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गीतों के रूप में हमेशा जीवित रहेंगे हिंदी गीतिकाव्य के पर्याय गोपालदास ‘नीरज’: प्रिंसिपल रतना शर्मा

शांति देवी आर्य महिला कॉलेज दीनानगर में हिंदी विभाग की ओर से पद्मभूषण विभूषित हिंदी कवि गोपालदास नीरज के निधन पर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 26, 2018, 02:15 AM IST

गीतों के रूप में हमेशा जीवित रहेंगे हिंदी गीतिकाव्य के पर्याय गोपालदास ‘नीरज’: प्रिंसिपल रतना शर्मा
शांति देवी आर्य महिला कॉलेज दीनानगर में हिंदी विभाग की ओर से पद्मभूषण विभूषित हिंदी कवि गोपालदास नीरज के निधन पर प्रिंसिपल रतना शर्मा की अध्यक्षता में श्रद्धांजलि समारोह करवाया। इस दौरान दो मिनट का मौन धारण कर उनकी आत्मिक शांति के लिए प्रार्थना की गई। वक्ताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वह हिंदी गीतिकाव्य के पर्याय बन चुके थे।

प्रियंका और ईशा अग्रवाल ने उनके जीवन पर अपने विचार रखे। निशा शर्मा और शीतल ने उनके गीतों को गुनगना कर समां बांधा। प्रिंसिपल रतना शर्मा ने उनकी फिल्मी दुनिया के गीतों में देन का जिक्र करते हुए कहा कि उनके सरल भाषा में लिखे गए गीत इस बात का साक्ष्य हैं कि संवेदनशीलता ही इंसानियत को जन्म देती है। पीढ़ी दर पीढ़ी के अंतर के चलते भले ही नई पीढ़ी इन जैसे कवियों के बारे अनभिज्ञ हो पर यह गीतों के रूप में आज भी हमारे बीच जीवित हैं और रहेंगे। हिंदी विभागाध्यक्ष पूनम महाजन ने कहा कि उनके निधन से साहित्य जगत के साथ साथ फिल्मी जगत में भी कभी न पूरी होने वाली क्षति हुई है और एक युग पर विराम लगा है। डॉ. कुलविंदर कौर छीना ने कहा कि 60 व 70 के दशक के बीच फिल्मी संगीत की दुनिया से जुड़े लोगों के लिए उनका

इस दुनिया से जाना असहनीय वेदना है। इस मौके हिंदी विभाग की डॉ. डिंपल शर्मा, संगीत विभाग की मनजोत कौर भी उपस्थित थे।

संबोधित करते प्रिं. रतना शर्मा।

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