को ससुराल परिवार तंग करने लगा था। ऐसे में दोनों परिवारों में पंचायती समझौते भी हुए। जब झगड़ा अधिक बढ़ गया तो दिसंबर 2017 में राजविंदर कौर मायके आ गई, जिसके बाद उसने ससुराल परिवार के खिलाफ कोर्ट केस कर दिया। शनिवार को उनका मामला लोक अदालत में पेश किया था।

जिला कानूनी सेवाएं अथारिटी ने शनिवार को संगरूर जिला मुख्यालय और उपमंडलों मालेरकोटला, सुनाम, धूरी व मूनक में राष्ट्रीय लोक अदालतें लगाईं। इनमें कुल 16 बेंचों का गठन किया गया। इनके समक्ष कुल 3587 केस प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 1524 केसों (42.5%) का राजीनामे के तहत निपटारा कर दिया गया। व 12,22,61,731 रुपए के अवॉर्ड पास किए गए।

इसके अलावा माल विभाग द्वारा भी कुल 623 केस लगाए गए, जिनमें से 586 केसों का राजीनामे के तहत निपटारा किया गया।

संगरूर में लगी लोक अदालत में मामले की सुनवाई करते जज साहिबान ।

कोई फीस नही लगती

अथारिटी के सचिव तेज प्रताप सिंह रंधावा ने बताया कि लोक अदालत में केस की सुनवाई के लिए कोई कोर्ट फीस नहीं लगती। यदि लोक अदालत से मामले का निपटारा होता है तो अदा की गई कोर्ट फीस की वापसी को यकीनी बनाया जाता है। जिन मामलों का निपटारा यहां होता है, उनमें आगे अपील नहीं की जा सकती। लोक अदाल तों से केसों का निपटारा शीघ्र व दोस्ताना तरीके से होता है। लोक अदालतों के फैसलों को कोर्ट की मान्यता प्राप्त है।