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साहित्यकारों ने गजलों से समां बांधा

पंजाबी साहित्य सभा की बैठक सभा मूल चंद शर्मा की अध्यक्षता में स्थानीय डा. राम सिंह सिद्धू यादगारी साहित्य भवन में...

Danik Bhaskar

Jan 15, 2018, 02:15 AM IST
पंजाबी साहित्य सभा की बैठक सभा मूल चंद शर्मा की अध्यक्षता में स्थानीय डा. राम सिंह सिद्धू यादगारी साहित्य भवन में हुई। इस दौरान सबसे पहले डाॅ. दलजीत सिंह तथा लेखक ओम प्रकाश गासो की धर्मप|ी के अकाल चलाना करने पर गहरी संवेदना व्यक्त की गई।

इसके उपरांत रचनाओं के दौर में मूल चंद शर्मा ने नए साल का गीत ‘यह बीस सौ अठारहवां साल तुम्हारे लिए खुशियों से भरपूर रहे, चरणजीत कौर ने गीत ‘दादी-नानी भी तो बेटी थी, बेटी बिना यहां होना की क्या था, कर्म सिंह जख्मी ने गजल ‘ना बना है ना बनेगा हिन्दू देश कभी भी, के अलावा डा. परमजीत दर्दी, वरिन्द्र मसौण, दर्दी चुंघावाला, सुरजीत राजोमाजरा, सुखदेव पेंटर, डा. जगतार, जगजीत लड्डा, भूपिन्द्र बोपाराए, कुलवंत मल्लूमाजरा, तेजा सिंह वड़ैच, सुखविंदर लोटे, देवी सरूप मीमसा तथा लोक गायक गुरदयाल निर्माण ने भी सभ्याचारक बोलियां, कविता, गीत व गजल आदि सुना कर अपनी-अपनी हाजिरी दर्ज करवाई। समारोह के आखिर में चरणजीत मीमसा, जीवन सिंह तथा गुरमुख सिंह आदि ने अपने रचनात्मक सुझाव भी पेश किए। (राजेश टोनी)

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