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1971 की लड़ाई में उड़ा दिया गया सतलुज नदी का पुल फिर बना, रक्षा मंत्री ने किया राष्ट्र को समर्पित

Dainik Bhaskar

Aug 12, 2018, 05:54 PM IST

रक्षा मंत्री ने कहा कि इस पुलिस से फौज को ही नहीं, बल्कि फिरोजपुर की जनता को भी फायदा होगा।

1971 की लड़ाई में उड़ा दिया गया सतलुज नदी पर बना पुल, अब रक्षा मंत्री ने किया राष्ट्र को समर्पित

फिरोजपुर। फिरोजपुर के हुसैनीवाला अंतर्राष्ट्रीय बार्डर पर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन ने बॉर्डर रोड आर्गेनाइजेशन (बीआरओ) की ओर से चेतक प्रोजैक्ट के अंतर्गत सतलुज दरिया पर बनाए गए 280 फुट लंबे पुल को राष्ट्र को समर्पित किया। इस पुल को 1971 के भारत-पाक युद्ध में उड़ा दिया गया था।

इस मौके पर पर रक्षा मंत्री ने कहा हुसैनीवाला हैड पर बने इस पक्के पुल के निर्माण से न सिर्फ सेना को, बल्कि फिरोजपुर इलाके में रहने वाले लोगों को भी फायदा होगा। हुसैनीवाला शहीदों का पवित्र स्थल है, जहां शहीद भगत सिंह, राजगुरु, शहीद सुखदेव और अन्य देशभक्तों के स्मारक हैं। इस पुल का उद्घाटन करके उन्होंने बेहद खुशी महसूस हो रहा है। इस अवसर पर उन्होंने शहीदी स्मारक पर शहीदों को श्रद्धाजंलि भी अर्पित की। इस अवसर पर लैफ्टीनेट जनरल हरपाल सिंह,डायरैक्टर जनरल सीमा सड़क संगठन लैफ्टीनेट जनरल सुरिंद्र सिंह,सांसद शेर सिंह घुबाया तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

1971 की लड़ाई में पुल का रहा अहम रोल

तीन दिसंबर, 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान हुसैनीवाला पुल ने ही फिरोजपुर को बचाया था। उस समय पाक सेना ने भगत ¨सह, राजगुरु व सुखदेव के शहीदी स्थल तक कब्जा कर लिया था। मेजर कंवलजीत ¨सह संधू व मेजर एसपीएस बड़ैच ने इसे बचाने के लिए पटियाला रेजीमेंट के 53 जवानों सहित जान की बाजी लगा दी थी। अंत में सेना ने पुल उड़ाकर पाकिस्तानी सेना को देश में प्रवेश करने से रोका था। उसके बाद यहां लकड़ी का पुल बनाकर हुसैनीवाला सीमा पर जाने का रास्ता तैयार किया गया था। 1973 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्ञानी जैल ¨सह ने पाकिस्तान के साथ समझौता कर फाजिल्का के 10 गांवों को पाकिस्तान को सौंपकर शहीदी स्थल को पाक के कब्जे से मुक्त करवाया था।

चेतक प्रोजेक्ट के तहत तैयार हुआ पुल

280 फुट लंबे इस पुल को चेतक प्रोजेक्ट के तहत 2.48 करोड़ रुपए की लागत से पुनर्निमित किया गया है। पुल को बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) की ओर से तैयार किया गया है।

सेना के साथ 21 गांवों के बाशिंदों को मिलेगी सुविधा

भारत-पाक सरहद के नजदीक सतलुज नदी पर बने इस पुल का सामरिक दृष्टि से अहम स्थान है, यह पुल सेना, बीएसएफ के लिए जितना मददगार है, उससे कम 21 छोटे-बड़े गांवों के हजारों बाशिंदों के लिए भी नहीं है। हालांकि गांव के लोग अब भी ज्यादातर सतलुज नदी पार करने के लिए छोटी-बड़ी नावों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन खेती कार्य व आवागमन के बड़े साधनों को लाने व ले जाने के लिए वे इसी पुल का इस्तेमाल करते हैं।

हुसैनीवाला बॉर्डर खुलने से व्यापार के खुलेंगे रास्ते

भारत-पाकिस्तान के मध्य व्यापार के लिए हुसैनीवाला बॉर्डर भविष्य में खुलता है तो यह पुल अहम रोल प्ले करेगा। ऐसे में अब तक पुल का कुछ हिस्सा लकड़ी का होने के कारण बड़े वाहनों के आवागमन पर संशय की जो स्थित थी, वह अब खत्म हो गई है। अब पुल का निर्माण बॉर्डर खुलने पर बड़े वाहनों के आवागमन की दिशा में जो अब तक बड़ी अड़चन के रूप में देखी जा रही थी वह दूर हो गई है।

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