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‘दूर तक देखदा रेहा तेरे पैरां दीयां पैड़ां नूं’

दीनानगर | इंटरनेशनल पंजाबी साहित्य सभा दीनानगर की बैठक सरपरस्त ध्यान सिंह शाहसिकंदर के निवास पर प्रधान डॉ. सुरेश...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 11, 2018, 02:02 AM IST

‘दूर तक देखदा रेहा तेरे पैरां दीयां पैड़ां नूं’
दीनानगर | इंटरनेशनल पंजाबी साहित्य सभा दीनानगर की बैठक सरपरस्त ध्यान सिंह शाहसिकंदर के निवास पर प्रधान डॉ. सुरेश मेहता की अध्यक्षता में हुई। इसमें साहित्यकार दर्शन सिंह अवारा की ओर से 1940 में लिखी गई कविता ‘बंदा रब नूं पर विचार चर्चा की गई। यहां ध्यान सिंह शाहसिकंदर ने कहा कि यह कविता यहां धर्मों के नाम पर किए कर्मकांडों, अंधविश्वास की धज्जियां उड़ाती है वहीं इंसान को सही राह भी दिखाती है।जय सिंह सैनी ने कहा कि तर्कशीलता और वैज्ञानिक सोच अपनाना समय की जरूरत है। अश्विनी शर्मा और राज कुमार शर्मा ने इस कविता को आज के समय के संदर्भ में सार्थक बताते हुए कहा कि पुरानी होने के बावजूद आज भी उतनी ही सार्थक है जिस समय इसे लिखा गया था। चर्चा के बाद कविताओं के चले दौर का आगाज परमजीत पाल ने गीत ‘आओ करीए अमर शहीदां को सारे प्रणाम’ से किया। बिशंभर अवांखीया ने गजल ‘सदा तूं खिड़खिड़ाउना ए’ शायरों के घरेलू हालातों को बयान कर गई। राजेश फूलपुरी की कविता ‘दूर तक देख दा रेहा तेरे पैरां दीयां पैड़ां नूं’ एक उदास माहौल पैदा कर गई। सुरजीत दर्द की कविता ‘दर्द देन वालियां तों मैं सदके जांवां’ भी खूब सराही गई। विशाल डीडा और चाहत ने सूफी गीत पेश किए। करतार सिंह स्यालकोटी ने सावन महीने पर आधारित विदाई रचना ‘इक तूं न आई ते सावन किस कम्म दा’ सुना कर खूब वाहवाही लूटी। निर्मल कांता ने कविता सावन पेश की। शाहसिकंदर ने दोहरे सुनाए। इस मौके पर पुष्पा कश्यप, धीरज शर्मा, लविंदर जौहल, रमणीक लखनपाल, किरण, रवि कुमार, कृष्ण कुमार, आरती, बीबी सुखदीप कौर उपस्थित थे।

बैठक में उपस्थित साहित्यकार। -भास्कर

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