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सेवा केन्द्र के कर्मचारियों की हड़ताल 7वें दिन भी जारी

सेवा केन्द्र कर्मचारी यूनियन संगरूर द्वारा अपना वेतन न मिलने और केन्द्रों को बंद करने के फैसले के विरोध में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 12, 2018, 02:20 AM IST

सेवा केन्द्र कर्मचारी यूनियन संगरूर द्वारा अपना वेतन न मिलने और केन्द्रों को बंद करने के फैसले के विरोध में हड़ताल 7 वें दिन भी जारी रही। इस दौरान एपी इन्क्लेव में स्थित सेवा केन्द्र में एकत्रित हुए तहसील धूरी व मालेरकोटला के कर्मचारियों द्वारा पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपने रोष का इजहार किया गया। इस मौके पर यूनियन के जिला प्रधान व कोआॅर्डिनेटर धूरी मक्खन खां ने कहा कि सेवा केन्द्र के अधीन काम करते कर्मचारियों को पिछले 5 महीनों से वेतन न मिलने के चलते आर्थिक तंगी के परेशानी उठानी पड़ रही है। अब पंजाब सरकार के सेवा केन्द्रों को बंद करने के फैसले के बाद उनके समक्ष रोजी रोटी का सवाल खड़ा हो गया है। कैप्टन अमरिन्द्र सिंह ने चुनाव के दौरान घर-घर नौकरी देने का वायदा किया था, लेकिन अब इसके विपरीत पहले से काम करते आ रहे मुलाजिमों को ही हटाया जा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि उनका पिछले 5 महीनों बकाया वेतन जारी किया जाए। गांवों के सेवा केन्द्रों को भी पहले की तरह ही चलाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनका पूरा वेतन रिलीज नहीं होता है, तब तक वह हड़ताल जारी रखेंगे। इस मौके पर कोआॅर्डिनेटर गौरवदीप सिंह, मनदीप सिंह, अनिल कुमार, हरविंदर सिंह, कुलवंत, जसप्रीत आदि मौजूद थे। (अमित)

धूरी के एपी इन्क्लेव में स्थित सेवा केन्द्र के समक्ष नारेबाजी करते कर्मचारी।

केन्द्रों के कर्मचारियों की फीस दे कंपनी वरना फीस रोकने का फैसला

संगरूर |सेवा केन्द्र मुलाजिमों ने पिछले 5 महीनों से वेतन न मिलने पर डीसी संगरूर को ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होंने अपनी मांगों व परेशानियों के संबंध में डीसी को अवगत करवाया। उन्होंने मांग की है कि 31.03.2018 तक का वेतन उनके खातों मे डाला जाए नहीं तो मजबूरन उन्हें कंपनी की फीस रोकनी पड़ेगी। जिसकी जिम्मेवारी कंपनी की होगी। इस फीस का कोई भी मुलाजिम दुरुपयोग नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि कंपनी 1 महीने का वेतन खाते में डाल देती है, जिस कारण बाकी का वेतन वहीं रह जाता है। इसलिए अब समूह मुलाजिमों ने यह फैसला किया है कि पिछले पांच महीनों का वेतन खातों में जमा करवाया जाये, ताकि वह कंपनी की फीस जमा करवा सके।

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